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September 14, 2019

गड़बड़ कहाँ हुई ..

गड़बड़ कहाँ हुई ..

दोस्तों, व्हाट्सएप ग्रुप में प्राप्त एक अच्छा संदेश यहाँ शेअर करना चाहता हुँ।

       एक बहुत ब्रिलियंट लड़का था। सारी जिंदगी फर्स्ट आया। साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया। अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन IIT चेन्नई में हो गया। वहां से B Tech किया और वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निया से MBA किया।

अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है। उसने वहां भी हमेशा टॉप ही किया। वहीं नौकरी करने लगा।  5बेडरूम का घर  उसके पास। शादी यहाँ चेन्नई की ही एक बेहद खूबसूरत लड़की से हुई।

एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में ? पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए, अमेरिका में सेटल हो गए, मोटी तनख्वाह की नौकरी, बीवी बच्चे, सुख ही सुख।

लेकिन दुर्भाग्य वश आज से चार साल पहले उसने वहीं अमेरिका में, सपरिवार आत्महत्या कर ली.अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली। What went wrong? आखिर ऐसा क्या हुआ, गड़बड़ कहाँ हुई।

ये कदम उठाने से पहले उसने बाकायदा अपनी wife से discuss किया,फिर एक लम्बा suicide नोट लिखा और उसमें बाकायदा अपने इस कदम को justify किया और यहाँ तक लिखा कि यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन परिस्थितयों में। उनके इस केस को और उस suicide नोट को California Institute of Clinical Psychology ने ‘What went wrong'? जानने के लिए study किया।पहले कारण क्या था, suicide नोट से और मित्रों से पता किया। अमेरिका की आर्थिक मंदी में उसकी नौकरी चली गयी। बहुत दिन खाली बैठे रहे। नौकरियां ढूंढते रहे। फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए और फिर भी जब नौकरी न मिली, मकान की किश्त जब टूट गयी, तो सड़क पर आने की नौबत आ गयी। कुछ दिन किसी पेट्रोल पम्प पर तेल भरा बताते हैं। साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर पति पत्नी ने अंत में ख़ुदकुशी कर ली. इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने :This man was programmed for success but he was not trained, how to handle failure.यह व्यक्ति सफलता के लिए तो तैयार था,पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया कि असफलता का सामना कैसे किया जाए। अब उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं। पढने में बहुत तेज़ था, हमेशा फर्स्ट ही आया। ऐसे बहुत से Parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते हैं कि बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये, कोई गलती न हो उस से। गलती करना तो यूँ मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया और इसके लिए वो सब कुछ करते हैं, हमेशा फर्स्ट आने के लिए। फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद, घूमना फिरना, लड़ाई झगडा, मार पीट, ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है बेचारों को, 12th कर के निकले तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद गया बेचारे पर, वहां से निकले तो MBA और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी। अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी, यानी बड़े बड़े targets कमबख्त ये दुनिया, बड़ी कठोर है और ये ज़िदगी,अलग से इम्तहान लेती है। आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे। वहां कितने नंबर लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है। और सवाल, सब out ऑफ़ syllabus होते हैं, टेढ़े मेढ़े, ऊट पटाँग और रोज़ इम्तहान लेती है। कोई डेट sheet नहीं।एक अंग्रेजी उपन्यास में एक किस्सा पढ़ा था। एक मेमना अपनी माँ से दूर निकल गया। आगे जा कर पहले तो भैंसों के झुण्ड से घिर गया। उनके पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह। अभी थोडा ही आगे बढ़ा था कि एक सियार उसकी तरफ झपटा। किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई तो सामने से भेड़िये आते दिखे। बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा, किसी तरह माँ के पास वापस पहुंचा तो बोला, माँ, वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग बच्चों को अवश्य दीजिये।
विशेष -बच्चों को बस किताबी कीडा मत बनाईये, बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक, समाजिक व संस्कार भी देना जरूरी है, हर परिस्थिति को ख़ुशी ख़ुशी धैर्य के साथ झेलने की क्षमता और उससे उबरने का ज्ञान और विवेक बच्चों में होना ज़रूरी है।
Don't  make them machine with brain rather humans with emotions and feelings 

बच्चे हमारे है, जान से प्यारे है।

August 4, 2019

माँ की ममता...

