Digital Hindi Blogs



September 8, 2020

होमाफिस

दोस्तों इन दिनों हम जिंदगी के कुछ अजिब दौर से गुजर रहे है। ऐसा लगता है जैसे एक गहरी सुरंग से यह जिंदगी गुजर रही है। मार्च २०२० से कोरोना ने सारी  दुनिया में कहर कर रखा है. सारी  दुनिया ही इससे परेशान है. कोई इलाज नही, कोई भी दवाई नहीं ऐसी इस  अजीब बीमारी ने इस दुनिया को त्रस्त  कर के रखा है. पुर ५ महीने हो गए है. आगे भी कब तक यह बीमारी चलने वाली है कोई नहीं बोल सकता.
लेकिन एक बात ध्यान देने लायक है. इसमें आय.टी क्षेत्र के ही  ऐसे लोग है जिनको लोक डाउन और इस बीमारी का कोई खास असर नहीं पड़ा है. क्यों की सॉफ्टवेयर पर कही भी बैठकर काम किया जा सकता है. आपके पास बस एक लेपटॉप और इंटरनेट चाहिए। सफर में भी आप काम कर सकते है. इतना ही नहीं दुनिया के किसी भी कोने में आप हो तो भी आप काम कर सकते है. यही इस नौकरी की खाशियत है. इसलिए जब से लॉक डाउन हुआ है आय टी वाले घर बैठकर ही काम कर रहे है. घर जैसे ऑफिस हो गया हो. इसलिए मैंने घर को घर नहीं अब होमाफिश कहना बेहतर समझा है.
एक बात लेकिन खटकती है. घर में ऑफिस जैसी शांति का माहौल बनाना पड़ता है. क्योकि उन लोगो की ऑनलाइन मीटिंग होती रहती है. इसलिए घर में कोई आवाज नहीं कर सकता. ना गाना गाना . ना गुनगुनानाना. बस मुँह पर हाथ रख के चुपचाप बैठे रहना. टी व्ही नहीं, ना समाचार देखो ना सीरियल. इंसान करे तो क्या करे भाई? पागल ही होगा और क्या? कौन बोला भाई? अरे ये तो मेरा अपना दिल ही बोल रहा है.  इस मोबाईल बनानेवाले का तहेदिल से शु क्रिया अदा  करना चाहिए. अच्छा हुआ उसने यह अविष्कार दुनिया को दिया. काम से काम हम बूढ़े लोगो के काम तो आया. किताबे बहुत है घर में. लेकिन जब से स्मार्ट मोबाईल आया है तब से कोई भी किताब पढ़ना पसंद नहीं करता. अजी हाथ भी नहीं लगता कोई. चलो छोड़ो.
बच्चे जो आय टी में है एक कमरा अड़का के बैठ जाते है पूरा दिन. उस कमरे में दूसरे सभी को प्रवेश बंद रहता है . सिर्फ माँ को परमिशन रहती है. माँ चाय देना, माँ पानी देना, माँ खाना देना, फिर दोपहर की चाय फिर रात का खाना. और दिनभर बेचारे काम करा के थक जाते है इसलिए माँ रात में कोई काम नहीं बताती. बाप बेचारा पुरादिन काम करता रहता है. इस बुढ़ापे में लेकिन थकता नहीं. अजी थकता हो तो भी कौन सुननने वाला बाकि है इस दुनिया में..  एक माँ ही होती. जिसे अपना  दुखडा सूना पाते थे. वो भी चली गयी. अब बस अकेले ही बतियाते रहो. कोई सुनाने वाला बचा ही नहीं. घरवाली तो सुनाने से रही. बतियाने के लिए मुँह खोला नहीं की चल देती है. वो शब्द मुँह में ही अटक के रह जाते है. बेचारे. पैदा होने से पहले की मर जाते है.
अच्छा इस कोरोना से पहले किसी बहाने बाहर घूमने या कहे कुछ खरीदने निकल पड़ते थे. पर इस लोक डाउन ने नहीं नहीं इस कोरोना ने वो रास्ता भी बंद कर दिया है. और उसे देखो तो. वो खुले आम दुनिया में घूम रहा है. कोई रोकटोक नहीं. किस की हिम्मत है जो उस बन्दे को रोक सके. अजी उससे फासला जो बनाना होता है. यदि कोई नजदीक आ भी जाये तो वही कह देता है की "कॄपया सामाजिक दुरी बना के रखिये. सरकारी नियमो का पालन करिये." बेचारे सभी दूर भाग जाते है.
इस लॉक डाउन सब से बुरा असर किसी पर पड़ा है ऐसा बोले तो वो बूढ़ो  पर पड़ा है. क्यों की घर में २४ घंटे रहो तो घर वालो को बोझ लगते है. बहार निकालो तो कोरोना दबोचने के लिए तत्पर रहता है. बेचारे बूढ़े लोग जाए तो कहाँ  जाए.

August 29, 2020

दिल की गहराई

कौन कहता है गहराई सिर्फ समुंदर की होती है,
जरा दिल की गहराई में झाँक कर देखिए जनाब कई समुंदर समाए हुए मिलेंगे।।
मेरी रचना

August 3, 2020

हिंदी हमारी भाषा

हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा बडी गहन है। भावनाओं से ओतप्रोत। आपके मन मे जिस तरह के भाव चल रहे होते है बस उसी मिजास से शब्द आपके मुख से बाहर आते है। जैसे की आप बहुत घुस्से मे है तो आप अपने लाडले को बेटा कह कर नहीं बुलाओगे। उस समय वो भद्दा लगेगा। नहीं नहीं, भाई बेटा शब्द आपके मुख से निकलेगा ही नहीं। आप कहोगे ऐ छोकरे।
वैसे ही बेटे को पिताजी ने पैर मारा ऐसा कही कहा जाता है भला? उस समय लात मारी यही कहना उचित होता है और शोभा भी देता है।(पिताजी ने लात मारना यह पुराने जमाने की बात हो गयी अब।)

जब आप प्यार दुलार से बात करते हो तब आपके मुँह से बेटा जरा यहाँ आओ। ऐसे शब्द बाहर आयेंगे। उस समय ऐ छोकरे इधर आ ऐसा बिल्कुल भी नही कहोगे। 

वैसे ही पत्नी जब पती को लाड प्यार से आवाज देती है तो अजी जरा सुनो तो ऐसे कहेगी। लेकिन जब गुस्से मे हो तब .......

July 26, 2020

आर्ट ऑफ लाईफ

🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀
*प्रेम और आँसू की पहचान भले ही अलग अलग हो किन्तु दोनों का गोत्र एक ही है हृदय*
*उम्र का बढ़ना तो दस्तूरे-जहाँ है महसूस न करो तो बढ़ती कहां है उम्र को अगर हराना है तो शौक जिन्दा रखिए*
*घुटने चले या न चले मन उड़ता परिंदा रखिए मुश्किलों का आना 'Part of life' है और उनमें से हँस कर बाहर आना 'Art of life' है*
*🌹🥀🌹🥀🌹शुभ प्रभात 🌹🥀🌹🥀🌹*

July 11, 2020

सुंदरता...

(व्हाट्सएप पर एक बहुत ही सुंदर संदेश प्राप्त हुआ. आपके लिए शेअर कर रहा हुँ।
🌳🌴🗒️✒️ 
👌 *सुंदरता*🤝

एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है तो आप क्या करोगे ?

युवक ने कहा - उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे।

गुरु जी ने पूछा - वह लडकी आगे बढ गयी तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ?

लडके ने कहा - हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। (सभा में सभी हँस पडे)

गुरु जी ने फिर पूछा - जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ?

युवक ने कहा 5 - 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए।

गुरु जी ने उस युवक से कहा - अब जरा सोचिए, आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना।

आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए। उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं। घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं। आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई तो वे महानुभाव खुद बाहर आए। आप से पैकेट लिया। आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए। पास में बैठकर गरम खाना खिलाया। जाते समय आप से पूछा - किसमें आए हो ? आपने कहा- लोकल ट्रेन में। उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा और आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति महानुभाव का फोन आया - भैया, आप आराम से पहुँच गए।

अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे ?

युवक ने कहा - गुरु जी ! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते।

गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा
"यह है जीवन की हकीकत।"

*"सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है, पर हमारा सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है।"*

बस यही है जीवन का गुरु मंत्र:

*अपने चेहरे और शरीर की सुंदरता से ज़्यादा अपने व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दे, जीवन आनंददायक बन जाएगा।*🙏🌹🤝🇮🇳

July 7, 2020

खुबसुरती...

