Digital Hindi Blogs



October 20, 2017

दिवाली की रात

 दिवाली की रात
दूर आकाश में
छु कर
वो चाँद देखने की कोशिश करता होगा
यहाँ धरती पर
दिवाली की रात लोग
क्या-क्या कर रहे है
लेकिन उसकी आँखे
धरती पर जलते करोडो दियो 
लाखो पटाखों  की
जगमगाती  रोशनी से

चौंधिया  जाती होगी




October 19, 2017

Happy Diwali*****


September 29, 2017

शुभ दशहरा

             सर्व मित्रांना दसऱ्याच्या हार्दिक शुभेच्छा!!!!!!!

सभी दोस्तो को दशहरे की शुभ कामनाये !!!!!!!!

September 28, 2017

पूछो तो जाने

दोस्तों, इन्सान को उपरवाले ने कुछ इस तरह बनाया है की किसी भी चीज पर उसकी नजर जाये तुरंत ही उसके दिमाग में हलचल सुरु हो जाती है. यदि वह चीज जनि पहचानी है तो उसे उसका नाम तुरंत ही याद आ जाता है. यदि नहीं, तो वह सोचता रहता है "
ठीक इसी तरह उसके जहन में हर पल अनगिनत सवाल उठते रहते है. कई सवालों के वह जवाब  ही नहीं जान पाता और कई ऐसे सवाल होते है जिन्हें वह जानना तो चाहता है मगर उसे उसका जवाब ही नहीं मिल पाता.

जब से इंटरनेट आया है हमारा काम थोड़ा आसान हो गया है. कई सवालों के जवाब उस जंजाल में मिल जाते है.
लेकिन इन सवालो के जवाब जानने के लिए हम एक और तरिका अपना सकते है.
yahoo answer  और quora ये ऐसी ही साईट है जहा आप अपना सवाल डालिए, दुनियाभर से कोई न कोई आपके सवाल का जवाब जरुर देता है. मगर ये दोनों आंतर्राष्ट्रीय साईट है.
हाल ही में मेरी बेटी ने  ऐसी ही साईट खुद तैयार की  है और उसे लोन्च भी किया है.
ma.pruchha.com इस साईट पर आप मराठी में सवाल दाल सकते है और जवाब दे सकते है.
 pruchha.com भी ऐसी ही साईट है.
आप सभी दे निवेदन है की आप खुद, आपके बच्चे या और भी लोगो से इस साईट का इस्तेमाल करने के लिए कहे.

जिंदगी की रफ़्तार

रस्तो पे बाईक या कार चलाने वाले भाई यो से गुजरीस है की अपनी गाडी की रफ्तार अपने कबु में खे। इसी सिलसिले में एक कवीता पेश कर राहा हुं. जरा गौर फरमायेगा
" वाहन क्या है?
जिंदगी को एक जगह से
दूसरी जगह ले जाने भर का एक साधन ही तो है
लेकिन
इसकी रफ्तार यदि पकड़ से बहार चली जाये
तो
जिंदगी को इस दुनिया से
उस दुनिया में ले जाने का एक साधन बन जाती है."



इसलिए दोस्तों गाड़ी इतनी गति से चलाये की वह अपनी पकड़ में हो
चाहे जब उसे रोक सके
वरन

August 15, 2017

बचपन की यादे

बचपन की यादे 
वो बारिश के  दिन 
वो बरसात की रातें
वो बचपन की यादें!

फिर हुई वो बारिश सुबह 
फिर एक बारिश की शाम हुई,
फिर सूरज ढला,
फिर आई वो बरसात की रात,

ये सिलसिला
बरसात लेते आते  
रात दिन का 
यूँ ही चलता रहता था,
कई दिन ऐसे ही 
बारिश होते रहती थी,
नदियाँ
 अपने पुरे जोश में
बहा कराती थी कई दिन,

अब वो एक ख्वाब ही रह गया है.
सिलसिला तो अब भी चलता रहता है,
रात दिन का का
पर अब बारिश
 "कुछ पल" 
के लिए होती है
बाकि दिन तो धुप ही होती है.
पता ही नहीं चलता 
कब बारिश का मौसम आया 
और चला गया.........

