January 26, 2011

गणतंत्र दिवस


आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये

"वंदे मातरम."


January 24, 2011

एक महान कलाकार

शास्त्रीय संगीत के एक महान कलाकार पंडित भीमसेनजी जोशी अब इस दुनिया में नही रहे. मेरा सौभाग्य मनात हू कि आज मै उनके शहर पुना में रह रहा हु. पद्मश्री, पद्मभूषण भारत भूषण इ. पुरस्करो से उन्हे सन्मानित किया गया था. ऐसी महान हस्ती को मेरा सबसे पसंदीदा गीत 'मिले सूर मेरा तुम्हारा.......' के साथ श्रद्धांजली अर्पित करता हु.
भगवान उनकी आत्मा को शांती दे.



January 22, 2011

ये बीबियाँ

( आजकल पता नहीं क्या हुआ है मुझे मै व्यंग लिखने लगा हू, ये कैसा बदल हुआ कब हुआ पता ही नहीं चला. अच्छा हुआ मेरी घरवाली यानी बीबी जी को पता नहीं चला अभी तक वरन...........खैर इस व्यंग के लिए मै अपनी बीबी से और तमाम बहनों से प्रस्तुत करने से पहले ही माफी मांग रहा हू. तो लिहिये मेरी एक और व्यंग भरी कविता.)
आज कुछ यु हुआ
कि हम सबेरे सबेरे
एक बहुत ही हसीन सपना
देख रहे थे
सपने में हमे एक हसीना मिली
हम उससे बतिया रहे थे
अचानक बीबी की खनखनखनाती आई
वो आवाज कानो से कुछ ऐसे टकराई
जैसे समुंदर किनारे
चट्टानो से समुंदर की लहरे
टकराने से आवाज आई हो।
जैसे बारिश में तुफान की आवाज आई हो
और
बौखलाहट में हम
उस हसीना को अकेले ही छोड
दूम दबाकर भाग खडे हुये।
अजी पलटकर देखने की
हिम्मत भी नही जुटा पाये हम।
भाईयो,
ऐसा क्यो होता है?
ये बीबियाँ हमेशा
गलत वक्त ही क्यो टपक पडती है?
और तो और
जागते हुए सपने देखने न दिये तो ठीक है
निंद में भी ख्वाब न देखने देती है
ये बीबियाँ

January 20, 2011

सबेरे का सपना

मैंने बहुत बार
ऐसा कहते सूना है लोगो को
की सवेरे देखे जाने वाले सपने
अक्सर सच होते है
जब से सूना है
तब से ही मै रोज सवेरे कोई अच्छा सा सपना देखु
ऐसा दिन में देखे सपने में सोचता हूँ
और
रोज रात बिस्तर पर लेटते ही
हसीन सपनों के ख्वाब रंगने लगता हूँ
ख्वाब के रंग में रंगते ही मुझे नींद जाती है
और रात भर नींद में ही
सवेरे कोई हसीन ख्वाब देखने के
ख्वाब देखने लगता हूँ
सुबह होते होते
एक हसीन ख्वाब दिखाई देने लगता है
ख्वाब में
किसी हसीना के हसीन पैरों की आहट सुनाई देती है
और
ख्वाब में ही मै
उसको देखने के लिए तैयार होता हूँ
पर हाय रे नशीब,
उस हसीना के पैरों की उंगली
जैसे ही दिखाई देती है
कानों में
बीबी की झंकार सुनाई देती है
और मै बौखलाकर जागृत हो जाता हूँ,
उस समय सुबह के छह बज चुके होते है
और मेरा सपना अधूरा ही रह जाता है
ऐसा अक्सर होता है दोस्तों
खैर
होनी को कौन टाल सकता है भला
तकदीर अपनी अपनी
सपने अपने अपने

