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February 9, 2012

Incredible INDIA

Best ever PPT I got from authorstream.

January 26, 2012

२६ जनवरी २०१२- प्रजातंत्र दिवस

सभी दोस्तो को २६ जनवरी २०१२- प्रजातंत्र दिवस कि शुभ कामनाये!!!!!!!!!!!!!

January 2, 2012

हर साल बस यु ही होता है..................

हर साल बस यु ही होता है,
पुराना साल जाता है,
और
नया  साल आता है,
हम बस वही रह जाते है
जाते  हूये को ताकते रहते है
और

आते हुये को भी ताकते ही रहते है,
कुछ भी तो नही कर पाते है,
अजी हर साल कसमे खाते है
पर सिगारेट की लत है की  
छोड नही पाते है........
 

January 1, 2012

साल मुबारक!!!!!!!!!


December 14, 2011

जिंदगी के तराने


जिंदगी के तराने बहुत है,
जिंदगी में अफसाने बहुत है.  
जिंदगी से घबराओ नहीं दोस्तों,
जिंदगी में मैखाने बहुत है,

December 12, 2011

जीवन का पथ

जीवन के पथ पर जो चलता जाता है,
बेधड़क, बेझिझक, बेखबर,
वही अंतिम पड़ाव तक पहुच पाता है  
बेधड़क, बेझिझक, बेखबर!


December 3, 2011

बेरंग

कभी कभी जिंदगी अपने ऐसे रंग दिखाती है की जिंदगी ही बेरंग हो जाती है.

November 23, 2011

काश जिंदगी...........

(दोस्तों जिंदगी इंसा कुछ इस कदर जीता है की उसे उसके मायने ही समझ नहीं आते. अभी अभी मुझे इस विषय पर एक कविता सूझी और उसे यहाँ आपकी खिदमत में पेश कर रहा हू. दि. २३/११/२०११))
काश जिंदगी खुशबू होती,
इंसा सारी जिंदगी
खुशबूदार जीवन व्यतीत करता.

काश जिंदगी आईना होती,

इंसा खुद को हर रोज
उसी आईने में निहारता
अपनी सारी बुराइया खुद जान जाता
और वक्त रहते उन्हें सुधार लेता,
लाखो करोडो के ख्वाब झूठे होते है
यह वक्त रहते खुद देख समझ पाता
और इत्मीनान से अपने परिवार के साथ
खुशहाल जिंदगी जी लेता
काश जिंदगी.............

November 16, 2011

आशा की किरण..

एक आशा की किरण 
जिसके सहारे
संभाल कर रखे हुए हूँ 
एक फूल गुलाब का,
कोई तो आएगा 
शायद
कभी- न- कभी 
मेरे सुख-दुखों 
का साथी
मेरा हमसफर 
मेरा हमराही.

(६/१२/१९८७ को लिखी मेरी एक और कविता)

November 14, 2011

खालीपन

एक हसीं लम्हा
जो 
लाया  था मेरे लिए
सारे जहाँ की खुशियाँ
अगले ही पल
खत्म हो गया
और
मुझे रोता बिलखता
छोड गया
इस अँधेरे जीवन में
जो
खालीपन से भरा है. 
( 6/12/1987 को लिखी मेरी एक कविता)

November 11, 2011

आ सेतू....: माझे आवडते ब्लॉग्स.

आ सेतू....: माझे आवडते ब्लॉग्स.: माझ्या मना
काय वाटेल ते........

October 26, 2011

दिवाली की शुभ कामनाये

सभी ब्लॉग मित्रो को दिवाली की शुभ कामनाये!!!!!

October 16, 2011

सबका दिल बस युही रोता है.............


मेरे दिल तू इतना गुमसुम क्यो है?
आंखे तेरी इतनी नम क्यो है?
तुझे कोई गहरा गम है?
तू न इतना घबरा, 
प्यार में यही होता है
सबका दिल बस युही रोता है.

September 30, 2011

हा हा हा!!!!!!!!!!!!!!!!!!

ये पुना शहर में किसी घर के बाहर लागी हुई हिदायत है. पढिये और मजा लिजिये. ( नेट से प्राप्त एक तस्वीर)

September 24, 2011

तलाश...

पथ अगम मेरा 
लक्ष्य अबोध है
नहीं है जो मंजिल मेरी 
उसी की तलाश में 
भटक रहा हु मै!!

