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February 21, 2011

अजब जिन्दगी

मेरी अज़ब है ज़िन्दगी
किसी से क्या गिला करू
तक़दीर रुठ जाये तो
मेरे ख़ुदा मै क्या करु
हालात ने नशिब ने
ग़म भर दिये है इस कदर
मंझिलो की कुछ ख़बर
मै कारवा को क्या करू
मिल जाये डुबने से भी आख़िर
तो एक साहील कही
तूफां की है आरज़ू
तूफां की दुआ करू
मंझिल की थी तलाश
तो गर्द ए सफ़र मिली मुझे
आँखे बरस पड़ी मेरी
काली घटा को क्या करू।
(जगजीत सिंह की एक बेहतरीन गझल)

February 18, 2011

मार्ग दर्शन


दर्शन एक सवाल हल नहीं कर पा रहा था। वो बहुत परेशान हो गया। अंत में वह पड़ोस के अंकल के घर गया। अंकल पेपर पढ़ रहे थे। उन्होंने दर्शन को आते देख अपना मुह पेपर के पीछे छुपा लिया। उन्हें उसका बहुत डर लगता था। वह आये दिन उनसे सवाल पूछने आ जाया करता था। न दिन देखता था न रात। आज उनका बिलकुल भी मन नहीं था की उसके सवाल हल कर दे।
लेकिन दर्शन भाई साहब कहा हार मानने वाले थे। वो घर में घुस आया। और बोला अंकल आप बुरा न माने तो मै कुछ पुछु?
हां हां बेटा पूछो। मै क्यों बुरा मानने लगा भला।
दर्शन ने अपना सवाल पूछना सुरु किया। वो कब रुकेगा इसकी राह अब अंकल को देखनी थी।
आखिर वो वक्त आही गया जब दर्शन रुका और अंकल से बोला, अंकल, अब आप इस बारे मुझे मार्ग दर्शन कीजिये।
हा हा जरुर।
जी बताइए।
वो देखो बेटा वो रहा मार्ग याने की रास्ता। उन्होंने दर्शन को घर के दरवाजे की तरफ इशारा किया।
तो? अब दर्शन बोला।
अब उस मार्ग का दर्शन कर लो।
हो गया मार्ग दर्शन। बराबर। और अंकल जोर जोर से हँसाने लगे। हा हा हा हा ................
बेचारा दर्शन छोटा सा चेहरा कर वहा से चलता बना।
(गूगल इमेज)

February 15, 2011

मेरा जन्म दिन

आज १५ फरवरी। मेरा असली जन्म दिन। अरे आप चौक क्यों गए? वाकई में यह मेरा असली जन्म दिन है। ऐसा मै इसलिए कह रहा हु क्योकि माता-पिता को मेरा जन्म दिन याद न होने की वजह से स्कुल में मेरा जन्म दिन १ जून डाल दिया था। आपको आश्चर्य होगा हमारे घर में सभी का जन्म दिन १ जून है। इतना ही नहीं मेरी ससुराल में भी यही है। अजी इतना ही नहीं सभी घरो में १ जून ही जन्म दिन होता है। कारण माता पिता की अशिक्षा। पहले के ज़माने में हम इतने प्रगत नहीं थे। वो तो बाद में ढूंढ़ निकाला वो भी गाव के पालिका कार्यालय से। उन्हें धन्यवाद देना चाहिए की उन्होंने इतना पुराना रेकोर्ड संभल कर रखा।

मेरी बेटी

दोस्तों, हमें एक बेटी ही है। इस साल वह एम् एस सी ( केमिस्ट्री) के अंतिम वर्ष में है। मेरा तबादला पुना में हुआ और मैने परिवार सहित पूना में रहने की सोच ली। उसे यहाँ एक अच्छे से कोलेज में दाखिला मिल गया। पिचले हप्तेसे उसके कोलेज में इंटर नेशनल केमिस्ट्री इयर मनाया गया। कुछ प्रतीयोगीतये हुई। पोस्टर कोम्पी टी शन मी उसने भाग लिया। सौभाग्य से मै पालक सभा में हिस्सा लेने गया था उसी समय उस प्रति योगिता का रिजल्ट डिक्लेअर किया गया। मेरे ही सामने मेरी बेटी को पहिला पुरस्कार मिला।मुझे बहुत ही आनंद हुआ। मन प्रफुल्लित हुआ। मुझे मेरी बेटी पर गर्व हुआ।
मैंने सोचा अपना आनद आपसे शेअर करू इसलिए यहाँ यह पोस्ट लिखी.

February 12, 2011

आँखे

( गूगल इमेज)
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
जो इस हँसी चहरे पर चार चाँद लगा देती है
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
जो आसमाँ में हँसी चाँद दिखाती है
ये हँसी दुनिया,
ये सौदर्य से लदी धरती
ये नीला आसमाँ
ये खुबसूरत जहाँ
हमें दिखलाती है
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
लेकिन हम इन्हें महज एक अँग समझ बैठते है
हमें इनका महत्त्व महसूस ही नहीं होता
वो तो उनसे पूछिए
जिन्हें ऊपरवाला
ये दो खुबसूरत मोती
ये दो आँखे देना भूल जाता है
वे जो इन आँखों को देख नहीं सकते
वे ही जानते है
कितनी खुबसूरत होती है ये आँखे



February 8, 2011

अकेलापन


जाने किस बात की सजा देते हो मुझे ?
हे प्रभु
मैंने ऐसा क्या गुनाह किया है?
मेरे अपने क्यों मुझसे खफा है?
अब तो ये अकेलापन काटने लगा है
मुझे ऐसा लगता है
जैसे

इस धरती पर मै अकेला ही
जीव रह गया हु
अब मुझसे बर्दास्त नहीं होता
हे प्रभु
ये
अकेलापन
क्यों रूठ गयी हो तुम मुझसे
बताओ मुझे बताओ
मेरा क्या गुनाह है
इस तरह चुपचाप रहो
तुम कुछ तो कहो
मै पागल हो जाऊंगा अब
ना सताओ मुझे
हे प्रभु आप ही कुछ करो
उसे समझाओ
हे प्रभु ।

February 6, 2011

जिंदगी एक सागर है

(सोर्स :गूगल इमेज)

जिंदगी एक सागर है

हम उसकी एक गागर है

उपरवाला पैदा कर

हर क्षण इस गागर में

एक एक बूंद जीवन के टपकाता रहता है

और

जब यह गागर भर जाती है

वो उसे फोड देता है

फर्क बस इतना है दोस्तों की

कौनसी गागर कब भरनी है

और

उसे कब फोडना है

यह उपरवाले की मर्जी पर

निर्भर करता है ।
हम तो बस एक गागर भर है।



February 5, 2011

जिंदगी एक झील

(गूगल इमेज)


जिंदगी एक झील है
जो तैरना सीख ले
वो जिंदगी जी लेता है,
वरना जिंदगी भर
इस झील में डूबकी लगाता रहता है
और अंत में डूब ही जाता है.