इज़हारे खुबसुरती उन्हे मंजूर नहीं
हम तो बस दिल के हालात बयाँ करते है।।

मेरी शायरी
रविंद्र "रवी" कोष्टी

July 2, 2020

नज़रिया

June 28, 2020

Stay home....

जिन्दगी खूबसूरत हैं
इसे बचाए ...

फिलहाल दुरियों से ही
इसे सजाए ...

Stay Home_Stay Safe

June 21, 2020

अपने अंदर झांकें कौन?

दोस्तों, व्हाट्सएप एक मायाजाल है। हरपल कुछ नया उभर कर आता है। कुछ नया ज्ञान दे जाता है। 
अभी हाल ही में एक बहुत सुंदर कविता प्राप्त हुई थी। कवी अज्ञात है। कोई नहीं जानता कौन है। लेकिन कविता सच्चाई बयाँ करती है। 
🙏👉
      झाँक रहे है इधर उधर सब।
              अपने अंदर झांकें  कौन ?
        ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ  में कमियां ।
             अपने मन में ताके कौन ?
       दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते ।
            खुद को आज सुधारे कौन ?
       पर उपदेश कुशल बहुतेरे ।
            खुद पर आज विचारे कौन ?
       हम सुधरें तो जग सुधरेगा
         यह सीधी बात स्वीकारे कौन?"
    
      शुभदिन

।। आपका दिन मंगलमय हो।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏

June 14, 2020

हासिल

पल

June 12, 2020

शब्द...

June 3, 2020

कर्म...

*करम की गठरी लाद के,*
              *जग में फिरे इंसान,!!*
*जैसा करे वैसा भरे,*
              *विधि का यही विधान,!!*
*करम करे क़िस्मत बने,*
               *जीवन का ये मर्म,!!*
*प्राणी तेरे भाग्य में,*
                *तेरा अपना कर्म!!*                                              
 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

May 30, 2020

जीने का सलिक़ा

May 26, 2020

सदियाँ

May 23, 2020

अनुभव

May 15, 2020

कुटुंब दिवस

May 13, 2020

जिंदगी

May 12, 2020

सलिक़ा

May 9, 2020

हसते रहीये जी...😊

✍🙏🏻
सुख और दुख हमारे
     परिवार के सदस्य नहीं है
"मेहमान" हैं!

     आएंगे, कुछ दिन ठहरेंगे
और चले जायेंगे,

😊हसते रहीये मस्त रहिए😊

   🍀🍃शुभ प्रभात🍃🍀

April 20, 2020

व्यक्तित्व

🙏🙏🙏

*"व्यक्तित्व" की भी*
*अपनी वाणी होती है,*
*जो "कलम"' या "जीभ"* 
*के इस्तेमाल के बिना भी,* 
*लोगों के "अंर्तमन" को छू जाती है..!!!*

      *सुप्रभात* 💐🌹

April 18, 2020

प्रभुकृपा

*प्रभुकृपा का अर्थ यह नहीं कि जीवन में कभी दुःख ही न आए।*

*दुःख में भी आप दुखी न हों वो घड़ी कब बीत जाए आप को पता ही न चले यही है  "प्रभुकृपा"।।*

*🌹।।good morning।।🌹*

April 2, 2020

बेबस इंसान

*इंसान दो मामलों में बेबस है;*
*"दुख" बेच नहीं सकता;...!!*
*"सुख"खरीद नहीं सकता;...!!*
         
*मुसीबतें रुई से भरे थैले की तरह होती हैं;*

*देखते रहेंगे तो बहुत भारी दिखेगी;*
*और उठा लेंगे तो!!* 
*एकदम हल्की हो जायेंगी..!!*

 *खुश रहिये मुस्कराते रहिए*

*🙏💐सुप्रभात💐🙏*

March 27, 2020

कोरोना का कहर...

दोस्तों, इस कोरोना ने सारी दुनिया को घर में बंद होने को मजबूर कर दिया है। आज सारी दुनिया ही अपने ही घर में कैद हो गयी है। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक खुली आँखों को न दिखाई देनेवाला वो भी निर्जीव कण सारी दुनिया को इस तरह तकलिफ मे ला सकता है। इस तरह की आपदा से निपटने के लिए कोई भी देश तैयारी में नहीं था। 

इंटरनेट से गुगल पर एक बहुत ही अच्छी इमेज मिली है। जिसमें धरती को मास्क पहनाया गया है। उसे भी शेअर कर रहा हुँ।

March 16, 2020

भाग्यशाली...

भाग्यशाली वह नहीं होते जिन्हें सब कुछ अच्छा मिलता है,
बल्कि वह होते हैं जिन्हें जो मिलता है
उसे वे अच्छा बना लेते हैं!                      

           *Good morning*
         🙏 *सुप्रभात* 🙏

March 14, 2020

चिंता और चिंतन

चिंता उलझाती है और
चिंतन सुलझाता है...

चिंता करोगे तो उलझ जाओगे
पर चिंतन करोगे तो
उलझे हुओं को भी समाधान
का रास्ता दिखा दोगे...!!
      शुभ प्रभात

March 9, 2020

होली शुभकामनाएँ

आप सभी को होली की शुभकामनाएँ

March 4, 2020

मीठे बोल...

“क्रोध” में बोला हुआ केवल एक “कठोर शब्द” इतना “जहरीला” बन सकता कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता है । इसलिए…,
कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो ।।
       🙏 सुप्रभात 🙏

March 1, 2020

प्रात: स्नेह वंदन्

प्रात: स्नेह वंदन्
-------------------------

प्रयत्न करने से कभी न चूकें..!
हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं,
विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं..!!

जो पानी में भीगेगा
वो सिर्फ लिबास बदल सकता है

लेकिन जो पसीने में भीगता है वो
इतिहास बदल सकता है.
    😊🙏🙏😊
(.व्हाट्सएप पर प्राप्त संदेश )

February 22, 2020

कोशिश...

कोशिशों का कद इतना बडा रखें
की तकदिर को भी अपना सर नीचा रखना पडे।
💐💐गुड मॉर्निंग💐💐

February 20, 2020

खुशियाँ

खुशियाँ तो बहुत आती है जिंदगी में
मगर 
हर खुशी तुम्हारा फता पुंछती है।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 18, 2020

वाह री जिंदगी..

बचपन में
कुछ भी नही था साथ
था तो बस हौसला,
डटे रहे
जिंदगी जिते रहे।
आज बुढापे में 
सब कुछ है
लेकिन 
जिने के लिए 
हौसला नहीं हैं।
हौसला अफ़ज़ाई करनेवाले 
तब भी नदारद थे
आज भी नदारद हैं।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 17, 2020

सलीक़ा...।

जिंदगी के हर लम्हें में 
खुशीयाँ छुपी होती है,
बस उन्हे जिने का
सलीक़ा चाहिए।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 10, 2020

खुबसूरत जिंदगी

जिंदगी तुम कितनी खुबसूरत हो,
ये तो हम है जिनकी नज़र मे़ खोट है।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 9, 2020

दोस्त....

दोस्त वों फुल होते है 
जिंदगी के पेड पर
जो कभी मुरझाते नहीं
हर वक्त जिंदगी में
खुशियाँ बाँटते हैं।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 7, 2020

जीवन का अर्थ...

सभी शब्दों का अर्थ मिल
       सकता है
                 परन्तु
जीवन का अर्थ
          जीवन जी कर
                   और
संबंध का अर्थ
संबंध निभाकर ही मिल
    सकता है ।
          

          🌹 शुभसंध्या🌹

February 3, 2020

सच्ची सोच...

जिस मनुष्य के हृदय में सच्ची मानवता हो उसकी सोच हमेशा यही होगी कि,

मुझे मिला हुआ दुःख किसी को  न मिले और
मुझे मिला हुआ सुख सबको मिले
      🙏🏻 🙏🏻सुप्रभात🌹🌹
🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿

February 1, 2020

रोशनी..