अपने पिता की मृत्यु के बाद बेटे ने अपनी माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ दिया और कभी कभार उनसे मिलने चला जाता था ।

  एक शाम उसे वृद्धाश्रम से फ़ोन आया कि तुम्हारी माता जी की तबियत बहुत ख़राब है, एक बार आकर मिल लो ।
 
    पुत्र वहाँ गया तो उसने देखा कि माँ कि हालत बहुत गंभीर और मरणासन्न है ।

   उसने पूछा :- माँ मैं आपके लिये क्या कर सकता हूँ ?

  माँ ने जवाब दिया :- कृपा करके वृद्धाश्रम में पंखे लगवा दे यहाँ एक भी नहीं है
    और हाँ एक फ्रिज भी रखना देना ताकि खाना ख़राब ना हो क्योंकि कई बार मुझे बिना खाए ही सोना पड़ा ।
  पुत्र ने आश्चर्यचकित होकर पूछा :- माँ, आपको यहाँ इतना समय हो गया आपने कभी शिकायत नहीं करी, अब जब आपके जीवन का कुछ ही समय बचा है तब आप मुझे यह सब बता रही हो ।क्यों ?

  माँ ने जवाब दिया :- ठीक है बेटा, मैंने तो गर्मी, भूख और दर्द सब बर्दाश्त तर लिया, लेकिन.......
    जब तुम्हारी औलाद तुम्हें यहाँ भेजेगी तो मुझे डर है कि तुम ये सब सह नहीं पाओगे

   शानदार, अतुलनीय और आगे भेजने लायक.

July 31, 2019

सादगी

उनकी सादगी के क्या कहने?
बगियाँ मे सैर करती है
तो फुल भी शरमा जाते है.

July 30, 2019

उलझनें

कुछ उलझनें
वक्त के साथ हल हो जाती है,
उन्हे वही छोड देना ही
ठिक होता है
सुलझने के लिए।

July 20, 2019

अपोलो 11

दोस्तों, विज्ञान जगत में आज का दिन बहुत खास माना जाता है। 50 साल पहले 20 जुलाई 1969 को अमेरिका का अपोलो 11 यह अंतरिक्ष यान पहलीबार चांद्रभुमी पर मानव लेकर उतरा था।
चांद्रभूमी पर पहला कदम रखनेवाला मानव था निल आर्मस्ट्राँग और दुसरे का नाम था एडविन ऑल्ड्रिन. 
यह एक ऐतिहासिक दिन था।

June 16, 2019

जिंदगी का एक और दिन.....

देखा,
जिंदगी का एक और दिन गुजर गया
इतिहास मे खुद को समाने के लिए,
तब
आज को याद आया
कुछ तो रह गया है कल का कर गुजरने के लिए
पर, आज सोचता रहा अब कर लेता हुँ
लेकिन आलस ने उसे रोक दिया और
छोड दिया कल करने के लिए
लेकिन नाकाम आज, आज भी न कर सका कल का बचा काम
और देखते ही देखते
जिंदगी का एक और दिन गुजर गया
इतिहास मे खुद को समाने के लिए।

June 10, 2019

उम्र गुजर जाती है.....

उम्र गुजर जाती है
सवालों को जवाबों
तक ले जाने के लिए,
या फिर ठहर जाते है वो
रुह को खामोशी में जलाने के लिए ।१।
(क्रमशः)
(दोस्तों ये मैने नहीं मेरी बेटी ने लिखी है)

June 1, 2019

जन्मदिवस.....