January 26, 2011

गणतंत्र दिवस


आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये

"वंदे मातरम."


January 24, 2011

एक महान कलाकार

शास्त्रीय संगीत के एक महान कलाकार पंडित भीमसेनजी जोशी अब इस दुनिया में नही रहे. मेरा सौभाग्य मनात हू कि आज मै उनके शहर पुना में रह रहा हु. पद्मश्री, पद्मभूषण भारत भूषण इ. पुरस्करो से उन्हे सन्मानित किया गया था. ऐसी महान हस्ती को मेरा सबसे पसंदीदा गीत 'मिले सूर मेरा तुम्हारा.......' के साथ श्रद्धांजली अर्पित करता हु.
भगवान उनकी आत्मा को शांती दे.



January 22, 2011

ये बीबियाँ

( आजकल पता नहीं क्या हुआ है मुझे मै व्यंग लिखने लगा हू, ये कैसा बदल हुआ कब हुआ पता ही नहीं चला. अच्छा हुआ मेरी घरवाली यानी बीबी जी को पता नहीं चला अभी तक वरन...........खैर इस व्यंग के लिए मै अपनी बीबी से और तमाम बहनों से प्रस्तुत करने से पहले ही माफी मांग रहा हू. तो लिहिये मेरी एक और व्यंग भरी कविता.)
आज कुछ यु हुआ
कि हम सबेरे सबेरे
एक बहुत ही हसीन सपना
देख रहे थे
सपने में हमे एक हसीना मिली
हम उससे बतिया रहे थे
अचानक बीबी की खनखनखनाती आई
वो आवाज कानो से कुछ ऐसे टकराई
जैसे समुंदर किनारे
चट्टानो से समुंदर की लहरे
टकराने से आवाज आई हो।
जैसे बारिश में तुफान की आवाज आई हो
और
बौखलाहट में हम
उस हसीना को अकेले ही छोड
दूम दबाकर भाग खडे हुये।
अजी पलटकर देखने की
हिम्मत भी नही जुटा पाये हम।
भाईयो,
ऐसा क्यो होता है?
ये बीबियाँ हमेशा
गलत वक्त ही क्यो टपक पडती है?
और तो और
जागते हुए सपने देखने न दिये तो ठीक है
निंद में भी ख्वाब न देखने देती है
ये बीबियाँ

January 20, 2011

सबेरे का सपना

मैंने बहुत बार
ऐसा कहते सूना है लोगो को
की सवेरे देखे जाने वाले सपने
अक्सर सच होते है
जब से सूना है
तब से ही मै रोज सवेरे कोई अच्छा सा सपना देखु
ऐसा दिन में देखे सपने में सोचता हूँ
और
रोज रात बिस्तर पर लेटते ही
हसीन सपनों के ख्वाब रंगने लगता हूँ
ख्वाब के रंग में रंगते ही मुझे नींद जाती है
और रात भर नींद में ही
सवेरे कोई हसीन ख्वाब देखने के
ख्वाब देखने लगता हूँ
सुबह होते होते
एक हसीन ख्वाब दिखाई देने लगता है
ख्वाब में
किसी हसीना के हसीन पैरों की आहट सुनाई देती है
और
ख्वाब में ही मै
उसको देखने के लिए तैयार होता हूँ
पर हाय रे नशीब,
उस हसीना के पैरों की उंगली
जैसे ही दिखाई देती है
कानों में
बीबी की झंकार सुनाई देती है
और मै बौखलाकर जागृत हो जाता हूँ,
उस समय सुबह के छह बज चुके होते है
और मेरा सपना अधूरा ही रह जाता है
ऐसा अक्सर होता है दोस्तों
खैर
होनी को कौन टाल सकता है भला
तकदीर अपनी अपनी
सपने अपने अपने

January 17, 2011

नजदीक आती दुनिया

दोस्तों, एक समय था जब अमरीका, लन्दन, जापान हमारे लिए ख़्वाब-सा था. कोई सोच भी नहीं सकता था की दुनिया आज जीतनी नजदीक आ सकती है। उन दिनों कोई यदि विदेश गया तो उसके घरवाले दर जाते थे। पता नहीं वापिस आएगा या नहीं। हवाई जहाज से यात्रा करनी है। कुछ हो गया तो. लेकिन आज ऐसी हालत नहीं है। लोग एक दिन में जाकर वापस आते है। मै जब जापान गया था तब मुझे ऐसा ही दर लगा था. इसलिए मै जाते समय सभी से मिल-कर गया था. ना जाने वापिस आ सकूंगा की नहीं. हां तो मैंने सिंगापूर में देखा था की कुछ लोग मुम्बई से सिंगापूर शोपिंग करने जाते है। यह बात है १९९८ की।
आज समय बदल गया है। जब से हमारे देश में आयटी क्षेत्र का जाल फैल गया है. तब से विदेश जाना आम बात हो गयी है। बच्चे नौकरी पर लगते की विदेश जाने के ख्वाब देखते है। यही नहीं उन्हें नौकरिपर रखने से पहले पासपोर्ट होना जरुरी होता है।
यह मै लिख रहा हू क्योकि मेरा भांजा कल रूस की राजधानी मास्को गया है। लेकिन आश्चर्य की बात है की वो आय टी में नहीं है और न ही इंजिनिअर है। उसने बी ए एम एस किया है और उसके बाद एम डी कर रहा है। उसे मास्को शहर के मेडिकल कोलेज में लेक्चर देने बुलाया गया है। जहा उसे दो महीने तक अस्पताल भी चलाना है। उसने खुद ने और हम सभी ने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था की उसे आयुर्वेदिक डॉक्टर बनाने के बाद विदेश जाने का मौका भी मिलेगा। इसे ही भाग्य कहते है।
उसके वहा पहुचते ही उसका मेल आया और शाम को उससे चेटिंग भी हुई। इंटरनेट ने दुनिया को बहुत ही नजदीक लाकर खड़ा कर दिया है। पता ही नहीं चलता वह इन्सान घर में है या किसी और देश में। आसानी से उससे बात हो जाती है।
१९९८ में जब मै जापान गया था मुझे याद है शिर्फ मुंबई में फोर्ट एरिया में एक सायबर केफे सुरु हुआ था। और एक घंटे का १०० रूपया लगता था। मैंने वहा १ महीने की कालावधि में नेट सिखा था।