कवी- रविन्द्र "रवि" ( कोष्टी) 
१५/०८/२०१७




October 26, 2013

सोने की चिडिया

एक दोस्त  दुसरे से बोला, " हमारा देश हजारो  साल पहले से सोने की चिडिया कहलाता था. लेकिन आज नही. वो फिरंगी सब कुछ लुट ले गये शायद."
" हा यार शायद, पर मेरा मन मानता ही नही."
"ऐसा क्यो? क्या कहता है तेरा मन?"
" मुझे लगता है हमारे पूर्वज इतने मुर्ख नही होंगे की वो फिरंगीयो को सब लुटने देते. सब पुर्वजो ने ज्यादा से ज्यादा सोना और जवाहरात जमीन में गाड कर रखे होंगे."
" तु सही कह रहा है यार! इसका मतलब सारा देश सोने की मिट्टी पर बसा है?"
" अरे सोच द्वारका समुद्र में डूब गयी थी. और श्रीकृष्णजी के समय में कितना सोना होता होगा. वो सब कहा गया?"
"हा यार समुंदर में भी सोना हो सकता है."
" ............................"
"..............................."

June 19, 2013

हाहाकार

दोस्तों इस साल उत्तराखंड या यु कहे सम्पूर्ण हिमालय परिसर में बारिश ने तबाही मचा रखी है. बारिश भी अजीब होती है. अब तक सुखा पड़ा था अबकी तबाही मची है. प्रकृति है की हमें ना तो ठीक से जीने देती है ना मरने देती.
मै २००७ में हिमाचल प्रदेश में गया था. शिमला में रुका था और नजदीक नाथपा झाकरी प्रोजेक्ट पर गया था.  ऑफिसियल काम से ही गया था. उस समय आदतन मैंने सम्पूर्ण शिमला और वहां से उस प्रोजेक्ट ताका के रास्ते का मुआयना किया था.मै तोनजारा देख हैरान हो  गया था. वहाँ लोग कैसे जीते होंगे यह सोच भी नहीं पा रहा था. क्योकि हर तरफ पहाड़ी ही थी. पहाड़ी पर ही बिल्डिंगे बनी हुई थी. वो भी २-३ मंजिला नहीं. १०-१० मंजिला. इ़तना ही नहीं सारे रास्ते मनी कई एक्सीडेंट हुए देखे थे. बिल्डिंगे गिरी हुई, बस गिरी हुई. क्योकि भारी बारिश की वजह से रास्ते ढह गए थे. जब हमारी कार ऐसे  रस्ते से गुजराती थी तो मै तो दिल थाम के बैठता था.
मैंने देखा की सारा हिमालय मिटटी का बना हुआ है. पत्थर का तो कही पता ही नहीं होता था. तभी मै अपने साथियो से बोला था यदि यहा धुआधार बारिश होती रही तो ये पहाड़ ढह जाने में देर नहीं लगेगी.
दोस्तों आज वही हो रहा है.
पहले हिमालय में बारिश कम हुआ करती थी सिर्फ बर्फ ही पड़ती थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वहां की बर्फ कम होती जा रही है और बारिश बढती जा रही है.


हमें अब भी मौक़ा है प्रकृति को समझने का वरन वो हमें ही समझा देगी की वो क्या है और उसकी ताकत क्या है.

December 29, 2012

आखिर कब तक…..................





अपनी ही माँ को अपने सामने कब तक पिटते देखती रहूंगी मै?
मेरे जनम पर अपनी माँ को बलि चढ़ता कब तक देखती रहूंगी मै?
जनम होते ही जिन्दा दफना देना मुझे कब तक देखती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै हू एक माँ, एक बेटी, एक बहन, एक पत्नी
जो तुब सब के घर को सजाती संवारती है
फिर भी कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक सांस की प्रताडना सहती रहूंगी मै,
दहेज की लालच में कब तक जलती रहूंगी मै,
क्या सांस ननद औरत नहीं होती?
कब तक उनके तानो को अपनी सास बनाती रहूंगी मै,
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक रावण के आँगन में बंधी रहूंगी मै?
कब तक अपनी कमजोरी को सहती रहूंगी मै?
माँ काली कब ऐसे ही कमजोर बनी रहूंगी मै?
कब तक छिछोरेपण से खुद को बचाती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक समाज के बलात्कार को सहती रहूंगी मै?
अगर जिन्दा बची तो कब तक अपनो की नजरो से बचती रहूंगी मै?
क्या वो अपने भी औरते नहीं होती?
क्या उन्हें औरत की इज्जत पता नहीं होती?
फिर भी कब तक उनकी घूरती नजरो से कब बचती रह सकुंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