अगर आप किसी को
रोशनी दिखाने के लिए
दीपक जलाएंगे.
तो उजाला आपके
सामने भी होगा
  ‼ आपका दिन शुभ हो‼
           🙏 सुप्रभात 🙏

January 30, 2020

रिश्तें...।

रिश्ते निभाने के लिए बुद्धि नहीं,
दिल की शुद्धि होनी चाहिये..!!
सत्य कहो, स्पष्ट कहो, सम्मुख कहो,
जो अपना हुआ तो समझेगा,
जो पराया हुआ तो छुटेगा.!!
      🙏🏻🌹 सुप्रभात🌹🙏🏻
    आपका दिन शुभ हो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
रोज की तरह आज भी मैने सुबह सुबह संदेश फॉरवर्ड करना सुरु किया. इतने दोस्त और व्हाट्सएप ग्रुप है कि हर रोज तकरीबन आधा घंटा बित जाता है फॉरवर्ड करने में।ऐसे मे यह ध्यान ही नही रहता कि कब किसे संदेश फॉरवर्ड किया। काम खतम कर मै सुस्ता रहा था कि घरवाली आकर बडबडाने लगी। "आज का आपका संदेश बहुत ही सटिक है। जैसे व्यवहार करते हो उसे शोभा देता है।" 
मै सकपका गया,"अरे भागवान क्या हुआ? क्यो शोर मचा रही हो?" 
"रिश्ते निभाने के लिए बुद्धी नही..... वो तो आपके पास है नही! सही कहाँ न मैने!"
"जी बिलकुल सही कहा. वो क्या है कि हम परोपकारी लोग है. जब भगवान बुद्धी बाँट रहे थे तब मैने एक इंसान को लाईन के आखिर मे खडे देखा। थोडा पागल जैसा लग रहा था। मैने सोचा चलो इसकी सहायता कर दे। सो मैने मेरी जगह उसे दे दी और मै उसकी जगह चला गया। "
"तभी मै सोचू आप ऐसे क्यो है। " वो.
"लेकिन मैने अंदर की बात बताई ही नही।"मै.
" वो क्या?  " वो.
"मेरा नंबर आते आते बुद्धी खत्म होने को आयी थी। मुझे यह बात समझ आ गयी। इसलिए मैने यह परोपकार किया। " मै.
"अरे वा। आप तो बहुत समझदार थे।" वो.
"लेकिन तुमने वो कौन था ये नहीं पुछा।" मै
"जरूरत नही. लेकिन आप बता ही  दिजिए।" वो.
"अरे उसे मै तब थोडे ही पहचानता था। वो तो शादी के बाद पहचान हुई। तब पता चला वो तुम्हारा भाई था।" मै
"क्या????"वो
उनकी हालत देखने लायक थी।

January 29, 2020

भाग्यवान...


यात्रियों से भरी बस चली जा रहा थी, जब अचानक मौसम बदला और भारी बारिश चालू हो गयी और बिजली भी चारों तरफ चमकने लगी ।

सभी देख रहे थे कि बिजली कभी भी बस को चपेट में ले सकती है ।

रोशनी से बचने के 2 या 3 कठिन  प्रयास के बाद, चालक ने पेड़ से पचास फुट की दूरी पर बस बंद कर कहा -

"हमारे पास बस में कोई है जिसकी मृत्यु आज निश्चित है ।"

उस व्यक्ति की वजह से बाकी सब लोग आज भी मारे जाएंगे ।

अब ध्यान से सुनिये जो मैं कह रहा हूं ..
मैं चाहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति बस से उतर एक एक कर बाहर जाकर पेड़ के तने को स्पर्श करे और वापस आ जाए ।

"जिसकी मौत निश्चित है वह बिजली से पकड़ा जाएगा और मर जाएगा और बाकी सभी को बचा लिया जाएगा ।"

उसने पहले व्यक्ति को जाने और पेड़ को छूने और वापस आने के लिये कहा ।

वह अनिच्छा से बस से उतर गया और पेड़ को छुआ ।

उसका दिल प्रसन्न हो गया जब कुछ भी नहीं हुआ और वह अभी भी जीवित था ।

यही क्रम बाकी यात्रियों के लिए जारी रहा और उन सभी को राहत मिली जब वे पेड़ को छु कर लौटे और कुछ भी नहीं हुआ ।

लेकिन जब आखिरी यात्री की बारी आई, तो सभी उसे आँखों से घूरने लगे ।

वह यात्री बहुत डर गया और अनिच्छुक था क्योंकि वही केवल  अकेला बचा था ।

सभी ने उसे नीचे उतरने और जाने और पेड़ को छूने के लिए मजबूर किया ।

मृत्यु के 100% भय के साथ, अंतिम यात्री पेड़ के पास गया और उसे छुआ ।

उसी समय वहाँ गड़गड़ाहट की एक बड़ी आवाज़ गूँजी और बिजली ने बस को चपेट में ले लिया - हां, बिजली के चपेट में आने से बस के अंदर सभी मारे गये ।

इस घटना से यह स्पष्ट हो गया   ( मानना पडेगा ) कि पूरी बस इस आखिरी यात्री की उपस्थिति के कारण सुरक्षित थी ।

कई बार, हम अपनी वर्तमान उपलब्धियों के लिए स्वयं श्रेय लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि यह हमारे साथ जूडे एक व्यक्ति के कारण है । शायद उस व्यक्ति की वजह से हम अपनी वर्तमान खुशी, सम्मान, प्रेम, नाम, प्रसिद्धि, वित्तीय सहायता, शक्ति, स्थिति................का आनंद ले रहे हैं ।

अपने चारों ओर देखिए - शायद आपके माता-पिता, आपके पति या पत्नी, आपके बच्चे, आपके भाई-बहन, आपके मित्र आदि के रूप में आपके आस-पास कोई है, जो आपको नुकसान से बचा रहे हैं ..!

इसके बारे में सोचिये .. और उस आत्मा को धन्यवाद दें...।
(व्हाट्सएप से प्राप्त संदेश)

January 22, 2020

सफल जीवन...

सफल जीवन के चार
           सुत्र•••
मेहनत करे तो धन बने,
 सबर करे तो काम•••••
मीठा बोले तो पहचान बने,
               और
इज्जत करे तो नाम•••
.          💐💐शुभ रात्री💐💐

January 19, 2020

सफलता...

हर प्रयत्न में सफलता
शायद न मिल पाए
          लेकिन
हर सफलता का कारण
प्रयत्न ही होता है !!

🌹सुमधुर प्रभात 🌹

January 17, 2020

हमारा बचपन....

किस महानुभव ने यह व्हाट्सएप पोस्ट लिखी है, यह तो पता नहीं. लेकिन यथार्थ परिपूर्ण है. तबके जीवन की सच्चाई से ओतप्रोत मन लुभावन यह पोस्ट हम उम्र साथियों को जरूर पसंद आयेगी। अपनी प्रतिक्रिया देना न भुलना।

पाँचवी तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे... 
स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी इस पापबोध के साथ कि विद्यामाता नाराज न हो जायें,
कक्षा के तनाव में पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर ही हमनें तनाव मिटाया था।
स्कूल में टाट-पट्टी की अनुपलब्धता में घर से बोरी का टुकड़ा बैठने के लिए बगल में दबा कर भी साथ ले जाते थे !
कक्षा छः में पहली दफा हमने अंग्रेजी का ऐल्फाबेट पढ़ा और पहली बार एबीसीडी देखी 
स्मॉल लेटर में बढ़िया एफ बनाना हमें बारहवीं तक भी न आया था !
करसीव राइटिंग भी कॉलेज में जाकर ही सीख पाये !
उस जमाने के हम बच्चों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी,
कपड़े के थैले में किताब और कापियाँ जमाने का विन्यास हमारा अधिकतम रचनात्मक कौशल था !
तख्ती पोतने की तन्मयता हमारी एक किस्म की साधना ही थी ! हर साल जब नई कक्षा के बस्ते बंधते (नई काॅपी-किताबें मिलती) तब उन पर जिल्द चढ़ाना हमारे जीवन का स्थाई उत्सव था !
सफेद शर्ट और खाकी पेंट में जब हम माध्यमिक कक्षा पहुँचे तो पहली दफा खुद के कुछ बड़े होने का अहसास तो हुआ लेकिन पेंट पहन कर हम शर्मा रहे थे, मन कर रहा था कि वापस निकर पहन लें ! 
साईकिल से रोज़ सुबह कतार बना कर चलना और साईकिल की रेस लगाना हमारे जीवन की अधिकतम प्रतिस्पर्धा थी !
हर तीसरे दिन पम्प को बड़ी युक्ति से दोनों टांगो के मध्य फंसाकर साईकिल में हवा भरते मगर फिर भी खुद की पेंट को हम काली होने से बचा न पाते थे !
स्कूल में पिटते, कान पकड़ कर मुर्गा बनते मगर हमारा ईगो हमें कभी परेशान न करता.. हम उस जमाने के बच्चे शायद तब तक जानते नही थे कि #ईगो होता क्या है!
क्लास की पिटाई का रंज अगले घंटे तक काफूर हो जाता, और हम अपने पूरे खिलंदड़ेपन से हंसते पाए जाते !
रोज़ सुबह प्रार्थना के समय पीटी के दौरान एक हाथ फासला लेना होता, मगर फिर भी धक्का मुक्की में अड़ते भिड़ते सावधान विश्राम करते रहते !
हम उस जमाने के बच्चे सपनें देखने का सलीका नही सीख पाते थे, अपनें माँ बाप को भी ये कभी नही बता पाते थे कि हम उन्हें कितना प्यार करते हैं, क्योंकि "आई लव यू माॅम-डेडी" नहीं आता था !
हम उस जमाने  से निकले बच्चे गिरते सम्भलते लड़ते भिड़ते दुनियां का हिस्सा बने हैं ! कुछ मंजिल पा गये हैं तो कुछ यूं ही खो गए हैं !
पढ़ाई फिर नौकरी के सिलसिले में लाख शहर में रहें लेकिन जमीनी हकीकत जीवनपर्यन्त हमारा पीछा करती रहती रहती है. 
अपने कपड़ों को सिलवट से बचाए रखना और रिश्तों को अनौपचारिकता से बचाए रखना हमें नहीं आता है !
अपने अपने हिस्से का निर्वासन झेलते हम बुनते है कुछ आधे अधूरे से ख़्वाब और फिर जिद की हद तक उन्हें पूरा करने का जुटा लाते है आत्मविश्वास !
कितने भी बड़े क्यूँ न हो जायें हम आज भी दोहरा चरित्र नहीं जी पाते हैं, जैसे बाहर दिखते हैं, वैसे ही अन्दर से होते हैं !
हम थोड़े अलग नहीं, पूरे अलग होते हैं !
कह नहीं सकते हम बुरे थे या अच्छे थे,....यही एक पीढ़ी है जिसने जीवन जिया है। इसके बाद की पीढ़ी जीवन के अर्थ को समझ नहीं पाएगी । तब *के जीवन* और *के.जी.वन* में यह अंतर हमेशा बना रहेगा। 🙏