60 के दशक तक जिन लोगों ने जन्म लिया है उनकी जन्म तारीख तकरिबन 1 जून ही है। ऐसा मैने अपने जीवनकाल मे अनुभव किया है। इसका कारण है अपने देश मे उस समय तक पढाई को उतना महत्त्व नही था। माता पिता पढेलिखे न होने से बच्चों के जनम दिन कोई याद नही रखता था।
जब बच्चों का पाठशाला मे प्रवेश करवाने पहुँचते थे तब शिक्षक जनम तारिख पुछते तो  याद की जाती थी जन्म के पहले या बाद मे घटित घटनाएँ।
वो भुकंप आया था उसके एक महिने बाद ये पैदा हुआ था। या बहुत बडा अकाल पडा था उस समय ये 2 माह का था। बस इन्ही घटनाओं के आधार पर जनम दिन निश्चित हुआ करते थे।
जिन बच्चों के माता पिता कुछ पढे हुए होते वे कही लिखकर रखते या अस्पताल से प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेते थे।
हाँ उन दिनो दाई माँ को ही बुलाया करते थे अस्पताल तो बहुत कम लोग जाते थे।
इनमे से एक बच्चा मै हुँ।
आज एक जून जो सार्वजनिक जन्म दिन भी कहलाता है।
पाठशाला मे प्रवेश करते समय पिताजी को याद नही था इसलिए एक जून लिखी गयी।

April 27, 2019

ये तेरा घर ये मेरा घर

कुछ साल पहले किसी ने एक अलौकिक शहर बसाया. नाम रखा फेसबुक. धीरे धीरे लोग वहाँ अपना डेरा जमाने लगे. फिर अपना घर ही बना लिया। देखते ही देखते करोडों लोगों ने वहाँ अपने घर बना लिए।

फिर एक और शख्स आए और उस दुनिया का नाम रखा व्हाट्सएप। लोगों ने यहाँ भी अपना डेरा लगाना शुरु किया।  देखते ही देखते इस दुनिया ने भी अपना विहंगम रुप दिखा दिया।

फिर कोई आया जिसने इंस्टाग्राम नामक दुनिया बसाना शुरु किया। यहाँ भी लोगों ने घर बनाने शुरु किये।

इस तरह लोग आते गये नयी दुनिया बसाते गये।
अब हर किसी ने अपना घर हर नयी दुनिया में बना लिया है। कभी इस घर कभी उस घर घुमना सबकी दिनचर्या बन गयी।
और कहने लगे ये मेरा घर ये तेरा घर।

April 19, 2019

तब और अब

पहले परिवार बडे हुआ करते थे
और घर छोटे ।
अब परिवार छोटे होते है
और घर बडे।

April 16, 2019

बुढापा...

उलझी हुई जिंदगी को
सुलझाते सुलझाते ही
कब बुढापा आ बरपा 
हमें पता ही न चला।

दर्द.

दर्द इस कदर छाया है
जिंदगी में
दर्द अगर नदारद हो
जिंदगी से
तो बहुत दर्द होता है।

खुशियों की बरसात...

खाली खाली
दिन कटें
सुनी सुनी रातें।
अब तो आजा
साथ हो चले
हो शायद
खुशीयों की बरसातें।।

तिनका...

तुम्हें मुबारक हो खुशी
हमें गम ही सही
जीने के लिए बस
तिनके का सहारा काफी है।

दस्तक...

सुना है खुशियाँ
नशीबवालों के दर पे
ही दस्तक देती है,
हम वो खुशनसीब कहाँ
हम तो गमों के सहारे
ही जी लेते है।

ऐतबार...

आजकल कुछ अजी
दौर से गुजर रहा हुँ यारों
हर पल नब्ज टटोलकर
ये  ऐतबार कर लेता हुँ
कि दिल ने कहीं
धडकना तो बंद नही कर दिया।

जिंदगी...

जिंदगी ने कुछ इस तरह
उलझाए रखा हमें
बचपन से कब बुढापे में
पहुँचे पता ही न चला।

ऐ जिंदगी...