कचरा- एक सिरदर्द


आजकल शहरों की जनसँख्या दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही है। इस वजह से शहरों में कचरा इस कदर बढ़ रहा है की उसका आगे क्या करे यह सोच कर स्थानिक प्रशासन हैरान हो जाता है। अक्सर  यह कचरा डालने के लिए शहर के बाहर जगह बनाई जाती है। लेकिन शहर की परिसीमा बढ़ती ही जा रही है। हर साल कचरे के लिए जगह खोजना मुसीबत बन जाता है।मै आपको एक ऐसा नुस्का बताना चाहता हु जिससे आप खुश हो जायेंगे और प्रशासन को  भी थोड़ी राहत  मिल जाएगी।

हमारे घर में हर रोज जो कचरा निकलता है उस में जादातर हरी सब्जियों के डंठल, पत्ते होते है। इस कचरे को हम न फेक बारीक़ काट कर हमारे आँगन में लगे पेड पौधों को खाद के रूप में इस्तेमाल करे तो बहुत ही उपयोगी साबित होते है। मै अक्सर यही करता हू।
इसके अलावा कचरे में फलो के छिलके या फलो के टुकड़े निकलते.है जैसे केले के छिलके, चीकू, सेब, आम, पपीता इन फलो के छिलके तो बहुत ही अच्छी खाद साबित होते है। मैंने यह सब खुद किया है। मै तो करता  हू आप भी कर के देख ले और अपना शहर साफ रखने में मदद करे।
धन्यवाद!

January 12, 2011

प्याज और महंगाई


कल रात घरवाली बोली
एजी, सुनते हो
(जब से महंगाई बरपाई है
मुझे एजी शब्द से डर लगने लगा है जी)
ये एजी शब्द कानो मे
पडते ही मुझे पसीना
छुटने लगा
मै कांपती आवाज मे बोला
एजी सुनाईये
उन्होने फरमाया
जरा बाजार हो आईये
मैने कहा ठीक है जी
हम हो आते है
और हम बिना चप्पल जुता
पहने, झोला लिये
खिसकने ही वाले थे
कि घरवाली बोली,
अजी क्या लेने चल पडे
मैने कहा आपने कहा तो
जरा बाजार के हाल हवाल ही जान लेते है,
नही जी, हाल हवाल नही
जरा एक किलो प्याज ले आइये
प्याज शब्द कानो मे
पडते देते ही मुझे
प्यास लगने लगी
मैने घरवाली से पानी मांगा
पानी देते हुए वो बोली
अजी प्याज का नाम सुनते ही
आपको प्यास क्यो लगने लगी
मै बोला
एजी पहले प्याज सिर्फ रुलाता था
आजकल
प्यास भी दिलाता है,
एजी, एक किलो प्याज का आप क्या करेंगी
अचार डालने के लिये अभी कैरी आना बाकी है,
वो बोली हा जी
ये प्याज मै सालभर
संभालकर रक्खुंगी
उसकी गंध बहुत तेज होती है
खाने के साथ डायनिंग टेबल पर
सजा गंध ले लेना
ये तो बहुत बढीया नुस्का है जी
चाहे जो भी भाव हो जाये
अभी प्याज का
हमे डर नही लगता
मै बोला
एजी लेकिन आप आमलेट कैसे बनओगी
अभी तक तो प्याज ही रुला रहा था
अब अंडा भी रुलाने लगा है
वो बोली हा जी
शायद
अब मुर्गी भी कम अंडे देने लगी है
उसे क्या मालुम उसके कम अंडे देने से
महंगाई बढेगी
मैने कहा हां जी
ये बात तो धरती, पेड, पौधे
किसी को भी नही मालुम
वरना डिजल, सब्जी, अनाज और फलो
के भाव भी आंसमान नही छुते
वो बोली
हा वो बेचारे क्या समझे इस बात को.
आखिर उसने प्याज मंगवाना टाल ही दिया
और हमने
घर मे आराम करना ही ठीक समझा.


January 6, 2011

अजी सुनती हो!


अजी सुनती हो?
अन्दर से आवाज आई,' हां जी कहिये?'
'अजी मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है। जरा एक प्याला चाय मिलेगी तो अच्छा रहेगा.'
'ठीक है जी।' अन्दर से ही उसने कहा।
थोड़ी देर बाद वो चाय का प्याला लेकर आई। 'ये लीजिये।'
'लाइए।'
अब थोड़ी रहत मिली।'
'अजी सुनते हो।'
'क्या है अब।'
मै दबा दू?'
'अरे नहीं। तुम दबा दोगी तो तुम्हारा क्या होगा?'
'मेरा क्या होगा जी। थोडा पुण्य मिल जायेगा।'
'क्या कहा पुण्य मिलेगा!'
'हां हां थोडा पुण्य मिलेगा।'
'हे भगवान! मुझे बचालो इस औरत से।'
'अजी मैंने ऐसा क्या कह दिया की आप भगवान को बुलाने चल पड़े।'
'अभी तो तुमने कहा की दबाने से तुम्हे पुण्य मिलेगा।'
' हां तो इसमे बुरा ही क्या है। अपने पतिदेव की सेवा तो करना ही चाहिए।'
'क्या पतिदेव? और उसी का गला दबाने की बात कह रही हो।'
'क्या? मैंने ऐसा कब कहा जी?'
'तुम ही तो कह रही थी दबा दू?'
'हां वो तो मैंने सर दबा देने की बात कही थी।'
' मुझे माफ कर दो जी मैंने गलत समझा।'
कोई बात नहीं।'
थोड़ी देर बाद....
'अजी सुनते हो।'
'क्या है?'
'क्या पकाऊ?'
' ....'
'अजी मैंने कुछ पुछा आपसे।'
'.......................'
'कमाल के आदमी हो आप। आपकी बीबी आपसे कुछ पूछ रही है और आप है के जवाब ही नहीं दे रहे हो।'
'क्या जवाब दू? तुम पका तो रही हो।'
'अजी मै तो यहाँ आपके साथ बैठी हु। मै कह कुछ पका रही हु।'
'फिर क्या कर रही हो?'
उसने कुछ समझ नहीं आया ऐसी मुद्रा में उनकी तरफ देखा।
'अरे तुम मुझे क्यों पका रही हो?'
'अच्छा मै अब आपको पकाने लगी हु।'
'और क्या'
'हे भगवान मुझे इस इन्सान से बचालो।'
'मैंने क्या गलत कहा की तुमने भगवान को बुला लिया।'
'आपको अब मै अच्छी नहीं लगती हु।'
'अजी मैंने ऐसा तो नहीं कहा।'
'पति कभी खुल के पत्नी से ऐसा कैसे कहेंगे. इसलिए आड़े तिरछे शब्दों में कह ने की कोशिश करते है। क्या मै इतना भी नहीं समझती।'
'आरी भागवान, मुझे मुआफ कर दो। गलती हो गई। दुबारा ऐसा नहीं होगा।'
'ठीक है मुआफ कर दिया।'
थोड़ी देर बाद.....
'अजी आप काम कर रहे है तब तक मै ऊपर जाऊ।'
'जाओ जाओ जल्दी जाओ।'
'अभी थोड़ी देर में वापिस आ जाउंगी।'
'क्या?'
'हां वापिस आउंगी।'
'कैसे?'
'सीढियो से चल के।'
'क्या बात कराती हो। ऊपर जाने वाला कभी वापिस आता है भला। और वो भी सीढियो से।'
उसने रोना सुरु कर दिया,'हे भगवान, क्या हो गया है इस इन्सान को। नहीं नहीं अब आपको मै बिलकुल ही नहीं भांति। इसलिए मै अपने मायके चली जाती हु।'
'अरे मै तो मजाक कर रहा था!'
'..........'
'माफ कर दो बाबा।'