January 17, 2011

नजदीक आती दुनिया

दोस्तों, एक समय था जब अमरीका, लन्दन, जापान हमारे लिए ख़्वाब-सा था. कोई सोच भी नहीं सकता था की दुनिया आज जीतनी नजदीक आ सकती है। उन दिनों कोई यदि विदेश गया तो उसके घरवाले दर जाते थे। पता नहीं वापिस आएगा या नहीं। हवाई जहाज से यात्रा करनी है। कुछ हो गया तो. लेकिन आज ऐसी हालत नहीं है। लोग एक दिन में जाकर वापस आते है। मै जब जापान गया था तब मुझे ऐसा ही दर लगा था. इसलिए मै जाते समय सभी से मिल-कर गया था. ना जाने वापिस आ सकूंगा की नहीं. हां तो मैंने सिंगापूर में देखा था की कुछ लोग मुम्बई से सिंगापूर शोपिंग करने जाते है। यह बात है १९९८ की।
आज समय बदल गया है। जब से हमारे देश में आयटी क्षेत्र का जाल फैल गया है. तब से विदेश जाना आम बात हो गयी है। बच्चे नौकरी पर लगते की विदेश जाने के ख्वाब देखते है। यही नहीं उन्हें नौकरिपर रखने से पहले पासपोर्ट होना जरुरी होता है।
यह मै लिख रहा हू क्योकि मेरा भांजा कल रूस की राजधानी मास्को गया है। लेकिन आश्चर्य की बात है की वो आय टी में नहीं है और न ही इंजिनिअर है। उसने बी ए एम एस किया है और उसके बाद एम डी कर रहा है। उसे मास्को शहर के मेडिकल कोलेज में लेक्चर देने बुलाया गया है। जहा उसे दो महीने तक अस्पताल भी चलाना है। उसने खुद ने और हम सभी ने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था की उसे आयुर्वेदिक डॉक्टर बनाने के बाद विदेश जाने का मौका भी मिलेगा। इसे ही भाग्य कहते है।
उसके वहा पहुचते ही उसका मेल आया और शाम को उससे चेटिंग भी हुई। इंटरनेट ने दुनिया को बहुत ही नजदीक लाकर खड़ा कर दिया है। पता ही नहीं चलता वह इन्सान घर में है या किसी और देश में। आसानी से उससे बात हो जाती है।
१९९८ में जब मै जापान गया था मुझे याद है शिर्फ मुंबई में फोर्ट एरिया में एक सायबर केफे सुरु हुआ था। और एक घंटे का १०० रूपया लगता था। मैंने वहा १ महीने की कालावधि में नेट सिखा था।

कचरा- एक सिरदर्द


आजकल शहरों की जनसँख्या दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही है। इस वजह से शहरों में कचरा इस कदर बढ़ रहा है की उसका आगे क्या करे यह सोच कर स्थानिक प्रशासन हैरान हो जाता है। अक्सर  यह कचरा डालने के लिए शहर के बाहर जगह बनाई जाती है। लेकिन शहर की परिसीमा बढ़ती ही जा रही है। हर साल कचरे के लिए जगह खोजना मुसीबत बन जाता है।मै आपको एक ऐसा नुस्का बताना चाहता हु जिससे आप खुश हो जायेंगे और प्रशासन को  भी थोड़ी राहत  मिल जाएगी।

हमारे घर में हर रोज जो कचरा निकलता है उस में जादातर हरी सब्जियों के डंठल, पत्ते होते है। इस कचरे को हम न फेक बारीक़ काट कर हमारे आँगन में लगे पेड पौधों को खाद के रूप में इस्तेमाल करे तो बहुत ही उपयोगी साबित होते है। मै अक्सर यही करता हू।
इसके अलावा कचरे में फलो के छिलके या फलो के टुकड़े निकलते.है जैसे केले के छिलके, चीकू, सेब, आम, पपीता इन फलो के छिलके तो बहुत ही अच्छी खाद साबित होते है। मैंने यह सब खुद किया है। मै तो करता  हू आप भी कर के देख ले और अपना शहर साफ रखने में मदद करे।
धन्यवाद!