ऐ जिंदगी मुझे शिकवा है
तुझसे, काश तु न होती
तो मैं खुशी से जी लेता
इक परिंदे की तरह।

March 29, 2019

मच्छरों से छुटकारा☺️☺️

आजकल घरवाली को एक जुनून सवार है। हर रोज यू ट्यूब पर रसोई के तरह तरह के चेनल देखने का जुनून। राज की बात बताऊ? मन ही मन मै खुश होता हुँ। पुछो क्यो? अरे भाई छुटकारा जो मिल जाता है।☺️
खैर।
परसो रात युट्यूब देख रही थी तब मच्छर परेशान कर रहे। वैसे रोज ही करते है। सभी को करते होगे!! वह बोली, जरा युट्यूब पर देखना मच्छर भगाने का कोई नायाब तरिका है क्या? सुनते ही  मैने देखना शुरु किया। अलग अलग व्हिडीओ मिले। और उनको दिखाये। कुछ पसंद नयी आये शायद।
आज रात वो अचानक बोली, अजी क्या हुआ? आज एक भी मच्छर नही आया। शायद डर गये  कल के हमारा  युट्यूब सर्च से!☺️
अरे ये तो नायाब तरिका मिला मच्छरों से छुटकारा पाने का! मैने अपनी पिठ थपथपाई☺️ वो बोली जी रहने दिजिए शाबासकी तो मुझे मिलनी चाहिए मैने ही आपको कहा था सर्च करने को। मै क्या करता दुनिया की रित ही है हर घर मे होम मिनिस्टर की ही चलती है। 😢😢

March 20, 2019

होली है......

होली की हर्षित बेला पर,
खुशियां     मिले     अपार |
यश,कीर्ति, सम्मान     मिले,
और      बढे        सत्कार ||
       शुभ-शुभ रहे हर दिन हर पल,
        शुभ-शुभ     रहे       विचार |
        उत्साह.   बढे  चित चेतन में,
        निर्मल      रहे        आचार ||
सफलतायें नित  नयी मिले,
बधाई                बारम्बार |
मंगलमय हो काज  आपके,
सुखी       रहे      परिवार ||

आप सभी और आपके परिवार को   "होली की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं"

March 8, 2019

आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

http://koshtiravindra.blogspot.com/2018/03/blog-post.html

February 8, 2019

जीवन क्या है?

हर पल मुस्कुराते रहो
खुश रहने के लिए ढुंढो बहाना
जीवन क्या है?
बस आना और जाना
हर कोई हो अपना
हर कोई पराया
सब को ही दिल में है बसाना
जीवन क्या है ?
बस आना और जाना।

रविंद्र "रवि" कोष्टी

January 27, 2019

अब बस कर ऐ जिंदगी.....

अब बस कर ऐ जिंदगी
तूने इतना तराशा है मुझे
कि हर कदम फुँक फुँक
कर चलता हुँ।

ऐ जिंदगी.....

ऐ जिंदगी तू बस इतना बता दे
जीने के लिए और
कितने दर्द सहने होंगे।

रविंद्र कोष्टी "रवि"

January 15, 2019

जिंदगी जी ले....

सुरज की रोशनी में
जी ले ऐ नादान,
कुछ लोग तो
जुगनु की मंद रोशनी में भी
जीने का हुनर रखते है।

December 31, 2018

मैं मैं हुँ......

मैं मैं हुँ,
मेरा स्वागत
लोग धुमधाम से करते है;
और मेरी उम्र
ढलकर वापस
जाते समय भी
लोग मुझे धुमधाम से
बिदाई भी देते है।
मैं सिर्फ मैं ही हुँ
क्योंकि मेरी उम्र ही
सिर्फ एक वर्ष है।
मैं मैं हुँ
और मेरा नाम है
"साल"

November 22, 2018

मुखौटें..

मुखौटें बहुत मिलते है
इस शहर की गलियों में,
बस चेहरों की तलाश जारी है।
--रविंद्र "रवी "

November 20, 2018

जींदगी का सच....

जो चाहिए
वो मीलता नहीं।
जो मीलता है
वो टिकता नहीं।
जो टिकता है
वो पसंद नहीं
जो पसंद हो
वो मीलता नहीं
जो मीलता है
वो चाहता नहीं।
जो चाहता हुँ
वो खो जाता है
और जो खो जाता है एक बार
दोबारा नहीं मीलता।

November 2, 2018

प्रार्थना.......

हम जहाँ प्रार्थना करते है
केवल वहीं ईश्वर नही होता..
ईश्वर वहाँ भी होता है
जहाँ हम गुनाह करते है.!

October 28, 2018

नाचीज़ इन्सां

नाचीज इन्सां...