एक बूंद प्यार की 
जो प्यास बुझाएगी मेरी
अज्ञात है जो 
उसी सुराही की तलाश में
भटक रहा हु मै!!

शांति मिले, छाया मिले
अपना कोई मिले मुझे 
जो न मालुम 
उसी वृक्ष की तलाश में 
भटक रहा हु मै!!

September 18, 2011

चांद जैसा चेहरा

आज निंद आंखो से कोसो दूर है. करवटे बदलते बदलते थक गया और अचानक मन बहक गया. फिर सुझी ये चंद लाईने. बिस्तर उठ सिद्ध कम्प्युटर पे आ गया और यहा आपकी खिदमत में ओ लाईने पेश करा रहा हु.  अभी रात के २ बज रहे है.
 

घनी जुल्फो से झांकता 
उनका चेहरा देख
 लगता है
जैसे 
चांदनी रात में 
घने बादलो के पीछे से 
चांद झांक रहा हो 

September 11, 2011

आंसू

तेरे गम में बह गया है 
  मेरा एक एक आंसू
नहीं अब कोई सितारा 
 जो चमक सके गगन में. 
-कतील शिकाई

August 13, 2011

रजनी पती

हे चांद,
किसके  गम में जिता ही तू 
क्यो जागता रहता है तू रात भर
कौन है वो बदनशिब
जिसने तुझे  भुला दिया है
जानता हु मै, 
तुझमे दाग है न,
तेरी खुबसुरती मे दाग है
पर क्या हुआ
हर एक पर दाग होता ही है
ऐसा है कोई जिस पर कोई दाग न हो?
कोई है जिसमे खोट न हो?
नही शायद नही
फिर क्यो ऐसा क्यो?
तेरी इतनी सी खोट का इतना बडा जुल्म
कितना गम मिला है तुझे?
फिर भी तु  खुश रहता है
रातो मे करवटे बदलता है
और अंत मे सो जाता है
एक दिन वो भी आता है
जब रात भर जागता है तु
कतल की रात होती वो
हे रजनी पती
अरे हा
कही वो बेवफा रजनी तो नही?
जो तुझे छोड गयी है!
हां, ऐसा ही लगता मुझे
हा वही है वो बेवफा
कितनी दुर चली गयी है वो
तु कहा आकाशलोक मे
वो कहा धरती पर
फिर दोनो का मिलन कैसे होगा?
असम्भव है यह
अब ऐसा नही होगा
तुम दोनो कभी नही मिलोगे
केवल ताकते रहोगे एक दुसरे को जोवन भर
तु वहा से देखना
रजनी यहा से देखेगी
तेरी दुनिया मे सब सो जाते है
तारे झिलमिलाते है
पर तु तब भी जागता रहता है
मुहब्बत के मारो पर हमेशा जुल्म होता है
बेचारो को गम के शिवा मिलता ही क्या है?
हे रजनीपती

(रविन्द्र रवि)


August 4, 2011

हम तुम................

मै बाहो मे था तुम्हारी
तुम मेरी बाहो मे थी
मै खोया था तुम मे
तुम मुझ मे खोयी थी 
उलझी हुई  लटे तुम्हारी 
सुलझा रहे थे मेरे हाथ
दिल दिमाग आंखे
सभी खामोश थे पाकर तुम्हारा साथ
मै सपनो मे तुम सपनो मे
मै तुम मे तुम थी मुझमे
खोये खोये थे आपस मे 
हम तुम.
( दोस्तो यह प्रेम कविता मैने ६/११/१९८० को लिखी)

July 28, 2011

मुझे इंतजार है.......

बस  अब  इंतजार ही तीन दोस्तो का. वो आ जाये और दोस्ती का हात बढाये तो मेरा शतक पुरा हो जाये. हम भी  अपने आप को धन्य समझने लगेंगे.

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे की मुझे किस का इंतजार है. यदि नहीं तो पहेली बुझा दू. अजी अब पुरे  ९७  फोलोअर्स हो चुके है. अब सिर्फ ३ आना बाकी है. तो दोस्तों चलिए दोस्ती के हाथ बढाइये.
मेरे  सभी चाहनेवालो का शुक्रगुजार हु. सभी को तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हु. इसी तरह हौसला बढ़ाते रहियेगा.