January 12, 2011

प्याज और महंगाई


कल रात घरवाली बोली
एजी, सुनते हो
(जब से महंगाई बरपाई है
मुझे एजी शब्द से डर लगने लगा है जी)
ये एजी शब्द कानो मे
पडते ही मुझे पसीना
छुटने लगा
मै कांपती आवाज मे बोला
एजी सुनाईये
उन्होने फरमाया
जरा बाजार हो आईये
मैने कहा ठीक है जी
हम हो आते है
और हम बिना चप्पल जुता
पहने, झोला लिये
खिसकने ही वाले थे
कि घरवाली बोली,
अजी क्या लेने चल पडे
मैने कहा आपने कहा तो
जरा बाजार के हाल हवाल ही जान लेते है,
नही जी, हाल हवाल नही
जरा एक किलो प्याज ले आइये
प्याज शब्द कानो मे
पडते देते ही मुझे
प्यास लगने लगी
मैने घरवाली से पानी मांगा
पानी देते हुए वो बोली
अजी प्याज का नाम सुनते ही
आपको प्यास क्यो लगने लगी
मै बोला
एजी पहले प्याज सिर्फ रुलाता था
आजकल
प्यास भी दिलाता है,
एजी, एक किलो प्याज का आप क्या करेंगी
अचार डालने के लिये अभी कैरी आना बाकी है,
वो बोली हा जी
ये प्याज मै सालभर
संभालकर रक्खुंगी
उसकी गंध बहुत तेज होती है
खाने के साथ डायनिंग टेबल पर
सजा गंध ले लेना
ये तो बहुत बढीया नुस्का है जी
चाहे जो भी भाव हो जाये
अभी प्याज का
हमे डर नही लगता
मै बोला
एजी लेकिन आप आमलेट कैसे बनओगी
अभी तक तो प्याज ही रुला रहा था
अब अंडा भी रुलाने लगा है
वो बोली हा जी
शायद
अब मुर्गी भी कम अंडे देने लगी है
उसे क्या मालुम उसके कम अंडे देने से
महंगाई बढेगी
मैने कहा हां जी
ये बात तो धरती, पेड, पौधे
किसी को भी नही मालुम
वरना डिजल, सब्जी, अनाज और फलो
के भाव भी आंसमान नही छुते
वो बोली
हा वो बेचारे क्या समझे इस बात को.
आखिर उसने प्याज मंगवाना टाल ही दिया
और हमने
घर मे आराम करना ही ठीक समझा.


January 6, 2011

अजी सुनती हो!