आज मेरी मौत का मातम मना रहे हो
कब तक ऐसे मातम बनाते रहोगे तुम?
कल को तुम सब भूल जाओगे
कोई दामिनी समाज की बुराइयो के बलि चढ गई
मुझे मातम नहीं बदला हुआ समाज चाहिए!
मै एक लडकी हूँ लेकिन मै माँ, बहन, बेटी, बहु, सास, ननद, नानी, दादी सब कुछ मुझमे ही तो है!

 -------- श्रध्दांजलि 
रविन्द्र रवि

December 25, 2012

MERRY CHRISTMAS


November 7, 2012

From my camara!







November 6, 2012

Its true!

Its true! I got it from net. Its not mine!

October 26, 2012

शीशे के घर!


October 20, 2012

"जिंदगी की गहराई"

"जिंदगी की गहराई"
अगर समझो तो 
एक खुबसूरत झील  है,
और 
अगर ना  समझो तो 
 मौत का कुआ है. 


धन कमाने की रफ्तार

धन कमाने की चाह ने उन्हें कुछ ऐसा जकड लिया
जिंदगी किस रफ्तार से गुजर गयी पता भी न चल पाया!

धन का नशा उन्हें कुछ इतना चढ गया
सामने यमराज आये तो उन्हें भी धन से नहला दिया!

धन कमाने की रफ्तार जिंदगी से तेज थी
बुढ़ापा कब आया पता भी न चल सका!

October 6, 2012

मालशेज घाट

मालशेज घाट- बारिश और नजारा





 दोस्तों दो दिन से मै टूर पर था. जाते आते पूना से नजदीक मालशेज घाट से जाना पडा. ऊपर से बारिश थी. नजारा देखने लायक था. उपरवाले ने हमें क्या क्या दें दी है.

August 15, 2012

कवी संमेलन


कवी संमेलन


July 18, 2012

श्रद्धांजलि- एक सुपरस्टार को

अरी पुष्पा.................. ये आसू मत बहाओ रे..........हे डायलोग एक सुपरस्टार राजेश खन्ना के है. अपने ज़माने के सुपरस्टार थे वो.
आरी पुष्पा दुनिया में कोई अमर नहीं होता है रे. कल वो चला गया आज ये चला जायेगा और कल मई भी चला जाऊंगा रे. आज ये सुपरस्टार सचमुच ही इस दुनिया को अलबिदा कह चला गया.
निचे लिखी  सच्चाई  के साथ इस महँ कलाकार को श्रद्धांजलि.
 अरी पुष्पा यहाँ कोई 'अमर' नहीं है रे. 'अमर'  तो सिर्फ 'प्रेम' होता है. सिर्फ 'प्रेम' की 'आराधना' करो और जीवन 'आनद' पाओ रे.

May 18, 2012

मेरी कलाकारी

MS Paint में जो paint brush होता है उशी की सहायता से मैंने यह पेंटिंग ब्लेक & व्हाइट तैयार की है. जरा देखिये और अपना नजरिया बताइए!




May 12, 2012

समाज को बदल डालो...........

 

जी हां, आमीर खान ने यही किया है. अपने 'सत्यमेव जयते' इस कार्यक्रम के जरिये उन्होंने समाज को बदलनेका ही काम किया है. ६ मई को दरअसल मई थोड़ी देर ही यह कार्यक्रम देख सका क्योकि पावर नहीं थी. लेकिन जिताक देखा वाही यह समझने के लिए काफी था की बस अब बहुत हो गया अब समाज का पतन निश्चित कम होगा. 
दोस्तों. इंसान ऐसा होता है की उसे खुद कुछ नहीं समझाता उसे समझाना पडता है. पहले हमारे समाज को संत महात्मा समझते थे. अच्छी राह दिखाते थे. अब यह काम टी.व्ही. कर रहा है. समाज पर सबसे जादा असर पडता है टी.व्ही.का. आप जो कुछ अच्छा बुरा टी.व्ही.पर दिखाते है उसका असर बहुत जल्द समाज पर पडता है. इसी का फायदा आमिर ने उठाया और एक बहुत ही अच्छा काम हाथ में लिया है. मेरी शुभ कामनाये. 


