November 16, 2011

आशा की किरण

एक आशा की किरण 
जिसके सहारे
संभाल कर रखे हुए हूँ 
एक फूल गुलाब का,
कोई तो आएगा 
शायद
कभी- न- कभी 
मेरे सुख-दुखों 
का साथी
मेरा हमसफर 
मेरा हमराही.

(६/१२/१९८७ को लिखी मेरी एक और कविता)

5 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या कहने, बहुत सुंदर

***Punam*** said...

ati sundar....!!
komal-komal pyaara sa ehsaas

Rravindra Ravi said...

बहुत बहुत धन्यवाद पुनमजी!!!!!!

Rravindra Ravi said...

तहेदिल से शुक्रिया महेन्द्रजी

Sandeep Bhardwaj said...

Jajbat kafi khubsurat hain aapke................