हमारा बचपन 
😢😢😢😢😢
हमारा बचपन

January 15, 2020

जीवन की सार्थकता

✍🏻वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए !                            
         वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता  है। जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर, क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है !

    🌹 Good Morning🌺

January 14, 2020

जिंदगी का खेल

"खो" देते हैं,
               फिर...
       "खोजा" करते हैं,
         यही खेल हम
          जिन्दगी भर
        "खेला" करते हैं. . .
        🌹सुप्रभात🌹
                                                     ​

January 12, 2020

संस्कार...

धन को एकत्रित करना सहज हैं 
                            लेकिन
                  संस्कारों को एकत्रित
                      करना कठिन हैं !
             धन को तो लूटा जा सकता हैं,
                            लेकिन
                संस्कारों के लिए समर्पित
                      होना पड़ता है।
                 
                          💐💐शुभ प्रभात💐💐

January 11, 2020

ऐ राही.....

👉 चलते रहे कदम तो
               किनारा जरुर मिलेगा
अन्धकार से लड़ते रहे
           तो सवेरा जरुर खिलेगा
जब ठान लिया मंजिल पर जाना
           तो रास्ता जरुर मिलेगा
ए राही न थक, आगे चल
          एक दिन समय जरुर फिरेगा
               🙏🏻💐🙏🏻

January 10, 2020

पक्के धागे...

*"सफलता" भी फीकी लगती है, यदि कोई "बधाई देने वाला" नहीं हो।*
*और "विफलता" भी सुन्दर लगती है, जब आपके साथ "कोई अपना खड़ा" हो।*

    *ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं*
                   *और*
   *ना पास रहने से जुड़ जाते हैं*
*यह तो एहसास के पक्के धागे है*
                   *जो*
             *याद करने से*
     *और मज़बूत हो जाते है।*
                 🌹*सुप्रभात्* 🌹

January 9, 2020

यादें

🙏🙏🙏

कोशिश करो कि ज़िन्दगी का 
हर लम्हा अच्छे से अच्छा गुजरे;

क्योंकि जिंदगी नहीं रहती 
पर अच्छी यादें हमेशा जिंदा रहती हैं।

                        *सुप्रभात* 💐🌹   

January 8, 2020

सुख

जिन्हें आप खुश देखना चाहते हो उन्हें यही पर सुख देना

क्योंकि ताजमहल दुनिया ने देखा है मुमताज ने नही 
    जय श्री कृष्णा     🙏 सुप्रभात 🙏

January 7, 2020

संस्कार

✍✍

पूरी दुनिया जीत सकते है,
संस्कार से...!
और..,
जीता हुआ भी हार जाते है,
अहंकार से...!!  
       
    💞💞शुभ सकाळ💞💞

January 6, 2020

19 उंटों की कहानी

19 उंटों की कहानी
मजाक में मत लेना जी

🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪🐪

एक गाँव में एक व्यक्ति के पास 19 उंट थे। 

एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी। 

मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी। जिसमें लिखा था कि:

मेरे 19 उंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 उंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 उंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे नौकर को दे दिए जाएँ।

सब लोग चक्कर में पड़ गए कि ये बँटवारा कैसे हो ?

19 ऊंटों का आधा अर्थात एक ऊँट काटना पड़ेगा, फिर तो ऊँट ही मर जायेगा। चलो एक को काट दिया तो बचे 18 उनका एक चौथाई साढ़े चार- साढ़े चार. फिर?

सब बड़ी उलझन में थे। फिर पड़ोस के गांव से एक बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया गया।

वह बुद्धिमान व्यक्ति अपने ऊँट पर चढ़ कर आया, समस्या सुनी, थोडा दिमाग लगाया, फिर बोला इन 19 ऊंटों में मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो।

सबने सोचा कि एक तो मरने वाला पागल था, जो ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया जो बोलता है कि उनमें मेरा भी ऊँट मिलाकर बाँट दो। फिर भी सब ने सोचा बात मान लेने में क्या हर्ज है।

19+1=20 हुए।

20 का आधा 10, बेटे को दे दिए।

20 का चौथाई 5, बेटी को दे दिए।

20 का पांचवाँ हिस्सा 4, नौकर को दे दिए।

10+5+4=19 

बच गया एक ऊँट, जो बुद्धिमान व्यक्ति का था...

वो उसे लेकर अपने गॉंव लौट गया।

इस तरह 1 उंट मिलाने से, बाकी 19 उंटो का बंटवारा सुख, शांति, संतोष व आनंद से हो गया।

सो हम सब के जीवन में भी 19 ऊंट होते हैं।

5 ज्ञानेंद्रियाँ
(आँख, नाक, जीभ, कान, त्वचा)

5 कर्मेन्द्रियाँ
(हाथ, पैर, जीभ, मूत्र द्वार, मलद्वार)

5 प्राण
(प्राण, अपान, समान, व्यान, उदान)

और

4 अंतःकरण
(मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार)

कुल 19 ऊँट होते हैं। 

सारा जीवन मनुष्य इन्हीं 19 ऊँटो के बँटवारे में उलझा रहता है।

और जब तक उसमें *मित्र* रूपी ऊँट नहीं मिलाया जाता यानी के दोस्तों के साथ.... सगे-संबंधियों के साथ जीवन नहीं जिया जाता, तब तक सुख, शांति, संतोष व आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती।

यह है 19 ऊंट की कहानी...😌🙏🏽

January 3, 2020

किस्मत

किस्मत की एक आदत है 
कि वो पलटती जरुर है 
और जब पलटती है 
तब सब कुछ पलटकर रख देती है 
इसलिए अच्छे दिनों मे अहंकार न करें 
और खराब समय में थोड़ा सब्र करें 

    🙏🏻🙏🏻सुप्रभात🙏🏻🙏🏻

January 2, 2020

आत्मविश्वास

आत्मविश्वास हमारा सबसे बेहतरीन साथी है,
             बिना इसके घर से ना निकलें..।
अनिवार्य नहीं है कि इससे सफलता मिलेगी...

             लेकिन

चुनौतियों का सामना करने की शक्ति अवश्य मिलेगी...!

🙏☘🌹 सुप्रभात 🌹☘🙏

January 1, 2020

बिते वर्ष......स्वागत २०२०

बिते वर्ष पग पग चलते हर राही का मुझको स्नेह मिला,

हर पल हर पल न थम चलती सांसों से भी मुझको स्नेह मिला,

राहों में मिलते सुख दुख ने भी मनभर मुझको स्नेह दिया,

हर राह पर मित्रों ने भी मुझको परम स्नेह

वितरित किया

बस रह गया इतना ही मुझसे मैने न उनको धन्यवाद दिया,

आज इस वर्ष समाप्ती की और नव वर्ष आगमन की बेला पर,

मेरा हर राही, मेरी सांसों तुमको,

सुख दुख और मित्रों तुमको भी

दिल की गहराईयों से धन्यवाद।

नववर्ष में भी तुम सब मेरे साथी होंगे

जब थक जाऊँ चलते चलते

बतियाने को तुम संग संग होंगे

यहीं कामनाएँ है मेरी 

वादा निभाने की है अब तुम्हारी बारी

नववर्ष की सब को शुभ कामनाएँ प्यार भरी।
रविंद्र "रवि" कोष्टी
(मेरी रचना)

December 31, 2019

मस्त है जिंदगी

खुश रहकर गुजारो,
       तो मस्त है जिदंगी,
दुखी रहकर गुजारो,
       तो त्रस्त है जिंदगी,
तुलना में गुजारो,
       तो पस्त है जिंदगी,
इतंजार में गुजारो,
       तो सुस्त है जिंदगी,
सीखने में गुजारो,
      तो किताब है जिंदगी,
दिखावे में गुजारो,
       तो बर्बाद है   जिदंगी,
मिलती है एक बार,
      प्यार से बिताओ जिदंगी,
जन्म तो रोज होते हैं,
     यादगार बनाओ जिंदगी!!
🌹🙏 सुप्रभात 🙏🌹
(व्हाट्सएप से प्राप्त एक अज्ञात कवि की सुंदर रचना)

December 28, 2019

कर्म....