'सत्यमेव जयते'

May 6, 2012

कुछ लोग ऐसे होते है

कुछ लोग  ऐसे होते है 
जिंदगी में धीमी आहट घुसे  चले आते है
और 
युही जिंदगी में झाँककर चले जाते है
पर अपनी ऐसी छाप झोडे जाते है
की जिंदगी भर याद आते है.

March 27, 2012

चाहनेवाले......

दोस्तो आज हम बहुत खुश है. कारण जानना चाहते हो? यादी हा तो जरा "कुछ पल" के दाने हाथ पे गौर फरमाईये! देखिये हमारे चाहनेवाले! आजी पुरे १९०! बस और १० की कमी है की हमारा दोहरा शतक पुरा हो जायेगा! दोस्तो मै शरमिंदा हुं क्योकि पिछले की समय से मै लिख नही पा रहा हुं. काम का बोझ इतना है की दिमाग में कोई कविता या और कुछ सुझता ही नही. भविष्य में जब भी वक्त होगा जरूर कोशिश की जायेगी. बस इसी तऱ्ह हौसला बुलंद करवाने की चाह है!
आपका अपना

रविंद्र 'रवी'

March 6, 2012

मेरी स्केचेस

दोस्तों मैंने एम् एस पेंट में कुछ स्केचेस तैयार की है. जरा देखिये कोशिश कामयाब हुई या...................



February 9, 2012

Incredible INDIA

Best ever PPT I got from authorstream.

January 26, 2012

२६ जनवरी २०१२- प्रजातंत्र दिवस

सभी दोस्तो को २६ जनवरी २०१२- प्रजातंत्र दिवस कि शुभ कामनाये!!!!!!!!!!!!!

January 2, 2012

हर साल बस यु ही होता है..................

हर साल बस यु ही होता है,
पुराना साल जाता है,
और
नया  साल आता है,
हम बस वही रह जाते है
जाते  हूये को ताकते रहते है
और

आते हुये को भी ताकते ही रहते है,
कुछ भी तो नही कर पाते है,
अजी हर साल कसमे खाते है
पर सिगारेट की लत है की  
छोड नही पाते है........
 

January 1, 2012

साल मुबारक!!!!!!!!!


December 14, 2011

जिंदगी के तराने


जिंदगी के तराने बहुत है,
जिंदगी में अफसाने बहुत है.  
जिंदगी से घबराओ नहीं दोस्तों,
जिंदगी में मैखाने बहुत है,

December 12, 2011

जीवन का पथ

जीवन के पथ पर जो चलता जाता है,
बेधड़क, बेझिझक, बेखबर,
वही अंतिम पड़ाव तक पहुच पाता है  
बेधड़क, बेझिझक, बेखबर!


December 3, 2011

बेरंग

कभी कभी जिंदगी अपने ऐसे रंग दिखाती है की जिंदगी ही बेरंग हो जाती है.

November 23, 2011

काश जिंदगी...........

(दोस्तों जिंदगी इंसा कुछ इस कदर जीता है की उसे उसके मायने ही समझ नहीं आते. अभी अभी मुझे इस विषय पर एक कविता सूझी और उसे यहाँ आपकी खिदमत में पेश कर रहा हू. दि. २३/११/२०११))
काश जिंदगी खुशबू होती,
इंसा सारी जिंदगी
खुशबूदार जीवन व्यतीत करता.

काश जिंदगी आईना होती,

इंसा खुद को हर रोज
उसी आईने में निहारता
अपनी सारी बुराइया खुद जान जाता
और वक्त रहते उन्हें सुधार लेता,
लाखो करोडो के ख्वाब झूठे होते है
यह वक्त रहते खुद देख समझ पाता
और इत्मीनान से अपने परिवार के साथ
खुशहाल जिंदगी जी लेता
काश जिंदगी.............

