September 24, 2011

तलाश

पथ अगम मेरा 
लक्ष्य अबोध है
नहीं है जो मंजिल मेरी 
उसी की तलाश में 
भटक रहा हु मै!!

एक बूंद प्यार की 
जो प्यास बुझाएगी मेरी
अज्ञात है जो 
उसी सुराही की तलाश में
भटक रहा हु मै!!

शांति मिले, छाया मिले
अपना कोई मिले मुझे 
जो न मालुम 
उसी वृक्ष की तलाश में 
भटक रहा हु मै!!

9 comments:

virendra said...

bahut sunder abhivyakti
dhanyawaad

Rravindra Ravi said...

आपका बहुत बहुत धन्यवाद विरेन्द्रजी!

***Punam*** said...

शायद ये तलाश सबकी है.....
सुन्दर अभिव्यक्ति...!!

Rravindra Ravi said...

आभार पुनमजी!!!!

NISHA MAHARANA said...

बहुत बढिया।

NISHA MAHARANA said...

बहुत बढिया।

Rravindra Ravi said...

शुक्रिया निशाजी!

Anonymous said...

chhan ahe kavita!!

- jivanika

Ravi kant yadav justiceleague said...

good