January 4, 2011

ऐ जिन्दगी

जिन्दगी,
मेरी ख्वाहिश है
जरा तू भी तो जीवन जी के देख ले,
तुझे भी तो पता चले
जीवन जीना कोई बच्चो का खेल नहीं,
तुझे भी तो पता चले
जीवन जीने के लिए
कितने पापड बेलने पड़ते है
जिन्दगी,
तू भी तो समझ ले
जीवन में एक कतरा सुख पाने के लिए
कितने दुखो के अंगारों पे चलना पडता है,
तू भी देख ले जिंदगी
जीवन किस चिड़िया का नाम है,
जिन्दगी

January 3, 2011

जिंदगी

जिन्दगी
तू क्या क्या रंग दिखलाती है,
कभी दिन कभी रात ला
हमे अच्छे और बुरे का पाठ पढाती है।

January 1, 2011

नए साल की नयी सुबह

नये साल कि नयी सुबह
लेकर आई नया सूरज
दोस्तो चाहे कैसे भी बीता हो पिछला साल
नये साल मे मिलेगा आनंद और उल्हास हि
राखो थोडा धीरज,
क्या जल्दी है
अभी तो आया है २०११
कर अलबीदा २०१०
जरा उसे सुस्ता तो लेने दो
फिर उसका साथ दे
उसके कंधे से कंधा मिला
मेहनत जो करोगे
साल भर आनंद
और उल्हास हि पाओगे
!!नया साल मुबारक हो!!

December 31, 2010

साल मुबारक


सभी दोस्तों को नए साल की हार्दिक शुभकामनाये। इस अवसर पर मैंने एक कविता इस फोटो पर लिखी है। कविता मैंने ही लिखी है। वह यहाँ पेश कर रहा हु।

December 27, 2010

योगगुरु




मित्रो स्वामी रामदेवजी ने योग के अलावा एक और काम अच्छा और हमारे भले का किया है। वो है हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में आवश्यक चीजे उपलब्ध करना। आज उनके बिस्किट भी उपलब्ध है। हम पिचले करीबन ३ सालो से उनके द्वारा उपलब्ध कराये गए प्रोडक्ट ही इस्तेमाल करते आये है। दन्त कान्ति, स्नान के लिए साबन, केश के लिए सेम्पू, दांतों का ब्रश ये चीजे भी अब उपलब्ध की जाती है। हम ये ही इस्तेमाल करते है। बहुत बढ़िया अनुभव है।

कल मै कुछ सामान खरीदने पर केरी बेग मांगी तो मुझे न्यूज पेपर से बनी एक बेग दी गयी। मै बहुत खुश हुआ। वाकई आज कल के समय में इस तरह पेपर बेग इस्तेमाल करना बहुत जरुरी हो गया है।

December 20, 2010

तनहा

कितने तनहा है हम उनके बिना,
किसी से कह भी नहीं सकते।
ये दुःख
ये दर्द
ये तन्हाई,
सह भी तो नहीं सकते।
या खुदा
कितने बद नशीब है हम,
वो सामने आ जाये तो भी
उसने दर्द- ये-हाल
कह भी  नहीं सकते।

November 5, 2010

दीपावली की संध्या पर....

इससे पहले दीपावली के शाम हो जाये
बधइयो का सिलसिला आम हो जाये
भीड़ में शामिल हमारा भी नाम हो जाये
क्यों न दीवाली की राम राम हो जाये

November 4, 2010

दीवाली की शुभ कामनाये


आप सभी को दीवाली की शुभ कामनाये

October 21, 2010

यादे

यदि हम ५० की उम्र पार कर चुके हो और अचानक बचपन का याने स्कुल के ज़माने का कोई दोस्त मिल जाए तो क्या होता है? जहा तक मुझे लगता है हर किसी को यह अनुभूति आती ही है। ऐसा होने हम पुराने ज़माने में मतलब स्कुल के ज़माने में खो जाते है। हमें बचपन के वो दिन याद आने लगते। और इससे भी बढ़कर एक बात कहना चाहता हु। यदि इस ५० साल की उमर में हमें हमारे स्कुल के टीचर मिल जाए तो सोने पे सुहागा हो जाता है। हम फुले नहीं समाते। और खुद को बच्चा समझने लगते।
दोस्तों ऐसा ही होता है जब हमारे सामने ऐसा कोई मिल जाए जो बचपन में हम से बड़ा हो तो ढलती उम्र में भी हम खुद को छोटा समझने लगते है जैसे बहुत ऊँचे कद वाले इन्सान के सामने नॉर्मल कद वाला कोई इंंसान खड़ा होता है तो वह खुद को बच्चा महसूस करने लगता है।
तो मेरा कहने का मतलब यह है की मुझे फेसबुक पर मेरे स्कुल के कुछ दोस्त और हमारे टीचर मिले और मै फुला न समाया।
इस तस्वीर में बाई तरफ हमारे गणित और भौतिक शास्त्र के टीचर श्री शर्मा सर है और दाहिनी तरफ हमारे रसायन शास्त्र के टीचर श्री रविन्द्र परांजपे सर है।
उनको देख मैंने उमर का हिसाब किया। उन दिनों हम स्कुल में थे तब मुझे याद है दोनों ही सर के बाल सफेदी की तरफ झुके हुए थे। कहने का मतलब ये है की उनकी उम्र तकरीबन ४५ या ५० की होगी जब हम ११ वी कक्षा में थे तब। हम १९७७ में ११ वी पास किये है। आज उस बात को ३३ साल हो चुके है। मतलब दोनों ही सरो की उम्र आज ८० से ऊपर होनी ही चाहिए। मुझे आश्चर्य इस बात है की इस उम्र में ये पुराने लोग कंप्यूटर पर कैसे आये। जबकि मैंने ऐसे जवान लोगो को देखा है जो कंप्यूटर को हाथ लगाने से भी डरते है.
मै अपने आप को धन्य मानता हु की मुझे ऐसे शिक्षक नशीब हुए।


October 20, 2010

वाह री जिंदगी

हाय री जिंदगी
तू क्या क्या रंग दिखाती है,
कभी ख़ुशी से झुलाती है
कभी गम भी दे देती है।
वाह री जिंदगी
तू क्या क्या रंग दिखाती है।१।

October 17, 2010

हेप्पी दसरा



May this Dasara,
light up for you.
The hopes of Happy times,
And dreams for a year full of smiles!
Wish you Happy Dasara.

