October 26, 2013

सोने की चिडिया

एक दोस्त  दुसरे से बोला, " हमारा देश हजारो  साल पहले से सोने की चिडिया कहलाता था. लेकिन आज नही. वो फिरंगी सब कुछ लुट ले गये शायद."
" हा यार शायद, पर मेरा मन मानता ही नही."
"ऐसा क्यो? क्या कहता है तेरा मन?"
" मुझे लगता है हमारे पूर्वज इतने मुर्ख नही होंगे की वो फिरंगीयो को सब लुटने देते. सब पुर्वजो ने ज्यादा से ज्यादा सोना और जवाहरात जमीन में गाड कर रखे होंगे."
" तु सही कह रहा है यार! इसका मतलब सारा देश सोने की मिट्टी पर बसा है?"
" अरे सोच द्वारका समुद्र में डूब गयी थी. और श्रीकृष्णजी के समय में कितना सोना होता होगा. वो सब कहा गया?"
"हा यार समुंदर में भी सोना हो सकता है."
" ............................"
"..............................."

June 19, 2013

हाहाकार

दोस्तों इस साल उत्तराखंड या यु कहे सम्पूर्ण हिमालय परिसर में बारिश ने तबाही मचा रखी है. बारिश भी अजीब होती है. अब तक सुखा पड़ा था अबकी तबाही मची है. प्रकृति है की हमें ना तो ठीक से जीने देती है ना मरने देती.
मै २००७ में हिमाचल प्रदेश में गया था. शिमला में रुका था और नजदीक नाथपा झाकरी प्रोजेक्ट पर गया था.  ऑफिसियल काम से ही गया था. उस समय आदतन मैंने सम्पूर्ण शिमला और वहां से उस प्रोजेक्ट ताका के रास्ते का मुआयना किया था.मै तोनजारा देख हैरान हो  गया था. वहाँ लोग कैसे जीते होंगे यह सोच भी नहीं पा रहा था. क्योकि हर तरफ पहाड़ी ही थी. पहाड़ी पर ही बिल्डिंगे बनी हुई थी. वो भी २-३ मंजिला नहीं. १०-१० मंजिला. इ़तना ही नहीं सारे रास्ते मनी कई एक्सीडेंट हुए देखे थे. बिल्डिंगे गिरी हुई, बस गिरी हुई. क्योकि भारी बारिश की वजह से रास्ते ढह गए थे. जब हमारी कार ऐसे  रस्ते से गुजराती थी तो मै तो दिल थाम के बैठता था.
मैंने देखा की सारा हिमालय मिटटी का बना हुआ है. पत्थर का तो कही पता ही नहीं होता था. तभी मै अपने साथियो से बोला था यदि यहा धुआधार बारिश होती रही तो ये पहाड़ ढह जाने में देर नहीं लगेगी.
दोस्तों आज वही हो रहा है.
पहले हिमालय में बारिश कम हुआ करती थी सिर्फ बर्फ ही पड़ती थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वहां की बर्फ कम होती जा रही है और बारिश बढती जा रही है.


हमें अब भी मौक़ा है प्रकृति को समझने का वरन वो हमें ही समझा देगी की वो क्या है और उसकी ताकत क्या है.

December 29, 2012

आखिर कब तक…..................





अपनी ही माँ को अपने सामने कब तक पिटते देखती रहूंगी मै?
मेरे जनम पर अपनी माँ को बलि चढ़ता कब तक देखती रहूंगी मै?
जनम होते ही जिन्दा दफना देना मुझे कब तक देखती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै हू एक माँ, एक बेटी, एक बहन, एक पत्नी
जो तुब सब के घर को सजाती संवारती है
फिर भी कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक सांस की प्रताडना सहती रहूंगी मै,
दहेज की लालच में कब तक जलती रहूंगी मै,
क्या सांस ननद औरत नहीं होती?
कब तक उनके तानो को अपनी सास बनाती रहूंगी मै,
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक रावण के आँगन में बंधी रहूंगी मै?
कब तक अपनी कमजोरी को सहती रहूंगी मै?
माँ काली कब ऐसे ही कमजोर बनी रहूंगी मै?
कब तक छिछोरेपण से खुद को बचाती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक समाज के बलात्कार को सहती रहूंगी मै?
अगर जिन्दा बची तो कब तक अपनो की नजरो से बचती रहूंगी मै?
क्या वो अपने भी औरते नहीं होती?
क्या उन्हें औरत की इज्जत पता नहीं होती?
फिर भी कब तक उनकी घूरती नजरो से कब बचती रह सकुंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

आज मेरी मौत का मातम मना रहे हो
कब तक ऐसे मातम बनाते रहोगे तुम?
कल को तुम सब भूल जाओगे
कोई दामिनी समाज की बुराइयो के बलि चढ गई
मुझे मातम नहीं बदला हुआ समाज चाहिए!
मै एक लडकी हूँ लेकिन मै माँ, बहन, बेटी, बहु, सास, ननद, नानी, दादी सब कुछ मुझमे ही तो है!

 -------- श्रध्दांजलि 
रविन्द्र रवि

December 25, 2012

MERRY CHRISTMAS


November 7, 2012

From my camara!







November 6, 2012

Its true!

Its true! I got it from net. Its not mine!

October 26, 2012

शीशे के घर!


October 20, 2012

"जिंदगी की गहराई"

"जिंदगी की गहराई"
अगर समझो तो 
एक खुबसूरत झील  है,
और 
अगर ना  समझो तो 
 मौत का कुआ है. 


धन कमाने की रफ्तार

धन कमाने की चाह ने उन्हें कुछ ऐसा जकड लिया
जिंदगी किस रफ्तार से गुजर गयी पता भी न चल पाया!

धन का नशा उन्हें कुछ इतना चढ गया
सामने यमराज आये तो उन्हें भी धन से नहला दिया!

धन कमाने की रफ्तार जिंदगी से तेज थी
बुढ़ापा कब आया पता भी न चल सका!

October 6, 2012

मालशेज घाट

मालशेज घाट- बारिश और नजारा





 दोस्तों दो दिन से मै टूर पर था. जाते आते पूना से नजदीक मालशेज घाट से जाना पडा. ऊपर से बारिश थी. नजारा देखने लायक था. उपरवाले ने हमें क्या क्या दें दी है.

August 15, 2012