कर्म वह फ़सल है जिसे हर इंसान को हर हाल में काटना ही पड़ता है....,

इसलिए, हमेशा अच्छे बीज बोएं, ताकि फ़सल अच्छी हो......।।
              

🙏🏻🌹सुप्रभात।🌹🙏🏻

December 27, 2019

अहंकार

✒✒ . .... अहंकार. में तिनों गए धन,वैभव और वंश , यकीन ना आये तो देख लो रावण,कौरव और कंस . ....     🌹शुभ सकाळ 🙏🏻🌹

December 26, 2019

रिश्ते

आँसूओं के प्रतिबिंब गिरे,
        ऐसे दर्पण अब कहाँ ?

बिना कहे सब कुछ समझे,
       वैसे रिश्ते अब कहाँ ?

  🌻🌻सुप्रभात🌻🌻

December 25, 2019

उम्मिद...

उम्मिदों के गुब्बारे से लटकता जिद्दी और जिंदगी जी रहा एक जिंदा इंसान हुँ मैं
कब उम्मिदों का गुब्बारा फट जाएँ
और जमीं पर ला पटक घायल कर दें पता नहीं।
रचनाकार: रवींद्र "रवी" कोष्टी

December 23, 2019

हेप्पी सर्दी

सर्दियों में रोज़ अपने स्वास्थ को बेहतर बनाने पर ध्यान दें
ध्यान देने के तरीके🤔🤔🤔
सुबह जल्दी 10 बजे उठ जायें☀🔥
Bathroom तक पैदल चलें 🏃
नाश्ते में मक्खन ब्रेड 🍞🧀 कचौरी और 
🍭जलेबी खाने के बाद एक लोटा चाय लें
इतना करने के बाद थकान होना लाजमी है,
इसलिए 2 घंटा सो लें..! 
अरे सोते ही रहेंगे क्या 😋 लंच नहीँ करना.
हाँ तो लंच मैं दाल-चावल, रोटी, दही, 
सलाद, पापड़, चटनी, अचार और कुछ मीठा लें..!
लंच के बाद थोड़ी देर सो जायें 😴😴💤 (लगभग 3 घंटा)
अधिक देर न सोये नहीँ तो 
शाम के चाय ☕कचोरी का समय निकल जायेगा.
अब डिनर मैं कुछ हल्का लें जैसे 
दाल मक्खनी कड़ाई, पनीर दम आलू और 
बटर नान 🍪with एक्सट्रा मक्खन
रात के खाने के बाद टहलना बहुत ही 
ज़रूरी है इसलिए अपने बेड का एक चक्कर लगाये 
और कम्बल ओढ़ कर सो जाए..! सेहत एकदम चकाचक रहेगी, वजन थोड़ासा 
ज्यादा हो जाये तो चिंता ना करें,
आखिर सर्दी साल में एक बार ही तो आती है।😎
☕Happy सर्दी
 🎅🏻ऐसा करने से बहुत ज्यादा स्वास्थ्य लाभ मिलेगा

December 22, 2019

खुश रहो...

यह मत पूछना कि जिंदगी खुशी कब देती है।
क्योंकि शिकायत तो उन्हें भी है, जिन्हें जिंदगी सब कुछ देती है। 
खुश रहो और आनंद लो हर दिन का...
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
💐💐💐सुप्रभात💐💐💐
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

December 21, 2019

मानवीय गलती

मानव संबंधो में सबसे बड़ी ग़लती-हम आधा सुनते हैं,चौथाई समझते हैं,शून्य सोचते हैं..लेकिन
प्रतिक्रिया दुगुनी करते हैं...  🙏

December 20, 2019

फैसले....

✍मान लेते हैं कि,
किस्मत में लिखे फैसले
बदला नहीं करते.
लेकिन
आप फैसले तो लीजिये,
क्या पता,
किस्मत ही बदल जाए..
        🙏 Good Morning 🙏

December 19, 2019

धन और संस्कार

धन को एकत्रित करना सहज हैं !
                            लेकिन
                  संस्कारों को एकत्रित
                      करना कठिन हैं !
             धन को तो लूटा जा सकता हैं,
                            लेकिन
                संस्कारों के लिए समर्पित
                      होना पड़ता है।
                 
                          शुभ प्रभात💐💐

December 18, 2019

फैसला

एक निवाला पेट तक पहुंचाने का भगवान ने क्या खूब इंतजाम किया है,
अगर गर्म है तो हाथ बता देते हैं,
सख्त है तो दांत बता देते हैं,
कड़वा या तीखा है तो जुबान बता देती है,
बासी है तो नाक बता देती है,
बस मेहनत का है या बेईमानी का,
इसका फैसला आपको करना है ।
    
     🙏🏻🙏🏻सुप्रभात🙏🏻🙏🏻

December 17, 2019

सच्ची मानवता

जिस मनुष्य के हृदय में"सच्ची मानवता हो उसकी सोच हमेशा यही होगी कि ,

मुझे मिला हुआ दुःख किसी को नही मिले और
मुझे मिला हुआ सुख सबको मिले

🌹🌹🌹      सुप्रभात          🌹🌹🌹🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿
www.ownpoems.wordpress.com
🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿

December 16, 2019

प्रशंसा और निंदा

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

कोई सराहना करे या
       निंदा
लाभ आपका ही है
          कारण ...
प्रशंसा प्रेरणा देती है
         और निंदा
सुधरने का अवसर ... !!!

                🙏सुप्रभात🙏

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

December 15, 2019

अच्छा वक्त...

🙏आज का सुविचार🙏
अच्छा वक़्त सिर्फ उसी का   होता है,​.
जो कभी किसी का बुरा नहीं सोचते !!​
सुख दुख तो अतिथि है,​.
.   बारी बारी से आयेंगे चले जायेंगे..​
यदि वो नहीं आयेंगे तो हम​
       ​अनुभव कहां से लायेंगे।​
जिन्दगी को खुश रहकर जिओ
क्योकि रोज शाम सिर्फ सूरज ही नही ढलता आपकी अनमोल जिन्दगी भी ढलती है
     🙏🏻 सुप्रभात🙏🏼

December 14, 2019

प्रयत्न करें...

🌷🌸Good morning🌸🌷
🌹प्रयत्न करने से कभी न चूकें..!
           हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं,
           विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं..!!🌹
🌹 जो पानी में भीगेगा
वो सिर्फ लिबास बदल सकता है
लेकिन जो पसीने में भीगता है वो
इतिहास बदल सकता है.🌹
 
🌹🌴🍀सुप्रभात🍀🌴🌹
🌿आप का दिन शुभ हो🌿

December 13, 2019

बस आज है ज़िन्दगी....

पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
उड़ जाएंगे एक दिन...
तस्वीर से रंगों की तरह!

हम वक्त की टहनी पर...
बैठे हैं परिंदों की तरह !!

ना राज़ है... “ज़िन्दगी”
ना नाराज़ है... “ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है... “ज़िन्दगी”
 
🙏🏻💐 शुभ प्रभात 💐🙏🏻

December 12, 2019

बिन माँगे सब मिल जायेगा !

🌷🕊🦢☀🦢🕊🌷
प्रभु कहते है....!!
होती आरती, बजते शंख,
पूजा में सब खोए है,
मंदिर के बाहर तो देखो,
भूखे बच्चे सोए है |
एक निवाला इनको देना,
प्रसाद मुझे चढ जायेगा,
मेरे दर पर माँगने वाले,
तुझे बिन माँगे सब मिल जायेगा !
🌷राधे राधे जी🙏
(एक व्हाट्सएप संदेश)

December 11, 2019

मत कहना, हम ओल्ड हो गये!

