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September 4, 2010

नेकी कर और....

आयुष अपनी स्कुल से घर आ रहा था। रास्ते में उसे एक अंकल मिले। उन्होंने उसे कहा बेटा तुम घर जा रहे हो तो ज़रा यह सामान आंटी को दे देना। आयुष ने वह थैला ले लिया और घर की तरफ चलता बना। रास्ते में एक दरिया लगता है। उसे पार किये बगैर वह घर नहीं जा सकता था। सामान उठा कर वह थक गया था। इसलिए कुछ पल दरिया किनारे बैठ कर सोच रहा था। इतने में उसके बाबूजी वहा से घर जाने लगे। उन्होंने उसे वहा बैठा देखा और घबरा गए। उससे पूछा और घर चलो कहा। वह उठा और अपने बाबूजी के पीछे चल दिया। अचानक उसे क्या हुआ पता नहीं। उसने वह सामान दरिया में फेक दिया।
बाबूजी ने पलट पूछा बेटा वह झोला काहे फेका?
पिताजी आज ही हमें स्कुल में पढ़ाया गया की नेकी कर और दरिया में डाल।
तो
मैंने अंकल का सामान लाया मतलब नेकी की और यहाँ दरिया दिखाई दिया सो उस नेकी को दरिया में फेक दिया। क्या गलत किया मैंने।
बाबूजी ने अपना शिर पकड़ लिया।