September 14, 2009

मैं व्यस्त हूँ (१९/२/१९८१)

मेरे जीवन की क्षणिकाओं मुझे मत छेडो,
मै व्यस्त हूँ अपने आपको लेकर
एक नई सृष्टि के निर्माण में,
उस नूतन सृष्टि के
जो मुझमे, मेरे अपने में है।
मैं विकृत हूँ,
मुझे मत छेडो ऐ क्षणीकाओ
मत छेडो मुझे,
वरन
किसी ग्रसित विणां की तरह,
मैं झंकृत हो जाऊंगा,
उसके टूटे हुए तारो की झंकार
तुम नही सुन सकोगी,
मै व्यस्त हूँ
विकृति को
सुकृत बनाने में
मुझे मत छेडो
मेरे जीवन की क्षनिकाओ मुजे मत छेडो,