October 11, 2010

नीली श्याही

कहा गुम हो गया है
वो कोरा कागज
वो नीली श्याही
वो कलम और
वो अंगुलियाँ
जो लेखक का
हथियार थी
अब तो कंप्यूटर का जमाना है
पेपरलेस का जमाना है

October 8, 2010

कोमनवेल्थ गेम्स


दोस्तों दिल्ली में कोमनवेल्थ गेम्स शुरू है उसमे हमारे खिलाडी बहुत ही अच्छी करामत दिखा कर हमारे देशा का नाम उचा कर रहे। एक दिन भी ऐसा नहीं बिता की हमें स्वर्ण पदक न मिला हो। आज तक २० गोल्ड मेडल हम हासिल कर चुके है। हमें अपने खिलाडियो पर गर्व है। सब को बधाई।

नवरात्री की शुभकामनाएँ


आज से नौ दिन तक माँ नवदुर्गा की पूजा की जाने वाली है क्योकि नवरात्र उत्सव आज से ही शुरू हो रहा है। इस पावन पर्व पर सभी ब्लॉग मित्रों और उनके परिजनों को शुभकामनाएँ !!!

October 6, 2010

वापसी

मित्रों मेरा तबादला नाशिक से पुना में हुआ है। पिचले तिन महीनो से मै पूना में हू। पहले अकेले ही रहने की सोच थी लेकिन अकेले रहना मुमकिन न हो सका। बाहर का खाना बिलकुल भी नहीं भाया। सो एक ही महीने में मैंने अपनी फेमिली को पूना में शिफ्ट कर लिया। किराये के फ्लेट में रह रहे है। बहुत महंगे है यहाँ पूना में। किराया तो कमर तोड़ देता है।
यहाँ आने से मेरा ब्रोडबेंड कनेक्शन बंद हो गया। यहाँ नए शीरे से नया कनेक्शन लेना पडा। टेलीफोन तो जल्द मिल गया। लेकिन नेट कनेक्शन में काफी वक्त लग गया। कल ही कनेक्शन शुरू हुआ है। आज पहली पोस्ट दाल रहा हू।
बीते दिनों मै बहुत ही मिस कर रहा था। कुछ अजीब सा लग रहा था।
तब महसूस हुआ की इंटरनेट के हम कितने आदि हो गए है?
खैर अब मै जब भी मुनासिब हो जरू आप सब की खिदमत में हाजिर होता रहूंगा।
धन्यवाद!!!

September 4, 2010

नेकी कर और....

आयुष अपनी स्कुल से घर आ रहा था। रास्ते में उसे एक अंकल मिले। उन्होंने उसे कहा बेटा तुम घर जा रहे हो तो ज़रा यह सामान आंटी को दे देना। आयुष ने वह थैला ले लिया और घर की तरफ चलता बना। रास्ते में एक दरिया लगता है। उसे पार किये बगैर वह घर नहीं जा सकता था। सामान उठा कर वह थक गया था। इसलिए कुछ पल दरिया किनारे बैठ कर सोच रहा था। इतने में उसके बाबूजी वहा से घर जाने लगे। उन्होंने उसे वहा बैठा देखा और घबरा गए। उससे पूछा और घर चलो कहा। वह उठा और अपने बाबूजी के पीछे चल दिया। अचानक उसे क्या हुआ पता नहीं। उसने वह सामान दरिया में फेक दिया।
बाबूजी ने पलट पूछा बेटा वह झोला काहे फेका?
पिताजी आज ही हमें स्कुल में पढ़ाया गया की नेकी कर और दरिया में डाल।
तो
मैंने अंकल का सामान लाया मतलब नेकी की और यहाँ दरिया दिखाई दिया सो उस नेकी को दरिया में फेक दिया। क्या गलत किया मैंने।
बाबूजी ने अपना शिर पकड़ लिया।

August 29, 2010

ये भी कोई जिना है जॊनी

जब से मै पुना शहर मे बदली से आया हु जिना दुभर हो गया सा महसुस हो रहा है. पुछिये क्यो? अजी क्या बताऊ! कुछ लिख नही पाता कुछ पढ नही पाता. अजी ब्रोड्बेन्ड जो नही है घर मे. पिछले एक साल से इन्टर्नेट मे इतना उलझ गया हु कि जिन्दगी सुलझ गयी सी लगने लगी है. अब कही असली जिन्दगी जी रहा सा महसुस करने लगा था कि वो क्या कहते है करमजली बदली हो गयी. बी एस एन एल मे अर्जी दी है लेकिन एक महिना लगेगा ऐसा कहा जाता है. वो तो अच्छा हुआ की जी.पी.आर.एस. सुरु है. थोदा बहुत कर पाता हु. वरना मेरा क्या होता भगवान जाने.
ईश्वर से प्रार्थना है की ब्रोड्बेन्ड कनेक्शन जल्द मिल जाये.

August 15, 2010

शुभ कामनाये


आजादी की ६३ वी सालगिरह के शुभ अवसर पर सभी देशवाशियो को हार्दिक शुभकामनाये

July 20, 2010

शायद

शायद,
रोज रात चाँद आँसमाँ से तुम्हे देखता है,
और
तुम्हारी खुबसुरती की रोशनी से अपनी आँखे चुरा लेता है,
शायद,
उसे डर लगता है
कही दुनियावाले तुम्हे ही चाँद न समझ बैठे
शायद
इसी डर से वो हौले हौले छुपता है
और
एक दिन पुरी तरह लुप्त हो जाता है
शायद
उसी रात को अमावस की रात कहते है.
और फिर
जब सभी तारें आँसमाँ में
एक होकर उसे समझाते है
वो हौले हौले झाँक झाँक कर तुम्हे निहारता है
और
जब उसका डर दुर हो जाता है
वह पुरी तरह आँसमाँ में छा जाता है
शायद उसी रात को
लोग पुनम की रात कहते है.

July 16, 2010

सपनों की परी

सपनो की परी
कल रात मैने देखा एक सपना,
तब मैने पाया वहा कोई नही है अपना.
मगर अचानक, मेरे पास एक परी आई
लहराती जुल्फे, झील सी गहरी आंखे
और
मदमस्त निगाहे मैने अपनी ओर ही पायी.
सोच रहा था मै कौन है ये हसीना?
सोचते सोचते ही छुट गया मुझको पसीना!
और नजदीक आयी तो धुंदला सा चेहरा मुझे नजर आया,
क्या बताऊ मै मैने सपने मे तुम्ही को पाया.
तुम हो की मेरे दिल-ओ-दिमाग पे छायी हुई हो,
लेकिन जब से तुम पराई हुई हो,
मेरा दिल इस बात को मानने को तैयार ही नही
बहुत समझाता हु उसे मगर वो समझता ही नही
समझता ही नहीसमझता ही नही.