आसमाँ से तारे भी टूट जाते है 


तो इस इन्सां का क्या 

 वो तो नाचीज है

कभी भी 

जिंदगी के आसमाँ से 

टूट कर गिर सकता है

यह सितारा

रविंद्र "रवी" 


October 18, 2018

ढलती उम्र


अब तो थक जाता हुँ
थोडी दूर चलने से,
मंज़िल नजर आती है
मगर फासला तय नहीं कर पाता।१।

काफिले नजर नहीं आते ,
मंजिलें नजर नहीं आती
उम्र ढल चुकी अब तो,
और दूर चला नहीं जाता।२।

बस अब और नही.
जिंदगी की राह गुजर जाये
चाहे अंधेरे हो या काँटे
इस राह में
नजर तो कुछ नही आना।३।

March 8, 2018

आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस...

कण कण को जीवन देती
तु हर घर में उजियारा लाती
तु नर की नारी है
तु सब से न्यारी है
तु ही माया, है तु ही ममता
तु ही लक्ष्मी, तु ही सीता
तेरे बिन उसका जीवन है रिता
जल, थल, आकाश में
जा पहुँची ये सबला
कैसे कहे कोई तुझे अबला।।
" जागतिक महिला दिन" पर सभी महिलाओ को समर्पित.
--रविंद्र "रवि " कोष्टी

February 2, 2018

खुशियाँ-१

खुशियों की अपनी ही
एक अदा होती है,
चुपके से आती है
और
सब को फिदा कर जाती है।

December 1, 2017

चाहत जीने की...

*एक चाहत होती है दोस्तो के साथ जीने की...*

*वरना पता तो हमे भी है मरना अकेले ही है...!!*

November 25, 2017

जिंदगी....

जब तक रास्ते समझ मे आते है
तब तक लाैटने का वक्त हो जाता है..
यही है जिंदगी...

November 19, 2017

दिल से

लाख नकाबों से छीपा लो खुद को
हम तो दिल की निगाहाें से दिदार करते हैं
लाख जुबाँ को सी ले वो
हम दिल से उनकी आवाज सुन लेते हैं।।

November 18, 2017

सुप्रभात

. .  . . 🙂सुप्रभात😀
मुस्कुराके हर पल बिताना सिखाे,
गमों को हँस के टालना सिखो ।
परेशानियाँ सभी को है जिंदगी में उन्हें भी हँसते हँसते जीना सिखो।।
https://ravindra1659.wordpress.com

November 9, 2017

गम का एहसास!!

जिदगी में गम न होते
अगर
खुशियों से आनंद कैसे
मिलता?
खुशियाँ न आती जिंदगी में
अगर
तो गम का अहसास कैसे होता?

रविंद्र "रवि " कोष्टी

जिंदगी की सच्चाई

"चलते चलते ठोकर लगना
गिरते गिरते संभलना
फिर भी गिर जाना
गिरते ही बौखलाना
हिम्मत बांध उठने की कोशिश
उठते उठते लडखडाना
फिर उठना कपडे झटकना
और चल पडना
अपने गंतव्य की ओर"
इसी का नाम तो
जिंदगी है
किसी ने पुछा जब मुझसे
मैंने बताई
जिंदगी की सच्चाई!

रविंद्र ""रवि " कोष्टी

October 20, 2017

दिवाली की रात

 दिवाली की रात
दूर आकाश में
छु कर
वो चाँद देखने की कोशिश करता होगा
यहाँ धरती पर
दिवाली की रात लोग
क्या-क्या कर रहे है
लेकिन उसकी आँखे
धरती पर जलते करोडो दियो 
लाखो पटाखों  की
जगमगाती  रोशनी से

चौंधिया  जाती होगी




October 19, 2017

Happy Diwali*****


September 29, 2017

शुभ दशहरा

             सर्व मित्रांना दसऱ्याच्या हार्दिक शुभेच्छा!!!!!!!

सभी दोस्तो को दशहरे की शुभ कामनाये !!!!!!!!

