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November 23, 2011
November 16, 2011
September 18, 2011
चांद जैसा चेहरा
आज निंद आंखो से कोसो दूर है. करवटे बदलते बदलते थक गया और अचानक मन बहक गया. फिर सुझी ये चंद लाईने. बिस्तर उठ सिद्ध कम्प्युटर पे आ गया और यहा आपकी खिदमत में ओ लाईने पेश करा रहा हु. अभी रात के २ बज रहे है.
घनी जुल्फो से झांकता
उनका चेहरा देख
लगता है
जैसे
चांदनी रात में
घने बादलो के पीछे से
चांद झांक रहा हो
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