February 27, 2011

इंतज़ार



मुझको इंतज़ार है
दिल भी बेक़रार है
वो घडी जल्द ही आएगी
जिससे मुझको प्यार है.

February 23, 2011

नम आँखे


(source: google image)

आँखे है उनकी इतनी नम
बयाँ हो रहे हजारों सीतम,
क्या कहु कैसे कहु
मेरी भी आँखे हुई है नम।

आँखों से आँसू न यूँ बहाओं
कुछ दर्द हम को भी बताओं,
बाटने से होता है दर्द कम
आँखे है उनकी इतनी नम।

धोका दिया हो यार ने
होता है ऐसा प्यार मे,
दिल पे न यु करो सितम
मेरी भी आँखे हुई है नम।

February 21, 2011

अजब जिन्दगी

मेरी अज़ब है ज़िन्दगी
किसी से क्या गिला करू
तक़दीर रुठ जाये तो
मेरे ख़ुदा मै क्या करु
हालात ने नशिब ने
ग़म भर दिये है इस कदर
मंझिलो की कुछ ख़बर
मै कारवा को क्या करू
मिल जाये डुबने से भी आख़िर
तो एक साहील कही
तूफां की है आरज़ू
तूफां की दुआ करू
मंझिल की थी तलाश
तो गर्द ए सफ़र मिली मुझे
आँखे बरस पड़ी मेरी
काली घटा को क्या करू।
(जगजीत सिंह की एक बेहतरीन गझल)

February 18, 2011

मार्ग दर्शन


दर्शन एक सवाल हल नहीं कर पा रहा था। वो बहुत परेशान हो गया। अंत में वह पड़ोस के अंकल के घर गया। अंकल पेपर पढ़ रहे थे। उन्होंने दर्शन को आते देख अपना मुह पेपर के पीछे छुपा लिया। उन्हें उसका बहुत डर लगता था। वह आये दिन उनसे सवाल पूछने आ जाया करता था। न दिन देखता था न रात। आज उनका बिलकुल भी मन नहीं था की उसके सवाल हल कर दे।
लेकिन दर्शन भाई साहब कहा हार मानने वाले थे। वो घर में घुस आया। और बोला अंकल आप बुरा न माने तो मै कुछ पुछु?
हां हां बेटा पूछो। मै क्यों बुरा मानने लगा भला।
दर्शन ने अपना सवाल पूछना सुरु किया। वो कब रुकेगा इसकी राह अब अंकल को देखनी थी।
आखिर वो वक्त आही गया जब दर्शन रुका और अंकल से बोला, अंकल, अब आप इस बारे मुझे मार्ग दर्शन कीजिये।
हा हा जरुर।
जी बताइए।
वो देखो बेटा वो रहा मार्ग याने की रास्ता। उन्होंने दर्शन को घर के दरवाजे की तरफ इशारा किया।
तो? अब दर्शन बोला।
अब उस मार्ग का दर्शन कर लो।
हो गया मार्ग दर्शन। बराबर। और अंकल जोर जोर से हँसाने लगे। हा हा हा हा ................
बेचारा दर्शन छोटा सा चेहरा कर वहा से चलता बना।
(गूगल इमेज)

February 15, 2011

मेरा जन्म दिन

आज १५ फरवरी। मेरा असली जन्म दिन। अरे आप चौक क्यों गए? वाकई में यह मेरा असली जन्म दिन है। ऐसा मै इसलिए कह रहा हु क्योकि माता-पिता को मेरा जन्म दिन याद न होने की वजह से स्कुल में मेरा जन्म दिन १ जून डाल दिया था। आपको आश्चर्य होगा हमारे घर में सभी का जन्म दिन १ जून है। इतना ही नहीं मेरी ससुराल में भी यही है। अजी इतना ही नहीं सभी घरो में १ जून ही जन्म दिन होता है। कारण माता पिता की अशिक्षा। पहले के ज़माने में हम इतने प्रगत नहीं थे। वो तो बाद में ढूंढ़ निकाला वो भी गाव के पालिका कार्यालय से। उन्हें धन्यवाद देना चाहिए की उन्होंने इतना पुराना रेकोर्ड संभल कर रखा।