November 16, 2011

आशा की किरण..

एक आशा की किरण 
जिसके सहारे
संभाल कर रखे हुए हूँ 
एक फूल गुलाब का,
कोई तो आएगा 
शायद
कभी- न- कभी 
मेरे सुख-दुखों 
का साथी
मेरा हमसफर 
मेरा हमराही.

(६/१२/१९८७ को लिखी मेरी एक और कविता)

November 14, 2011

खालीपन

एक हसीं लम्हा
जो 
लाया  था मेरे लिए
सारे जहाँ की खुशियाँ
अगले ही पल
खत्म हो गया
और
मुझे रोता बिलखता
छोड गया
इस अँधेरे जीवन में
जो
खालीपन से भरा है. 
( 6/12/1987 को लिखी मेरी एक कविता)

November 11, 2011

आ सेतू....: माझे आवडते ब्लॉग्स.

आ सेतू....: माझे आवडते ब्लॉग्स.: माझ्या मना
काय वाटेल ते........

October 26, 2011

दिवाली की शुभ कामनाये

सभी ब्लॉग मित्रो को दिवाली की शुभ कामनाये!!!!!

October 16, 2011

सबका दिल बस युही रोता है.............


मेरे दिल तू इतना गुमसुम क्यो है?
आंखे तेरी इतनी नम क्यो है?
तुझे कोई गहरा गम है?
तू न इतना घबरा, 
प्यार में यही होता है
सबका दिल बस युही रोता है.

September 30, 2011

हा हा हा!!!!!!!!!!!!!!!!!!

ये पुना शहर में किसी घर के बाहर लागी हुई हिदायत है. पढिये और मजा लिजिये. ( नेट से प्राप्त एक तस्वीर)

September 24, 2011

तलाश...

पथ अगम मेरा 
लक्ष्य अबोध है
नहीं है जो मंजिल मेरी 
उसी की तलाश में 
भटक रहा हु मै!!

एक बूंद प्यार की 
जो प्यास बुझाएगी मेरी
अज्ञात है जो 
उसी सुराही की तलाश में
भटक रहा हु मै!!

शांति मिले, छाया मिले
अपना कोई मिले मुझे 
जो न मालुम 
उसी वृक्ष की तलाश में 
भटक रहा हु मै!!

September 18, 2011

चांद जैसा चेहरा

आज निंद आंखो से कोसो दूर है. करवटे बदलते बदलते थक गया और अचानक मन बहक गया. फिर सुझी ये चंद लाईने. बिस्तर उठ सिद्ध कम्प्युटर पे आ गया और यहा आपकी खिदमत में ओ लाईने पेश करा रहा हु.  अभी रात के २ बज रहे है.
 

घनी जुल्फो से झांकता 
उनका चेहरा देख
 लगता है
जैसे 
चांदनी रात में 
घने बादलो के पीछे से 
चांद झांक रहा हो 

September 11, 2011

आंसू

तेरे गम में बह गया है 
  मेरा एक एक आंसू
नहीं अब कोई सितारा 
 जो चमक सके गगन में. 
-कतील शिकाई

August 13, 2011

रजनी पती

हे चांद,
किसके  गम में जिता ही तू 
क्यो जागता रहता है तू रात भर
कौन है वो बदनशिब
जिसने तुझे  भुला दिया है
जानता हु मै, 
तुझमे दाग है न,
तेरी खुबसुरती मे दाग है
पर क्या हुआ
हर एक पर दाग होता ही है
ऐसा है कोई जिस पर कोई दाग न हो?
कोई है जिसमे खोट न हो?
नही शायद नही
फिर क्यो ऐसा क्यो?
तेरी इतनी सी खोट का इतना बडा जुल्म
कितना गम मिला है तुझे?
फिर भी तु  खुश रहता है
रातो मे करवटे बदलता है
और अंत मे सो जाता है
एक दिन वो भी आता है
जब रात भर जागता है तु
कतल की रात होती वो
हे रजनी पती
अरे हा
कही वो बेवफा रजनी तो नही?
जो तुझे छोड गयी है!
हां, ऐसा ही लगता मुझे
हा वही है वो बेवफा
कितनी दुर चली गयी है वो
तु कहा आकाशलोक मे
वो कहा धरती पर
फिर दोनो का मिलन कैसे होगा?
असम्भव है यह
अब ऐसा नही होगा
तुम दोनो कभी नही मिलोगे
केवल ताकते रहोगे एक दुसरे को जोवन भर
तु वहा से देखना
रजनी यहा से देखेगी
तेरी दुनिया मे सब सो जाते है
तारे झिलमिलाते है
पर तु तब भी जागता रहता है
मुहब्बत के मारो पर हमेशा जुल्म होता है
बेचारो को गम के शिवा मिलता ही क्या है?
हे रजनीपती

