October 22, 2009

जब याद तुम्हारी आती है

जब याद तुम्हारी आती है
वो (नींद) हमसे रूठ कर
ओझल आखोसे हो जाती है.
जब याद तुम्हारी आती है

जब याद तुम्हारी आती है
करवट भी न बदली जाती है
जब याद तुम्हारी आती है

जब याद तुम्हारी आती है
आखो से नदिया बहती है
जब याद तुम्हारी आती है

जब याद तुम्हारी आती है
जब याद तुम्हारी आती है

4 comments:

अल्पना वर्मा said...

जब याद तुम्हारी आती है
आखो से नदिया बहती है..

फिर भी ये यादें ही तो हैं अनमोल खजाना..

brag said...

came here through simplypoet.com ..really nice poems you have here!!

रविंद्र रवि said...
This comment has been removed by the author.
Ravindra Ravi said...

धन्यवाद अल्पनाजी!!!