मेरी बेटी

दोस्तों, हमें एक बेटी ही है। इस साल वह एम् एस सी ( केमिस्ट्री) के अंतिम वर्ष में है। मेरा तबादला पुना में हुआ और मैने परिवार सहित पूना में रहने की सोच ली। उसे यहाँ एक अच्छे से कोलेज में दाखिला मिल गया। पिचले हप्तेसे उसके कोलेज में इंटर नेशनल केमिस्ट्री इयर मनाया गया। कुछ प्रतीयोगीतये हुई। पोस्टर कोम्पी टी शन मी उसने भाग लिया। सौभाग्य से मै पालक सभा में हिस्सा लेने गया था उसी समय उस प्रति योगिता का रिजल्ट डिक्लेअर किया गया। मेरे ही सामने मेरी बेटी को पहिला पुरस्कार मिला।मुझे बहुत ही आनंद हुआ। मन प्रफुल्लित हुआ। मुझे मेरी बेटी पर गर्व हुआ।
मैंने सोचा अपना आनद आपसे शेअर करू इसलिए यहाँ यह पोस्ट लिखी.

February 12, 2011

आँखे

( गूगल इमेज)
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
जो इस हँसी चहरे पर चार चाँद लगा देती है
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
जो आसमाँ में हँसी चाँद दिखाती है
ये हँसी दुनिया,
ये सौदर्य से लदी धरती
ये नीला आसमाँ
ये खुबसूरत जहाँ
हमें दिखलाती है
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
लेकिन हम इन्हें महज एक अँग समझ बैठते है
हमें इनका महत्त्व महसूस ही नहीं होता
वो तो उनसे पूछिए
जिन्हें ऊपरवाला
ये दो खुबसूरत मोती
ये दो आँखे देना भूल जाता है
वे जो इन आँखों को देख नहीं सकते
वे ही जानते है
कितनी खुबसूरत होती है ये आँखे



February 8, 2011

अकेलापन


जाने किस बात की सजा देते हो मुझे ?
हे प्रभु
मैंने ऐसा क्या गुनाह किया है?
मेरे अपने क्यों मुझसे खफा है?
अब तो ये अकेलापन काटने लगा है
मुझे ऐसा लगता है
जैसे

इस धरती पर मै अकेला ही
जीव रह गया हु
अब मुझसे बर्दास्त नहीं होता
हे प्रभु
ये
अकेलापन
क्यों रूठ गयी हो तुम मुझसे
बताओ मुझे बताओ
मेरा क्या गुनाह है
इस तरह चुपचाप रहो
तुम कुछ तो कहो
मै पागल हो जाऊंगा अब
ना सताओ मुझे
हे प्रभु आप ही कुछ करो
उसे समझाओ
हे प्रभु ।

February 6, 2011

जिंदगी एक सागर है

(सोर्स :गूगल इमेज)

जिंदगी एक सागर है

हम उसकी एक गागर है

उपरवाला पैदा कर

हर क्षण इस गागर में

एक एक बूंद जीवन के टपकाता रहता है

और

जब यह गागर भर जाती है

वो उसे फोड देता है

फर्क बस इतना है दोस्तों की

कौनसी गागर कब भरनी है

और

उसे कब फोडना है

यह उपरवाले की मर्जी पर

निर्भर करता है ।
हम तो बस एक गागर भर है।



February 5, 2011

जिंदगी एक झील

(गूगल इमेज)


जिंदगी एक झील है
जो तैरना सीख ले
वो जिंदगी जी लेता है,
वरना जिंदगी भर
इस झील में डूबकी लगाता रहता है
और अंत में डूब ही जाता है.