October 20, 2010

वाह री जिंदगी

हाय री जिंदगी
तू क्या क्या रंग दिखाती है,
कभी ख़ुशी से झुलाती है
कभी गम भी दे देती है।
वाह री जिंदगी
तू क्या क्या रंग दिखाती है।१।

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