October 8, 2009

सदिया गुजर जाती है

जीवन में लम्हे लाखो होते है,
दो लम्हों के बिच फासला बहुत होता है,
तुम आखो से ओझल जो हो जाती हो
तो लगता है सदिया गुजर जाती है।

जिंदगी की गलियो में भटक जाते है हम
तुम्हे इन राहों में धुन्दते रह जाते है हम,
तुम आखो से ओझल जो हो जाती हो
तो लगता है सदिया गुजर जाती है।

जिंदगी के चौराहे पर मायूस हो जाते है हम,
उलझन में पड़ जाते है किस रह पे जाना है।
तुम आखो से ओझल जो हो जाती हो ,
तो लगता है सदिया गुजर जाती है।



1 comment:

Rakesh said...

lalitji
behad sunder bhavayakti
aapki lekhan shelly bhi prabhavit ker gayi ....bahut sunder