(रविन्द्र रवि)


August 4, 2011

हम तुम................

मै बाहो मे था तुम्हारी
तुम मेरी बाहो मे थी
मै खोया था तुम मे
तुम मुझ मे खोयी थी 
उलझी हुई  लटे तुम्हारी 
सुलझा रहे थे मेरे हाथ
दिल दिमाग आंखे
सभी खामोश थे पाकर तुम्हारा साथ
मै सपनो मे तुम सपनो मे
मै तुम मे तुम थी मुझमे
खोये खोये थे आपस मे 
हम तुम.
( दोस्तो यह प्रेम कविता मैने ६/११/१९८० को लिखी)

July 28, 2011

मुझे इंतजार है.......

बस  अब  इंतजार ही तीन दोस्तो का. वो आ जाये और दोस्ती का हात बढाये तो मेरा शतक पुरा हो जाये. हम भी  अपने आप को धन्य समझने लगेंगे.

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे की मुझे किस का इंतजार है. यदि नहीं तो पहेली बुझा दू. अजी अब पुरे  ९७  फोलोअर्स हो चुके है. अब सिर्फ ३ आना बाकी है. तो दोस्तों चलिए दोस्ती के हाथ बढाइये.
मेरे  सभी चाहनेवालो का शुक्रगुजार हु. सभी को तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हु. इसी तरह हौसला बढ़ाते रहियेगा.





July 22, 2011

जुदाई

तेरी  आरजू में जन्नत दिखाई देती है,
तेरे अश्को में तस्वीरे किस्मत दिखाई देती है;
तेरी जुदाई भी हमें मंजूर हो सकती है,
लेकिन दिल से दिल जुदा हो ये हमें मंजूर नहीं.



July 5, 2011

जिंदगी एक - पहेली

जिंदगी एक न छुटनेवाली पहेली है

चाहे जितना भी दूर भगाना चाहो 

लेकिन हमें कभी भी दूर न करनेवाली सहेली है 

 ऐसी  ये जिंदगी बड़ी अलबेली है!



 

June 18, 2011

मेला

गाँव का एक जवान थोडा पढ़ा लिखा एक बार अपने सालेसाहब के यहाँ शहर गया। रविवार के दिन दोनों शहर में घूमने गए। गाव के उस जवान ने एक जगह एक बोर्ड लगा हुआ देखा और साले से कहा " अरे देखो वहा तुम्हारा मेला लगा हुआ है।"
सालेसाहब सकपका गए और बोले, "जीजाजी, मेरा तो कही मेला नहीं लगा है।"
" अरे वहा देखो वो बडे- बडे अक्षरों में अंग्रेजी में लिखा दिखाई नहीं दे रहा।"
सालेसाहब ने बोर्ड की तरफ देखा तब उनकी समझ में आया की माजरा क्या है। और वो पेट पकड़ पकड़ कर बहुत देर तक हसते रहे।
दरअसल, बोर्ड पर लिखा था, "SALE KA MELA"
उस दूकान में असल में एक सेल लगा था। सेल को उस गाव के जवान ने साले पढ़ लिया.

May 14, 2011

श्रद्धांजलि अर्पित

कल मेरे प्रिय मित्र, वर्तमान के बोंस, इंजिनीअरिंग कोलेज के सिनिअर, श्रीमान अग्रवालजी जो की केंसर से पीड़ित थे कल भगवान को प्यारे हो गए।
इश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे।

May 5, 2011

ये मेरा इण्डिया!!