July 11, 2010

जिंदगी एक ..............

जिंदगी एक सफर है
आज यहां कल वहां
परसो कही और है।
जिंदगी एक गाना है,
प्यार से गाओ
तो लगता सुहाना है।

जिंदगी एक मिल्कीयत है
जीसका कोई मोल नही
यही इसकी खासियत है।

कब आओगी?



रात
सुहानी ढल चुकी,
तारे भी थक सो चुके
हवा भी अब थम गयी
मगर
तुम अब तक नहीं आई?

July 1, 2010

तारे जमी पर




जब तुम आती हो जाने मन मेरे द्वारे
बहारे खिल उठती है
फूल अपनी महक बिखुरते है
तारे ज़मी पर आ जाते है
और अचानक मेरे आंगन में
चाँद उतर आता है।
मानो
मुझसे मुस्कराते हुए कह रहा हो,
मेरे दोस्त,
तुम खुशनसीब हो
तुम्हे इतना खुबसूरत साथी
जो मिला है,
मै तो बदनसीब हु
मुझे तो हमेशा रजनी के साथ ही रहना होता है।
रजनी,
जिसके आते ही
चारो तरफ अँधेरा छा जाता है
और उस अँधेरे को
अपनी खूबसूरती से
मै दूर करने की कोशिश करता हु,
मेरे साथी आसमान से
चार चाँद लगाने की कोशिश करते है,
मगर वो ( तारे) ज़मी पर उतर नहीं पाते.

June 13, 2010

यह तृष्णा नहीं बुझेगी.



यह तृष्णा अब नहीं बुझेगी,
कभी नहीं बुझेगी यह तृष्णा अब।
चाहे जो भी हो जाए,
धरती फट जाए,
या सुखा पड़ जाए,
चाहे वो भूखो मर जाए,
यह तृष्णा अब नहीं बुझेगी।
हां मै सिर्फ धन का प्यासा हु
धान का नहीं,
मेरी प्यास सिर्फ धन के लिए है,
इसलिए जब तक मेरा मन न भर जाए
मै धन कमाना चाहता हु,
हां मै आखिरी दम तक सिर्फ धन कमाना चाहता हु।
यही मेरी मंजिल है।
यही मेरी प्यास है,
और यह प्यास यह तृष्णा मरते दम तक नहीं बुझाने वाली।
( दोस्तों आज हर कोई धन दौलत कमाने के पीछे पड़ा है। चाहे कुछ भी हो जाए उसे तो बस धन दौलत चाहिए। इसी विषय पर आधारित यह आज की मेरी कविता आपकी खिदमत में पेश है।)
रविन्द्र 'रवि' १३ जून २०१०

June 12, 2010

उनकी बाते


मेरा तबादला नाशिक शहरसे पुना शहर मी हो गया है। बस कुछ दिनो बाद मी पुना शहर चला जाउंगा। इसलिए शायद ब्लॉग पर जादा न लिख पाऊ। आज अपनी पुराणी किताबे खोज रहा था जिसमे मुझे एक गुटका मिला। आप लोग जानते होंगे की गुटका छोटी किताब को कहते है। मुझे कुछ अच्छी चीजे संभल रखने की बचपन से ही आदत है। यह छोटीसी किताब गोपीकृष्ण व्यास नाम के किसी लेखक ने लिखी है। बहुत ही अच्छी है इसलिए मैंने संभल राखी है।
मै चाहता हु उन्होंने लिखी बाते आपसे शेअर करू।
तो आज का उस किताब का पहला पन्ना यहाँ पेश कर रहा हूँ




" मुझे मत छेड़ो। "
मै शांत सुषुप्त अपनी पर्ण कुटी में
नूतन विश्व को जन्म देकर उसे संस्कार दे रहा हूँ,
उसके शैशव को पवित्र कर्म का यौवन दान देने दो,
उपरांत प्रकृति के पारावार के भी परे चला जाउंगा।
अभी मत छेड़ो मुझे।

May 31, 2010

कल क्या होगा किसको पता


दोस्तों दुनिया की जनसँख्या बहुत ही गतिसे बढ़ रही है। आज मुझे गूगल पर एक बहुत ही सुन्दरसी लिंक मिली जिसमे हम दुनियाभर के देशो की जनसँख्या की तुलना कर सकते है। यहाँ क्लिक करे
१९६० से २००८ तक की जनसँख्या का ब्यौरा इसमे दिखाई देता है। कौनसे देश दुनिया की जनसँख्या को बढ़ने में अच्छी तरह साथ दे रहे है ? आप खुद ही देख सकते। १९६० में हमारे देश की जनसँख्या थी ४३ करोड़ ४८ लाख जबकि २००८ में वह बढ़कर हो गई है तकरीबन ११४ करोड़। मतलब पिछले ४८ सालो में हमारी जनता में करीबन ७४ करोड़ का इजाफा हुआ है। साल में १.५० करोड़। क्या बात है दोस्तों। इसी गति से बढ़ोतरी होती रही तो हमारी धरती पर माफ करे हमारे देश में हमें खड़े रहने के लिए भी जगह मिल सकेगी या नहीं पता नहीं। कोई बात नहीं।
दूसरी तरफ हमारे देश की पर केपिटा इनकम भी बढ़ गयी है। २००९-१० में वह रु। ४४, ३४५/- इतनी हो गयी है।
महंगाई में भी इजाफा हो रहा है। मतलब सब तरफ से बढ़ोत्तरी ही हो रही है। बधाई हो भाइयो।
मै कई सालो से ये सोचता रहता हु की हम १९६० से पहले यानी की पीछे जाए तो जनसँख्या कम कम होती दिखेगी। लेकिन भारत के इतिहास को देखे तो इस धरती पर कई युध्द हो चुके है। जैसे की महाभारत का युध्द, झंशी की लढाई, पानीपत की लड़ाई। इन युध्दो में लाखो लोग मरे गए। महाभारत में तो बहुत सरे लोग मरे गए थे। मै बार बार सोचता हु की यदि इन पुराने दिनों में ये युध्द न हुए होते और लाखो लोग मर न जाते, तो आज ही हमारे इस देश की जनसँख्या कितनी होती। क्योकि उन दिनों एक आदमी को १०० बच्चे भी हुआ करते थे। अनेक बीबियाँ होती थी। जरा सोचिये यदि ऐसा हुआ होता तो आज हमें खड़े रहने को भी जगह नहीं मिल पाती!
हो सकता है आगे चलकर जनसँख्या बढ़ने से इंसान चाँद पर जगह बना कर रह ले। लेकिन आज यदि जनसँख्या जादा होती तो हमारा क्या होता?
खैर, यह तो एक कल्पना है। लेकिन कल क्या होगा किसी ने नहीं देखा है.
( फोटो साभार-http://www.all-about-india.com/index.हटमल)

May 22, 2010

लाईफ है तो...............