September 28, 2017

पूछो तो जाने

दोस्तों, इन्सान को उपरवाले ने कुछ इस तरह बनाया है की किसी भी चीज पर उसकी नजर जाये तुरंत ही उसके दिमाग में हलचल सुरु हो जाती है. यदि वह चीज जनि पहचानी है तो उसे उसका नाम तुरंत ही याद आ जाता है. यदि नहीं, तो वह सोचता रहता है "
ठीक इसी तरह उसके जहन में हर पल अनगिनत सवाल उठते रहते है. कई सवालों के वह जवाब  ही नहीं जान पाता और कई ऐसे सवाल होते है जिन्हें वह जानना तो चाहता है मगर उसे उसका जवाब ही नहीं मिल पाता.

जब से इंटरनेट आया है हमारा काम थोड़ा आसान हो गया है. कई सवालों के जवाब उस जंजाल में मिल जाते है.
लेकिन इन सवालो के जवाब जानने के लिए हम एक और तरिका अपना सकते है.
yahoo answer  और quora ये ऐसी ही साईट है जहा आप अपना सवाल डालिए, दुनियाभर से कोई न कोई आपके सवाल का जवाब जरुर देता है. मगर ये दोनों आंतर्राष्ट्रीय साईट है.
हाल ही में मेरी बेटी ने  ऐसी ही साईट खुद तैयार की  है और उसे लोन्च भी किया है.
ma.pruchha.com इस साईट पर आप मराठी में सवाल दाल सकते है और जवाब दे सकते है.
 pruchha.com भी ऐसी ही साईट है.
आप सभी दे निवेदन है की आप खुद, आपके बच्चे या और भी लोगो से इस साईट का इस्तेमाल करने के लिए कहे.

जिंदगी की रफ़्तार

रस्तो पे बाईक या कार चलाने वाले भाई यो से गुजरीस है की अपनी गाडी की रफ्तार अपने कबु में खे। इसी सिलसिले में एक कवीता पेश कर राहा हुं. जरा गौर फरमायेगा
" वाहन क्या है?
जिंदगी को एक जगह से
दूसरी जगह ले जाने भर का एक साधन ही तो है
लेकिन
इसकी रफ्तार यदि पकड़ से बहार चली जाये
तो
जिंदगी को इस दुनिया से
उस दुनिया में ले जाने का एक साधन बन जाती है."



इसलिए दोस्तों गाड़ी इतनी गति से चलाये की वह अपनी पकड़ में हो
चाहे जब उसे रोक सके
वरन

August 15, 2017

बचपन की यादे

बचपन की यादे 
वो बारिश के  दिन 
वो बरसात की रातें
वो बचपन की यादें!

फिर हुई वो बारिश सुबह 
फिर एक बारिश की शाम हुई,
फिर सूरज ढला,
फिर आई वो बरसात की रात,

ये सिलसिला
बरसात लेते आते  
रात दिन का 
यूँ ही चलता रहता था,
कई दिन ऐसे ही 
बारिश होते रहती थी,
नदियाँ
 अपने पुरे जोश में
बहा कराती थी कई दिन,

अब वो एक ख्वाब ही रह गया है.
सिलसिला तो अब भी चलता रहता है,
रात दिन का का
पर अब बारिश
 "कुछ पल" 
के लिए होती है
बाकि दिन तो धुप ही होती है.
पता ही नहीं चलता 
कब बारिश का मौसम आया 
और चला गया.........

कवी- रविन्द्र "रवि" ( कोष्टी) 
१५/०८/२०१७




October 26, 2013

सोने की चिडिया

एक दोस्त  दुसरे से बोला, " हमारा देश हजारो  साल पहले से सोने की चिडिया कहलाता था. लेकिन आज नही. वो फिरंगी सब कुछ लुट ले गये शायद."
" हा यार शायद, पर मेरा मन मानता ही नही."
"ऐसा क्यो? क्या कहता है तेरा मन?"
" मुझे लगता है हमारे पूर्वज इतने मुर्ख नही होंगे की वो फिरंगीयो को सब लुटने देते. सब पुर्वजो ने ज्यादा से ज्यादा सोना और जवाहरात जमीन में गाड कर रखे होंगे."
" तु सही कह रहा है यार! इसका मतलब सारा देश सोने की मिट्टी पर बसा है?"
" अरे सोच द्वारका समुद्र में डूब गयी थी. और श्रीकृष्णजी के समय में कितना सोना होता होगा. वो सब कहा गया?"
"हा यार समुंदर में भी सोना हो सकता है."
" ............................"
"..............................."