(व्हाट्सएपपर प्राप्त एक कविता   )

मत कहना, हम ओल्ड हो गये!
हम तो तपकर गोल्ड हो गये।

जीवन के झंझावातों  से
लड़ना, हमने मिलकर सीखा,
कैसे-कैसे मोड़  से  गुजरे,
आगे बढ़ना हमने सीखा।

अनुभवों का अब साथ  समंदर,
है न अब, चुनौती का डर.
जो आयेगा, टल जायेगा,
हम तो भाई, बोल्ड हो गये।

अब जीवन के नये रंग हैं,
नयी पीढ़ी के नये ढंग हैं.
पर बच्चों का, अपनों का भी,
प्यारा-प्यारा संग, संग है।

जीवन की यह सांझ सुनहरी,
ढल गई वह बीती दोपहरी.
नयी हैं राहें, नयी निगाहें,
करने को मन कुछ खुद  चाहे.
खुलकर जी लें, खुलकर हँस लें.
बस जीवन यह कहना चाहे।

सचमुच हम तो बोल्ड हो  गये.

मत कहना हम ओल्ड हो गये!
हम तो तपकर गोल्ड हो गये।

December 10, 2019

परेशाँ जिंदगी..

जिंदगी ने  कुछ इस तरह
परेशाँ कर दिया हमें
न सुख से जी सकते है
न चैन से मर सकते हैं।

December 9, 2019

खुशियाँ बाँट रहे हैं......

🌻🌼🌞🌞🌼🌻🌻🌼🌞🌞🌼🌻
             🙏🙏 सुप्रभात🙏🙏
🌻🌼🌞🌞🌼🌻🌻🌼🌞🌞🌼🌻
खुशियाँ बटोरते बटोरते उम्र गुजर गई 
लेकिन खुश न हो सके... 

एक दिन अहसास हुआ कि 
खुश तो वे लोग हैं 
जो खुशियाँ बाँट रहे हैं।
🌻🌼🌞🌞🌼🌻🌻🌼🌞🌞🌼🌻
🙏 सुप्रभात 🙏
🌻🌼🌞🌞🌼🌻🌻🌼🌞🌞🌼🌻

December 8, 2019

आत्म मूल्यांकन...

आत्म मूल्यांकन

एक बार एक व्यक्ति कुछ पैसे निकलवाने के लिए बैंक में गया। जैसे ही कैशियर ने पेमेंट दी कस्टमर ने चुपचाप उसे अपने बैग में रखा और चल दिया। उसने एक लाख चालीस हज़ार रुपए निकलवाए थे। उसे पता था कि कैशियर ने ग़लती से एक लाख चालीस हज़ार रुपए देने के बजाय एक लाख साठ हज़ार रुपए उसे दे दिए हैं लेकिन उसने ये आभास कराते हुए कि उसने पैसे गिने ही नहीं और कैशियर की ईमानदारी पर उसे पूरा भरोसा है चुपचाप पैसे रख लिए।

इसमें उसका कोई दोष था या नहीं लेकिन पैसे बैग में रखते ही 20,000 अतिरिक्त रुपयों को लेकर उसके मन में  उधेड़ -बुन शुरू हो गई। एक बार उसके मन में आया कि फालतू पैसे वापस लौटा दे लेकिन दूसरे ही पल उसने सोचा कि जब मैं ग़लती से किसी को अधिक पेमेंट कर देता हूँ तो मुझे कौन लौटाने आता है???

बार-बार मन में आया कि पैसे लौटा दे लेकिन हर बार दिमाग कोई न कोई बहाना या कोई न कोई वजह दे देता पैसे न लौटाने की।

लेकिन इंसान के अन्दर सिर्फ दिमाग ही तो नहीं होता… दिल और अंतरात्मा भी तो होती है… रह-रह कर उसके अंदर से आवाज़ आ रही थी कि तुम किसी की ग़लती से फ़ायदा उठाने से नहीं चूकते और ऊपर से बेईमान न होने का ढोंग भी करते हो। क्या यही ईमानदारी है?

उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। अचानक ही उसने बैग में से बीस हज़ार रुपए निकाले और जेब में डालकर बैंक की ओर चल दिया।

उसकी बेचैनी और तनाव कम होने लगा था। वह हल्का और स्वस्थ अनुभव कर रहा था। वह कोई बीमार थोड़े ही था लेकिन उसे लग रहा था जैसे उसे किसी बीमारी से मुक्ति मिल गई हो। उसके चेहरे पर किसी जंग को जीतने जैसी प्रसन्नता व्याप्त थी।

रुपए पाकर कैशियर ने चैन की सांस ली। उसने कस्टमर को अपनी जेब से हज़ार रुपए  निकालकर उसे देते हुए कहा, ‘‘भाई साहब आपका बहुत-बहुत आभार! आज मेरी तरफ से बच्चों के लिए मिठाई ले जाना। प्लीज़ मना मत करना।”

‘‘भाई आभारी तो मैं हूँ आपका और आज मिठाई भी मैं ही आप सबको खिलाऊँगा, ’’ कस्टमर ने बोला।

कैशियर ने पूछा, ‘‘ भाई आप किस बात का आभार प्रकट कर रहे हो और किस ख़ुशी में मिठाई खिला रहे हो?’’

कस्टमर ने जवाब दिया,  ‘‘आभार इस बात का कि बीस हज़ार के चक्कर ने मुझे आत्म-मूल्यांकन का अवसर प्रदान किया। आपसे ये ग़लती न होती तो न तो मैं द्वंद्व में फँसता और न ही उससे निकल कर अपनी लोभवृत्ति पर क़ाबू पाता। यह बहुत मुश्किल काम था। घंटों के द्वंद्व के बाद ही मैं जीत पाया। इस दुर्लभ अवसर के लिए आपका आभार।”

मित्रों, कहाँ तो वो लोग हैं जो अपनी ईमानदारी का पुरस्कार और प्रशंसा पाने का अवसर नही चूकते और कहाँ वो जो औरों को पुरस्कृत करते हैं। ईमानदारी का कोई पुरस्कार नहीं होता अपितु ईमानदारी स्वयं में एक बहुत बड़ा पुरस्कार है। अपने लोभ पर क़ाबू पाना कोई सामान्य बात नहीं। ऐसे अवसर भी जीवन में सौभाग्य से ही मिलते हैं अतः उन्हें गंवाना नहीं चाहिए अपितु उनका उत्सव मनाना चाहिए।

December 7, 2019

भगवान पर भरोसा

व्हाट्सएप ग्रुप से प्राप्त बेहतरीन संदेश..
🙏🏻 भगवान पर भरोसा :

एक पुरानी सी इमारत में था वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो।

एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला। गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक सामान वाली चिट्ठी खोली तो वह चिठ्ठी को एकटक देखते ही रह गए। एक बार तो उनका मन भटक गया। उन्हें अपनी आँखों के सामने तारे चमकते हुए नज़र आए किन्तु शीघ्र ही उन्होंने अपनी तंत्रिकाओं पर नियंत्रण पा लिया। आटे-दाल-चावल आदि के बाद पत्नी ने लिखा था, *"बेटी का विवाह 20 तारीख़ को है, उसके दहेज का सामान।"* कुछ देर सोचते रहे फिर बाकी चीजों की क़ीमत लिखने के बाद दहेज के सामने लिखा, '' *यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।*''

एक-दो रोगी आए थे। उन्हें वैद्यजी दवाई दे रहे थे। इसी दौरान एक बड़ी सी कार उनके दवाखाने के सामने आकर रुकी। वैद्यजी ने कोई खास तवज्जो नहीं दी क्योंकि कई कारों वाले उनके पास आते रहते थे। दोनों मरीज दवाई लेकर चले गए। वह सूटेड-बूटेड साहब कार से बाहर निकले और नमस्ते करके बेंच पर बैठ गए। वैद्यजी ने कहा कि अगर आपको अपने लिए दवा लेनी है तो इधर स्टूल पर आएँ ताकि आपकी नाड़ी देख लूँ और अगर किसी रोगी की दवाई लेकर जाना है तो बीमारी की स्थिति का वर्णन करें। 

वह साहब कहने लगे "वैद्यजी! आपने मुझे पहचाना नहीं। मेरा नाम कृष्णलाल है लेकिन आप मुझे पहचान भी कैसे सकते हैं? क्योंकि मैं 15-16 साल बाद आपके दवाखाने पर आया हूँ। आप को पिछली मुलाकात का हाल सुनाता हूँ, फिर आपको सारी बात याद आ जाएगी। जब मैं पहली बार यहाँ आया था तो मैं खुद नहीं आया था अपितु ईश्वर मुझे आप के पास ले आया था क्योंकि ईश्वर ने मुझ पर कृपा की थी और वह मेरा घर आबाद करना चाहता था। हुआ इस तरह था कि मैं कार से अपने पैतृक घर जा रहा था। बिल्कुल आपके दवाखाने के सामने हमारी कार पंक्चर हो गई। ड्राईवर कार का पहिया उतार कर पंक्चर लगवाने चला गया। आपने देखा कि गर्मी में मैं कार के पास खड़ा था तो आप मेरे पास आए और दवाखाने की ओर इशारा किया और कहा कि इधर आकर कुर्सी पर बैठ जाएँ। अंधा क्या चाहे दो आँखें और कुर्सी पर आकर बैठ गया। ड्राइवर ने कुछ ज्यादा ही देर लगा दी थी। 

