December 3, 2011

बेरंग

कभी कभी जिंदगी अपने ऐसे रंग दिखाती है की जिंदगी ही बेरंग हो जाती है.

14 comments:

Amrita Tanmay said...

बहुत सुन्दर

S.N SHUKLA said...

सार्थक प्रस्तुति, आभार.

कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें, आभारी होऊंगा .

NISHA MAHARANA said...

shi bat.

रविंद्र "रवी" said...

धन्यवाद निशाजी!!!!!!!!!!!!!

रविंद्र "रवी" said...

नमस्ते शुक्लाजी, और पधारने का धन्यवाद!

रविंद्र "रवी" said...

प्रशंसा के लिए शुक्रिया अमृताजी!!!

Rajput said...

बहुत सुन्दर

रविंद्र "रवी" said...

Thanks Rajputji!

zahirul said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Prabodh Kumar Govil said...

zindgi to pani ke rang kee hai, baki rang to apni aankhon men hain, zindgi ko berang mat hone deejiye...dekhiye,fir se dekhiye, ek baar aur dekhiye... baar-baar dekhiye, dekhte rahiye... ye satrangi hi hai.

रविंद्र "रवी" said...

आपकी बात बिलकुल सही है गोविल साहब, जिंदगी पानी के रंग की होती है. लेकिन हर पल परिस्थितिय जो रंग बदलती है और जिंदगी का रंग बदल डालती उसका क्या करे?

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर

रविंद्र "रवी" said...

संजयजी, आभार!

Anonymous said...

bhaut sundar