लाईफ है तो वाईफ है,
वाईफ है तो ही लाईफ,
ये जिंदगी बस एक नाईफ है।
वाईफ है तो लाईफ है,
लाईफ है तो ही वाईफ है,
ये जिंदगी एक खतरनाक नाईफ।

May 20, 2010

हरियाली



हरियाली अब नजर नहीं आती
हर तरफ सिर्फ वीरानी ही वीरानी है
जंगल भी वीरान हो चले है
इंसानों के दिल भी अब वीरान हो गए है।

इसीलिये दोस्तो ग्लोबल वार्मिंग का कहर जारी है। जम्मू का तापमान ४५ डिग्री तक पाहूच गया है। मतलब अब थर्मामिटर का पारा हिमालय की गोद तक पहूचं गया है। लेकिन हम है के सुधारने का नाम ही नही लेते. ना बिजली की बचत, ना ही पानी की बचत, ना जंगल से प्रेम ना ही धरती माता से प्यार! क्या हो गया है इस इंसान को?
खैर इस झुलसती गर्मी में कम से कम आँखों को हरियाली या बर्फ नजर आ जाए तो शरीर में ठंडक फैल जाती है. डूबते को तिनके का सहारा यु ही नहीं कहा है किसी ने। तो आइये इन ठंडक भरी तस्वीरों का निरिक्षण करे और सिहरन महसूस करे। घबराए नहीं इसमें कोई मिलावट नहीं है।



May 19, 2010

एक बेहतरीन एसएमएस


A BIRD SITTING ON A TREE HASN'T AFRAID OF THE BRANCH SHAKING OR BREAKING, BECAUSE BIRD TRUST NOT THE BRANCHES BUT ITS OWN WINGS! BELIEVE IN YOURSELF & GET READY TO FLY।

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May 16, 2010

एक सुंदर कला

दोस्तो कला बहुत बडी चीज है. यह हर किसी के बस की बात नही होती. आज युही ओर्कुट पर विजिट कर रहा था तो हमारे दोस्त समीर लाल के प्रोफाईल पर एक कलाकार ने तयार की हुई कलाकारी दिखाई दी.भगवान गणेश जी का चित्र है. डिजीटल चित्रकारी है. आप लोगो को जरूर पसंद आयेगी.


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May 15, 2010

याद उनकी आती है जिंदगी भर.


जिंदगी के सफर में
जो पीछे छुट जाते है,
याद उनकी आती है जिंदगी भर.

जिंदगी कि राहो में
जो साथ निभाते है,
याद उनकी आती है जिंदगी भर.

जिंदगी के दुखो में
जो दुखी हो जाते है,
याद उनकी आती है जिंदगी भर.

April 30, 2010

मुझे मत सताओ

(दोस्तों मेरी दि ११/०८/१९९६ को लिखी एक कवीता यहाँ आपकी खिदमत में पेश कर रहा हुंअच्छी लगे तो अपनीप्रतिक्रियाये जरुर देनामुझे अच्छा लगेगाऔर इससे लिखने वलेका हौसला भी बढ़ता हैआभार! )


मुझे मत सताओं दुनियावालों
मै पहले से ही बहुत परेशाँ हूँ
ज़िन्दगी से हैराँ हूँ
मुझे ही क्यों मिले है ये सारे ग़म
क्याँ अब भी बाक़ी है देना
मुझे कुछ सितम
क्याँ भर डालोगे मेरी झोली
इन गमों से
मत परेशाँ करो मूझे
दुनियावालों मै पहले से ही परेशाँ हूँ
ज़िन्दगी से हैराँ हूँ

ज़िन्दगी एक तमाशा

ज़िन्दगी एक तमाशा है,
कुछ पाने की आशा है।
पर हाथ लगी,
कभी आशा कभी निराशा है।
ज़िन्दगी एक तमाशा है..

ज़िन्दगी बुलबुला ये पानी है,
पल में फटने से
जो ख़त्म हो जाए
वो इसकी कहानी है,
पहले बचपन
अंत में बुढ़ापा,
बीच में जिसके ज़वानी है

April 25, 2010

घर किराए पर देना है!!!


यदि किसी को घर किराये पर चाहिए हो तो कृपया संपर्क करे! उस घर का फोटो दे रहा हु। पसंद हो तोही किराये की बात करे। वरन हमारा वक्त जाया न करे। अजी जनाब आजकल वक्त किसके पास है। बाकि सब कुछ है लेकिन समय नहीं है।

April 22, 2010

ज्वालामुखी





दोस्तों पि छ ले कुछ दिनों से हम करीबन रोजाना टी.व्ही. में ज्वालामुखी पर खबरे देख रहे है। भर में हलचल मचा देने वाला यह ज्वालामुखी है। दुनियाभर की विमान सेवा बंद कर देनेवाला यह ज्वालामुखी। वो भी ऐसी जगह पर निकला है जहा चारो तरफ सिर्फ बर्फ ही बर्फ है। iceland में। कमाल है न उसकी।
इस ज्वालामुखी की कुछ तस्वीरे यहाँ दे रहा हु।

April 19, 2010

क्यो इतनी पथ्थर दिल हो तुम?

फुल सी नाजूक हो तुम,
शहद जैसी मिठी हो तुम,
तकदीर यदी साथ न दे तो
कांटो की चुभन हो तुम,
जिंदगी के शुभ नाम से
दुनिया में पहचानी जाती हो तुम॥ १॥

सबकी आंखो की चमक हो तुम ,
सबकी सांसो की लय हो तुम,
सांस यदी साथ न दे
तो दिल की एक चुभन हो तुम
जिंदगी के शुभ नाम से
दुनिया में पहचानी जाती हो तुम॥ २ ॥

गरीबो की राहो के कांटे हो तुम,
अमिरो के घरो की शोभा हो तुम,
सबको जीवन में सुख चैन न देती,
क्यो इतनी पथ्थर दिल हो तुम,
जिंदगी के शुभ नाम से
दुनिया में पहचानी जाती हो तुम॥ ३ ॥

प्यार के फूल


जिन्दगी की राहो मे कांटॊं से बुने गालिचो पर चलते रहे है हम,
प्यार के फुल बिछा दो तो जख्मो को सुकुन मिल जाये।
जख्मी दिल को कुछ राहत मिल जाये,
और जिन्दगी के कुछ लम्हे चैन से जी सके हम।