June 19, 2013

हाहाकार

दोस्तों इस साल उत्तराखंड या यु कहे सम्पूर्ण हिमालय परिसर में बारिश ने तबाही मचा रखी है. बारिश भी अजीब होती है. अब तक सुखा पड़ा था अबकी तबाही मची है. प्रकृति है की हमें ना तो ठीक से जीने देती है ना मरने देती.
मै २००७ में हिमाचल प्रदेश में गया था. शिमला में रुका था और नजदीक नाथपा झाकरी प्रोजेक्ट पर गया था.  ऑफिसियल काम से ही गया था. उस समय आदतन मैंने सम्पूर्ण शिमला और वहां से उस प्रोजेक्ट ताका के रास्ते का मुआयना किया था.मै तोनजारा देख हैरान हो  गया था. वहाँ लोग कैसे जीते होंगे यह सोच भी नहीं पा रहा था. क्योकि हर तरफ पहाड़ी ही थी. पहाड़ी पर ही बिल्डिंगे बनी हुई थी. वो भी २-३ मंजिला नहीं. १०-१० मंजिला. इ़तना ही नहीं सारे रास्ते मनी कई एक्सीडेंट हुए देखे थे. बिल्डिंगे गिरी हुई, बस गिरी हुई. क्योकि भारी बारिश की वजह से रास्ते ढह गए थे. जब हमारी कार ऐसे  रस्ते से गुजराती थी तो मै तो दिल थाम के बैठता था.
मैंने देखा की सारा हिमालय मिटटी का बना हुआ है. पत्थर का तो कही पता ही नहीं होता था. तभी मै अपने साथियो से बोला था यदि यहा धुआधार बारिश होती रही तो ये पहाड़ ढह जाने में देर नहीं लगेगी.
दोस्तों आज वही हो रहा है.
पहले हिमालय में बारिश कम हुआ करती थी सिर्फ बर्फ ही पड़ती थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वहां की बर्फ कम होती जा रही है और बारिश बढती जा रही है.


हमें अब भी मौक़ा है प्रकृति को समझने का वरन वो हमें ही समझा देगी की वो क्या है और उसकी ताकत क्या है.

December 29, 2012

आखिर कब तक…..................





अपनी ही माँ को अपने सामने कब तक पिटते देखती रहूंगी मै?
मेरे जनम पर अपनी माँ को बलि चढ़ता कब तक देखती रहूंगी मै?
जनम होते ही जिन्दा दफना देना मुझे कब तक देखती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै हू एक माँ, एक बेटी, एक बहन, एक पत्नी
जो तुब सब के घर को सजाती संवारती है
फिर भी कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक सांस की प्रताडना सहती रहूंगी मै,
दहेज की लालच में कब तक जलती रहूंगी मै,
क्या सांस ननद औरत नहीं होती?
कब तक उनके तानो को अपनी सास बनाती रहूंगी मै,
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक रावण के आँगन में बंधी रहूंगी मै?
कब तक अपनी कमजोरी को सहती रहूंगी मै?
माँ काली कब ऐसे ही कमजोर बनी रहूंगी मै?
कब तक छिछोरेपण से खुद को बचाती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक समाज के बलात्कार को सहती रहूंगी मै?
अगर जिन्दा बची तो कब तक अपनो की नजरो से बचती रहूंगी मै?
क्या वो अपने भी औरते नहीं होती?
क्या उन्हें औरत की इज्जत पता नहीं होती?
फिर भी कब तक उनकी घूरती नजरो से कब बचती रह सकुंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

आज मेरी मौत का मातम मना रहे हो
कब तक ऐसे मातम बनाते रहोगे तुम?
कल को तुम सब भूल जाओगे
कोई दामिनी समाज की बुराइयो के बलि चढ गई
मुझे मातम नहीं बदला हुआ समाज चाहिए!
मै एक लडकी हूँ लेकिन मै माँ, बहन, बेटी, बहु, सास, ननद, नानी, दादी सब कुछ मुझमे ही तो है!