अजी सुनती हो?
अन्दर से आवाज आई,' हां जी कहिये?'
'अजी मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है। जरा एक प्याला चाय मिलेगी तो अच्छा रहेगा.'
'ठीक है जी।' अन्दर से ही उसने कहा।
थोड़ी देर बाद वो चाय का प्याला लेकर आई। 'ये लीजिये।'
'लाइए।'
अब थोड़ी रहत मिली।'
'अजी सुनते हो।'
'क्या है अब।'
मै दबा दू?'
'अरे नहीं। तुम दबा दोगी तो तुम्हारा क्या होगा?'
'मेरा क्या होगा जी। थोडा पुण्य मिल जायेगा।'
'क्या कहा पुण्य मिलेगा!'
'हां हां थोडा पुण्य मिलेगा।'
'हे भगवान! मुझे बचालो इस औरत से।'
'अजी मैंने ऐसा क्या कह दिया की आप भगवान को बुलाने चल पड़े।'
'अभी तो तुमने कहा की दबाने से तुम्हे पुण्य मिलेगा।'
' हां तो इसमे बुरा ही क्या है। अपने पतिदेव की सेवा तो करना ही चाहिए।'
'क्या पतिदेव? और उसी का गला दबाने की बात कह रही हो।'
'क्या? मैंने ऐसा कब कहा जी?'
'तुम ही तो कह रही थी दबा दू?'
'हां वो तो मैंने सर दबा देने की बात कही थी।'
' मुझे माफ कर दो जी मैंने गलत समझा।'
कोई बात नहीं।'
थोड़ी देर बाद....
'अजी सुनते हो।'
'क्या है?'
'क्या पकाऊ?'
' ....'
'अजी मैंने कुछ पुछा आपसे।'
'.......................'
'कमाल के आदमी हो आप। आपकी बीबी आपसे कुछ पूछ रही है और आप है के जवाब ही नहीं दे रहे हो।'
'क्या जवाब दू? तुम पका तो रही हो।'
'अजी मै तो यहाँ आपके साथ बैठी हु। मै कह कुछ पका रही हु।'
'फिर क्या कर रही हो?'
उसने कुछ समझ नहीं आया ऐसी मुद्रा में उनकी तरफ देखा।
'अरे तुम मुझे क्यों पका रही हो?'
'अच्छा मै अब आपको पकाने लगी हु।'
'और क्या'
'हे भगवान मुझे इस इन्सान से बचालो।'
'मैंने क्या गलत कहा की तुमने भगवान को बुला लिया।'
'आपको अब मै अच्छी नहीं लगती हु।'
'अजी मैंने ऐसा तो नहीं कहा।'
'पति कभी खुल के पत्नी से ऐसा कैसे कहेंगे. इसलिए आड़े तिरछे शब्दों में कह ने की कोशिश करते है। क्या मै इतना भी नहीं समझती।'
'आरी भागवान, मुझे मुआफ कर दो। गलती हो गई। दुबारा ऐसा नहीं होगा।'
'ठीक है मुआफ कर दिया।'
थोड़ी देर बाद.....
'अजी आप काम कर रहे है तब तक मै ऊपर जाऊ।'
'जाओ जाओ जल्दी जाओ।'
'अभी थोड़ी देर में वापिस आ जाउंगी।'
'क्या?'
'हां वापिस आउंगी।'
'कैसे?'
'सीढियो से चल के।'
'क्या बात कराती हो। ऊपर जाने वाला कभी वापिस आता है भला। और वो भी सीढियो से।'
उसने रोना सुरु कर दिया,'हे भगवान, क्या हो गया है इस इन्सान को। नहीं नहीं अब आपको मै बिलकुल ही नहीं भांति। इसलिए मै अपने मायके चली जाती हु।'
'अरे मै तो मजाक कर रहा था!'
'..........'
'माफ कर दो बाबा।'

January 4, 2011

ऐ जिन्दगी

जिन्दगी,
मेरी ख्वाहिश है
जरा तू भी तो जीवन जी के देख ले,
तुझे भी तो पता चले
जीवन जीना कोई बच्चो का खेल नहीं,
तुझे भी तो पता चले
जीवन जीने के लिए
कितने पापड बेलने पड़ते है
जिन्दगी,
तू भी तो समझ ले
जीवन में एक कतरा सुख पाने के लिए
कितने दुखो के अंगारों पे चलना पडता है,
तू भी देख ले जिंदगी
जीवन किस चिड़िया का नाम है,
जिन्दगी

January 3, 2011

जिंदगी

जिन्दगी
तू क्या क्या रंग दिखलाती है,
कभी दिन कभी रात ला
हमे अच्छे और बुरे का पाठ पढाती है।

January 1, 2011

नए साल की नयी सुबह

नये साल कि नयी सुबह
लेकर आई नया सूरज
दोस्तो चाहे कैसे भी बीता हो पिछला साल
नये साल मे मिलेगा आनंद और उल्हास हि
राखो थोडा धीरज,
क्या जल्दी है
अभी तो आया है २०११
कर अलबीदा २०१०
जरा उसे सुस्ता तो लेने दो
फिर उसका साथ दे
उसके कंधे से कंधा मिला
मेहनत जो करोगे
साल भर आनंद
और उल्हास हि पाओगे
!!नया साल मुबारक हो!!