एक छोटी-सी बच्ची भी यहाँ आपकी मेज़ के पास खड़ी थी और बार-बार कह रही थी, '' चलो न बाबा, मुझे भूख लगी है। आप उससे कह रहे थे कि बेटी थोड़ा धीरज धरो, चलते हैं। मैं यह सोच कर कि इतनी देर से आप के पास बैठा था और मेरे ही कारण आप खाना खाने भी नहीं जा रहे थे। मुझे कोई दवाई खरीद लेनी चाहिए ताकि आप मेरे बैठने का भार महसूस न करें। मैंने कहा वैद्यजी मैं पिछले 5-6 साल से इंग्लैंड में रहकर कारोबार कर रहा हूँ। इंग्लैंड जाने से पहले मेरी शादी हो गई थी लेकिन अब तक बच्चे के सुख से वंचित हूँ। यहाँ भी इलाज कराया और वहाँ इंग्लैंड में भी लेकिन किस्मत ने निराशा के सिवा और कुछ नहीं दिया।" 

आपने कहा था, "मेरे भाई! भगवान से निराश न होओ। याद रखो कि उसके कोष में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है। आस-औलाद, धन-इज्जत, सुख-दुःख, जीवन-मृत्यु सब कुछ उसी के हाथ में है। यह किसी वैद्य या डॉक्टर के हाथ में नहीं होता और न ही किसी दवा में होता है। जो कुछ होना होता है वह सब भगवान के आदेश से होता है। औलाद देनी है तो उसी ने देनी है। मुझे याद है आप बातें करते जा रहे थे और साथ-साथ पुड़िया भी बनाते जा रहे थे। सभी दवा आपने दो भागों में विभाजित कर दो अलग-अलग लिफ़ाफ़ों में डाली थीं और फिर मुझसे पूछकर आप ने एक लिफ़ाफ़े पर मेरा और दूसरे पर मेरी पत्नी का नाम लिखकर दवा उपयोग करने का तरीका बताया था।

मैंने तब बेदिली से वह दवाई ले ली थी क्योंकि मैं सिर्फ कुछ पैसे आप को देना चाहता था। लेकिन जब दवा लेने के बाद मैंने पैसे पूछे तो आपने कहा था, बस ठीक है। मैंने जोर डाला, तो आपने कहा कि आज का खाता बंद हो गया है। मैंने कहा मुझे आपकी बात समझ नहीं आई। इसी दौरान वहां एक और आदमी आया उसने हमारी चर्चा सुनकर मुझे बताया कि खाता बंद होने का मतलब यह है कि आज के घरेलू खर्च के लिए जितनी राशि वैद्यजी ने भगवान से माँगी थी वह ईश्वर ने उन्हें दे दी है। अधिक पैसे वे नहीं ले सकते। 

मैं कुछ हैरान हुआ और कुछ दिल में लज्जित भी कि मेरे विचार कितने निम्न थे और यह सरलचित्त वैद्य कितना महान है। मैंने जब घर जा कर पत्नी को औषधि दिखाई और सारी बात बताई तो उसके मुँह से निकला वो इंसान नहीं कोई देवता है और उसकी दी हुई दवा ही हमारे मन की मुराद पूरी करने का कारण बनेंगी। आज मेरे घर में दो फूल खिले हुए हैं। हम दोनों पति-पत्नी हर समय आपके लिए प्रार्थना करते रहते हैं। इतने साल तक कारोबार ने फ़ुरसत ही न दी कि स्वयं आकर आपसे धन्यवाद के दो शब्द ही कह जाता। इतने बरसों बाद आज भारत आया हूँ और कार केवल यहीं रोकी है।

वैद्यजी हमारा सारा परिवार इंग्लैंड में सेटल हो चुका है। केवल मेरी एक विधवा बहन अपनी बेटी के साथ भारत में रहती है। हमारी भान्जी की शादी इस महीने की 21 तारीख को होनी है। न जाने क्यों जब-जब मैं अपनी भान्जी के भात के लिए कोई सामान खरीदता था तो मेरी आँखों के सामने आपकी वह छोटी-सी बेटी भी आ जाती थी और हर सामान मैं दोहरा खरीद लेता था। मैं आपके विचारों को जानता था कि संभवतः आप वह सामान न लें किन्तु मुझे लगता था कि मेरी अपनी सगी भान्जी के साथ जो चेहरा मुझे बार-बार दिख रहा है वह भी मेरी भान्जी ही है। मुझे लगता था कि ईश्वर ने इस भान्जी के विवाह में भी मुझे भात भरने की ज़िम्मेदारी दी है।

वैद्यजी की आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं और बहुत धीमी आवाज़ में बोले, '' कृष्णलाल जी, आप जो कुछ कह रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा कि ईश्वर की यह क्या माया है। आप मेरी श्रीमती के हाथ की लिखी हुई यह चिठ्ठी देखिये।" और वैद्यजी ने चिट्ठी खोलकर कृष्णलाल जी को पकड़ा दी। वहाँ उपस्थित सभी यह देखकर हैरान रह गए कि ''दहेज का सामान'' के सामने लिखा हुआ था '' यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।''

काँपती-सी आवाज़ में वैद्यजी बोले, "कृष्णलाल जी, विश्वास कीजिये कि आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि पत्नी ने चिठ्ठी पर आवश्यकता लिखी हो और भगवान ने उसी दिन उसकी व्यवस्था न कर दी हो। आपकी बातें सुनकर तो लगता है कि भगवान को पता होता है कि किस दिन मेरी श्रीमती क्या लिखने वाली हैं अन्यथा आपसे इतने दिन पहले ही सामान ख़रीदना आरम्भ न करवा दिया होता परमात्मा ने। वाह भगवान वाह! तू महान है तू दयावान है। मैं हैरान हूँ कि वह कैसे अपने रंग दिखाता है।"

वैद्यजी ने आगे कहा,सँभाला है, एक ही पाठ पढ़ा है कि सुबह परमात्मा का आभार करो, शाम को अच्छा दिन गुज़रने का आभार करो, खाते समय उसका आभार करो, सोते समय उसका आभार करो।

शेयर किया तो और लोग भी पढ़ सकेंगे।

December 6, 2019

सोच का प्रभाव

सोच का प्रभाव
         मन पर होता है
मन का प्रभाव
         तन पर होता है

तन और मन दोनों  का प्रभाव
       सारे जीवन पर होता है
        
 इसलिये सदा अच्छा सोचें और खुश रहें.....हंसते मुस्कराते रहिये .....
                🙏सुप्रभात🙏
      💐 आपका दिन मंगलमय हो 💐

December 5, 2019

गुस्सा....

गुस्सा           
बंद दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया। दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया। 

घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताक़त से डंक मार दिया जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया। 

अब की बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़ कर और दम घोंट कर मारने की पूरी कोशिश कर डाली। 

अब सांप अपने गुस्से की वजह से बुरी तरह घायल हो गया।

दूसरे दिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया जो किसी और कारण से नहीं केवल अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था। 

कभी कभी गुस्से में हम दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं मगर समय बीतने के बाद हमें पता चलता है कि हमने अपने आप का ज्यादा नुकसान किया है।

अब इस कहानी का सार ये है कि

अच्छी जिंदगी के लिए कभी कभी हमें, 
कुछ चीजों को, 
कुछ लोगों को, 
कुछ घटनाओं को, 
कुछ कामों को और 
कुछ बातों को 
इग्नोर करना चाहिए। 

अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी बनाइये।

जरूरी नहीं कि हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दिखाएं।

हमारे कुछ रिएक्शन हमें केवल नुकसान ही नहीं पहुंचाएंगे बल्कि हो सकता है कि हमारी जान ही ले लें। 

सबसे बड़ी शक्ति सहन शक्ति है।

December 4, 2019

जीने के लिये......

✍क्या खूब कहा है🌷
"आसमां में मत दूंढ अपने सपनो को,
सपनो के लिए तो ज़मी जरूरी है,🌷
 सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मज़ा, जीने के लिये एक कमी भी जरूरी है".