 -------- श्रध्दांजलि 
रविन्द्र रवि

December 25, 2012

MERRY CHRISTMAS


November 7, 2012

From my camara!







November 6, 2012

Its true!

Its true! I got it from net. Its not mine!

October 26, 2012

शीशे के घर!


October 20, 2012

"जिंदगी की गहराई"

"जिंदगी की गहराई"
अगर समझो तो 
एक खुबसूरत झील  है,
और 
अगर ना  समझो तो 
 मौत का कुआ है. 


धन कमाने की रफ्तार

धन कमाने की चाह ने उन्हें कुछ ऐसा जकड लिया
जिंदगी किस रफ्तार से गुजर गयी पता भी न चल पाया!

धन का नशा उन्हें कुछ इतना चढ गया
सामने यमराज आये तो उन्हें भी धन से नहला दिया!

धन कमाने की रफ्तार जिंदगी से तेज थी
बुढ़ापा कब आया पता भी न चल सका!

October 6, 2012

मालशेज घाट

मालशेज घाट- बारिश और नजारा





 दोस्तों दो दिन से मै टूर पर था. जाते आते पूना से नजदीक मालशेज घाट से जाना पडा. ऊपर से बारिश थी. नजारा देखने लायक था. उपरवाले ने हमें क्या क्या दें दी है.

August 15, 2012

कवी संमेलन


कवी संमेलन


July 18, 2012

श्रद्धांजलि- एक सुपरस्टार को

अरी पुष्पा.................. ये आसू मत बहाओ रे..........हे डायलोग एक सुपरस्टार राजेश खन्ना के है. अपने ज़माने के सुपरस्टार थे वो.
आरी पुष्पा दुनिया में कोई अमर नहीं होता है रे. कल वो चला गया आज ये चला जायेगा और कल मई भी चला जाऊंगा रे. आज ये सुपरस्टार सचमुच ही इस दुनिया को अलबिदा कह चला गया.
निचे लिखी  सच्चाई  के साथ इस महँ कलाकार को श्रद्धांजलि.
 अरी पुष्पा यहाँ कोई 'अमर' नहीं है रे. 'अमर'  तो सिर्फ 'प्रेम' होता है. सिर्फ 'प्रेम' की 'आराधना' करो और जीवन 'आनद' पाओ रे.

May 18, 2012

मेरी कलाकारी

MS Paint में जो paint brush होता है उशी की सहायता से मैंने यह पेंटिंग ब्लेक & व्हाइट तैयार की है. जरा देखिये और अपना नजरिया बताइए!




May 12, 2012

समाज को बदल डालो...........

 

जी हां, आमीर खान ने यही किया है. अपने 'सत्यमेव जयते' इस कार्यक्रम के जरिये उन्होंने समाज को बदलनेका ही काम किया है. ६ मई को दरअसल मई थोड़ी देर ही यह कार्यक्रम देख सका क्योकि पावर नहीं थी. लेकिन जिताक देखा वाही यह समझने के लिए काफी था की बस अब बहुत हो गया अब समाज का पतन निश्चित कम होगा. 
दोस्तों. इंसान ऐसा होता है की उसे खुद कुछ नहीं समझाता उसे समझाना पडता है. पहले हमारे समाज को संत महात्मा समझते थे. अच्छी राह दिखाते थे. अब यह काम टी.व्ही. कर रहा है. समाज पर सबसे जादा असर पडता है टी.व्ही.का. आप जो कुछ अच्छा बुरा टी.व्ही.पर दिखाते है उसका असर बहुत जल्द समाज पर पडता है. इसी का फायदा आमिर ने उठाया और एक बहुत ही अच्छा काम हाथ में लिया है. मेरी शुभ कामनाये. 


'सत्यमेव जयते'

May 6, 2012

कुछ लोग ऐसे होते है

कुछ लोग  ऐसे होते है 
जिंदगी में धीमी आहट घुसे  चले आते है
और 
युही जिंदगी में झाँककर चले जाते है
पर अपनी ऐसी छाप झोडे जाते है
की जिंदगी भर याद आते है.