April 18, 2010

तन्हाई


तरसता रहा जिंदगी भर
एक हमसफर मील जाये
साथ निभाने को,
मगर मिल न सका कोई
राहगुजर
मिटाने इस तन्हाई को।

April 16, 2010

जिंदगी

जिंदगी हम तुम्हारे करीब आना चाहते है
तुम्हे सही माने में जीना चाहते है,
बस दो वक्त सकूँ मिल जाए
चैन की साँसे मिल जाए
यही चाहत है हमारी जीवन भर के लिए
पर तुम हो की पास नहीं आती पल भर के लिए
पल भर के लिए
पल भर के लिए

April 13, 2010

कटी पतंग



दोस्तों आज मै यहाँ मेरी अपनी लिखी एक और कविता पेश कर रहा हुयह कविता मैंने २३-०३-१९८२ को लिखीथी जब मै इन्दोर में इंजिनीअरिंग कोलेज में पढ़ रहा था.
"इंसा" नाम है उस पतंग का,
जो जीवन रूपी आकाश में
वक्त रूपी कच्ची डोर से बंधी हुई
विचरती रहती है।
और
जब मौत रूपी गीदड़
उस आकाश में विचरते है
तो रस्ते में आने वाले सभी पतंगों को कांट देते है
और
वो पतंग
एक कटी पतंग की तरह गिरकर
धरती की गोद में समां जाती है।

( रविन्द्र रवि 'कोष्टी' )

April 10, 2010

सिम्पली पोयट डॉट कॉम

दोस्तो काल मैने आपको एक बेहतरीन वेब साईट के बारे में बताया था। आज मै और एक वेब साईट के बारे में बताना चाहता हुं। उसका नाम है "सिम्पली पोयट डॉट कॉम"
आप हिंदी मराठी अंग्रेजी या आपकी अपनी किसी भाषा में कविताये लिखते हो तो इस साईट पर आप अपनी कवीता प्रस्तुत कर सकते है। यहा लिंक दे रहा हुं.
http://simplypoet।com/

इस साईट पर मेरी कई साड़ी हिंदी अंग्रेजी और मराठी की कविताये प्रस्तुत की है।
धन्यवाद.

एक बेहतरीन वेब साईट


दोस्तों मै आपको एक अनोखी वेब साईट पर ले जाना चाहता हु। शायद आप लोगो को मालूम होगा। लेकिन न हो तो एक बार जरुर पढ़िए।
हम अपनी रोज मर्रा की जिंदगी में जो काम करते है उसमे हमें कुछ न कुछ नयापन लाना होता है वरन हम बोर हो जाते है। बस उसी वक्त हमारे जहाँ में कुछ नै आयडिया आई हुई होती है। यही हम वेब साईट पर दुनिया भर के लोगो से शेअर कर सकते है। हो सकता है इसी आयडिया का बखूबी
इस्तेमाल कर कोई नयी चीज बन जाये जो आम लोगो के दैनंदिन काम में आये।
तो आइये आपको उस साईट का पता बताता हु। इस साईट पर मैंने भी मेरी कुछ आइडियास लिखे है जरुर पढ़िए।
http://en।ideas4all.com/

April 8, 2010

एक अनोखी शादी

दोस्तो एक बार की बात है। एक चिंटी और एक हाथी की दोस्ती हो गई। वैसे तो वो कट्टर दुश्मन है लेकिन पता नही क्यो उनकी दोस्ती हो गई। फिर क्या था। रोज रोज का मीलना, घुमना फिरना, वो थंडी हवा के झोके, वो रुठना फिर मनांना फिर रुठना फिर मनांना यु ही चलता रहां । और फिर वही हुआ जिसका डर था और जो दो प्यार करने वालो के साथ होता है.
उन दोनो का नाम जंगल के समाज में बदनाम होने लगा। लोग तऱ्ह तऱ्ह की बाते करने लगे। फिर एक दिन पंचायत बुलाई गयी। दोनो पक्षो को पंचायत ने बहुत समझाया की एक हाथी और चिंटी का कोई मेल नही है। लेकिन दो प्यार करने वाले कभी किसी की बात मानते नाही। पंचायत ने फैसला सुना दिया। हाथी और चिंटी दोनो को शादी करनी पडेगी।
दोनो ने आग पीछा कुछ भी न सोचते हुये शादी के लिये रजामंदी जाहीर कर दी। दोनो की धूम धाम से शादी हो गाई।
और जंगले सभी प्राणी दोनो को छोड अपने अपने घर चले गये।
रात बीती और सुबह रोजमर्रा की चहल पहल सुरु हुई। अचानक एक बंदर का ध्यान गया और वो चिल्लाया अरे हाथी मर गया। सब प्राणी जमा हुए। चिंटी रो रही थी। सभी ने उसे शांत किया। लेकिन उसने कहा, अरे भाईयो मै शांत कैसे रहू। मै तो लुट गई बरबाद हो गयी। एक दिन की शादी हुई लेकिन अब तो मुझे जिंदगी भर कबर खोदनी पडेगी उसका क्या।

बेहतरीन गजलें

जगजीत सिंह जी की कुछ बेहतरीन गजलें पेश करना चाहता हूँ दोस्तों। सुनिए और लुत्फ़ उठाइये.



April 5, 2010

मृगतृष्णा

( मेरी अपनी कई सालो पहले लिखी एक और कविता जो जीवन की सच्चाई को बयां करती है। )

ये दुनिया नहीं मेला है,
मुसाफिरों का झमेला है,
यहाँ न भाई न बहन न माता पिता,
हर आदमी बस अकेला ही अकेला है।

सबकी आँखों में एक सपना है,
ये, वो और वो भी अपना है,
परन्तु मरने के बाद
सब साथ छोड़ देते है हमेशा के लिए
ये जीवन एक मृगतृष्णा है।

खुबसूरत रात

दोस्तों आज मै आपकी खिदमत में मैंने २९-०६-१९८३ को लिखी एक प्रेम कविता पेश कर रहा हुआपको कैसे लगीजरुर लिखियेगाज़रा गौर फरमाइए जनाब...

सूरज डूबा
और एक खुबसूरत
लेकिन
सांवली रात आई।
सांवले पण से संजी
और
चाँद की मंद मंद रोशनी से नहाई
ये रात
कितनी खुबसूरत है।
वो चांदनी में चमकती घनघोर जुल्फे
वो जुल्फों में छुपी मदमस्त आँखे
वो चेहरा, खुबसूरत चेहरा,
किसी शिल्पकार के हाथों से,
कड़ी मेहनत से कुरेदकर बनाया गया
वो खुबसूरत चेहरा
जिसके गहने है
शरारती आँखे
नशीले ओंठ
सुडौल नांक
और वे जुल्फें
कितनी खुबसूरत
लग रही है
ये रात.