     🌷 GOOD MORNING 🌷

December 3, 2019

खुशियाँ

✍🏼

दाम ऊंचे हो सकते हैं
ख़्वाहिशों के

मगर ख़ुशियाँ
हरगिज़ महंगी नही होती...

सुप्रभात

December 2, 2019

मौत...

मौत भी क्या खूबसुरत होगी यारो
जो गले लगा लेता है
जीना ही छोड देता है।


December 1, 2019

मैं, मैं और मैं..

जंगल जंगल ढूँढ रहा है..मृग अपनी कस्तूरी...।

कितना मुश्किल है तय करना ...खुद से खुद की दूरी....।

भीतर शून्य.. !
बाहर शून्य.. !
शून्य चारो ओर है ..!
   
मैं नहीं हूं, मुझमें फिर भी "मैं - मैं" का ही शोर है।

🙏🏻सुप्रभात🙏🏻

November 30, 2019

कर्तव्य

कर्तव्य ऐसा आदर्श मित्र है
जो कभी धोखा नहीं दे सकता,
                और
धैर्य एक ऐसा कड़वा पौधा है,
जिस पर फल हमेशा मीठे आते हैं।
  
      🌹शुभ प्रभात 🌹

November 29, 2019

रिश्ता.....

🌹🌸👌🍀🙏🌲💐🌿🌷🥀💐💐

✏रिश्ता बहुत गहरा हो या न हो
                      परन्तु भरोसा
              बहुत गहरा होना चाहिये..
                 गुरु वही श्रेष्ठ होता है
                   जिसकी प्रेरणा से
             किसी का चरित्र बदल जाये
              और मित्र वही श्रेष्ठ होता है
         जिसकी संगत से रंगत बदल जाये✍🏻

       🙏😊 Good morning🙏😊

November 28, 2019

इंतजार..

जिंदगी में किसी के इंतजार की तलब भी ज़रूरी है.

वरना ये वक़्त तो गुजरता है,पर कटता नहीं...!!
🌞🌹शुभ प्रभात🌹🌞

November 27, 2019

बातों की खुशबू

उनकी हर बात से महकती खुशबू
लगता है जैसे बहारेंं खिल उठी हों,
दिल जोरों से धडकने लगता है तब
जब आँखों मेंं ही रास्ता नजर आता हो।। 
रविंद्र 'रवि' कोष्टी

November 26, 2019

विश्वास...

इंसान जब हथेली की रेखाओं में
भविष्य ढूंढने  लगे,
तब समझ लेना कि,
उसकी बाजुओं में ताकत,
और
मन में विश्वास खत्म हो गया है..
    🙏🏻शुभ प्रभात🙏🏻

November 24, 2019

सदैव खुश रहें🌹😊

संपत्तियां, पैसा, उपलब्धियाँ, प्रतिष्ठा, सम्मान, पद... कुछ भी मायने नहीं रखता, अगर आप खुश़ नहीं हैं... 😊

इस जिंदगी की सबसे पहली जरूरत है...
आपका ख़ुश रहना !!! 😊

🌹😊
सदैव खुश रहें

सुप्रभात🙏

ठंड...

एक ठण्ड विदेशों में पड़ती है,.!

लोग गोरे हो जाते हैं...!

.

.

और एक ठण्ड हमारे यहाँ पड़ती है,.!

गाल और होंठ फट जाते हैं.!😝🤣

😝😝😝😆😆😆😅😅

November 22, 2019

नोंकझोक...


पत्नी ने मुझसे कहा कि मेरे भाई से भी खाने के लिये पुछ लो..!

मैंने पुछा :- साले साहब खाना खा के आये हो या जा के खाओगे..!
😝😆😆🤣

नजर और नसीब

✍🏻 नजर और नसीब का
             कुछ ऐसा इतेफाक है
                   की
      नजर को अक्सर वही
       चीज पसंद आती है 
     जो नसीब में नही होती
                   और
      नसीब में लिखी चीज
 अक्सर नजर नहीं आती है       

 🙏 सुप्रभात🙏
व्हाट्सएप मेसेज

खुशियाँ

🌻🌼🌞🌞🌼🌻
🙏🙏 सुप्रभात 🙏

खुशियाँ बटोरते बटोरते उम्र गुजर गई 
लेकिन खुश न हो सके... 

एक दिन अहसास हुआ कि 
खुश तो वे लोग हैं 
जो खुशियाँ बाँट रहे हैं।

🙏 सुप्रभात🙏🙏
🌻🌼🌞🌞🌼🌻
(व्हाट्सएप पर प्राप्त संदेश  )

November 21, 2019

दर्द....

दर्द कितने छिपाए रखोगे सीने मे
बस सीना खोल के बोल दो
कुछ माहौल बन जाए।
मौत आ भी जाए अगर चुपके से
दर्द ऐ दास्ताँ सुन
दर्द से वो भी अपनी ही जगह जम जाए।।
रविंद्र "रवि" कोष्टी

November 19, 2019

बेहतरीन जिंदगी...

जिदंगी " बेहतर "
    तब होती है.
    जब आप खुश होते है

लेकिन

जिंदगी "बेहतरीन" तब होती है .
  जब आपकी वजह से
           लोग खुश होते है.
          शुभ प्रभात

November 18, 2019

घर......!🌹

"व्यवहार" घर का शुभ कलश है।
और "इंसानियत" घर की "तिजोरी"।

"मधुर वाणी" घर की "धन-दौलत" है।
और "शांति" घर की "महालक्ष्मी"।

"पैसा" घर का "मेहमान" है।
और "एकता" घर की "ममता।

"व्यवस्था" घर की "शोभा" है
और समाधान "सच्चा सुख"।
    🌹 प्रातःवंदन!🌹

November 17, 2019

दौलत.....

(कवि:अज्ञात। व्हाट्सएप संदेश  )
वो कागज की दौलत ही क्या
           जो पानी से गल जाये और
             आग से जल जाये

         दौलत तो दुआओ की होती हैं
            न पानी से गलती हैं
              न आग से जलती हैं...                                                                                                    
         आनंद लूट ले बन्दे,
           प्रभु की बन्दगी का।
             ना जाने कब छूट जाये,
               साथ जिन्दगी का।।
     
"ईश्वर से मेरी एक ही प्रार्थना है..
"महंगी घड़ी" सबको दे देना !
         लेकिन.....
"मुश्किल घड़ी" किसी को न  देना
🍁🍁🍁🙏सुप्रभात 🍁🍁🍁🙏
        🌻 आपका दिन मंगलमय हो🌻

November 15, 2019

"जिंदगी" की सांसे!🌹

(व्हाट्सएपपर प्राप्त यह कविता. कवी कौन है मालूम नही. मन को भा गयी. सो शेअर कर रहा हुँ  )

जब  तक  चलेगी "जिंदगी" की सांसे
कहीं  प्यार  कहीं "टकराव" मिलेगा !!
कहीं  बनेंगे  संबंध  "अंतर्मन" से  तो
कहीं "आत्मीयता" का अभाव मिलेगा 

कहीं  मिलेगी  जिंदगी में "प्रशंसा" तो
कहीं नाराजगियों का "बहाव" मिलेगा 
कहीं  मिलेगी सच्चे मन से "दुआ" तो
कहीं  भावनाओं में "दुर्भाव" मिलेगा !!

कहीं बनेंगे पराए "रिश्तें" भी अपने तो
कहीं अपनों से ही "खिंचाव" मिलेगा !!
कहीं  होगी  "खुशामदें" चेहरे  पर तो
कहीं पीठ पे बुराई का "घाव" मिलेगा !!

तू  चलाचल  राही अपने "कर्मपथ" पे
जैसा तेरा भाव वैसा "प्रभाव" मिलेगा !!
रख स्वभाव में शुद्धता का "स्पर्श" तू
अवश्य  जिंदगी का "पड़ाव" मिलेगा !!🌹

November 11, 2019

जिंदगी२

कभी कभी उदासी की
           आग हैं जिंदगी
     कभी कभी खुशियों का
           बाग हैं जिंदगी
     हंसता  और  रुलाता
            राग  हैं जिंदगी
   कड़वे और मीठे अनुभवों
        शंका स्वाद हैं जिंदगी
            पर अंत मे तो
                 अपने
     किये   हुए   कर्मो   का
        हिसाब है जिंदगी
         🙏सुप्रभात🙏
( कवी:-अज्ञात, व्हाट्सएपपर प्राप्त संदेश )

November 10, 2019

जिंदगी.....

दोस्त , किताब , रास्ता , और सोच!
ये चारों  जीवन में सही मिलें तो,
ज़िंदगी "निख़र".... जाती है .
वरना "बिख़र" ज़ाती है ...
        शुभ प्रभात...