April 19, 2010

प्यार के फूल


जिन्दगी की राहो मे कांटॊं से बुने गालिचो पर चलते रहे है हम,
प्यार के फुल बिछा दो तो जख्मो को सुकुन मिल जाये।
जख्मी दिल को कुछ राहत मिल जाये,
और जिन्दगी के कुछ लम्हे चैन से जी सके हम।

4 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत बढ़िया,
बड़ी खूबसूरती से कही अपनी बात आपने.....

amritwani.com said...

bahut khub

achi rachana


shkehar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

Ravindra Ravi said...

धन्यवाद संजयजी!!!

Ravindra Ravi said...

शेखर आपका बहुत बहुत शुक्रिया!!!