September 14, 2009

मेरा मन

मैंने कोलेज के ज़माने मे कुछ कविताये लिखने की हिम्मत जुटी थी. उन्हें इस ब्लॉग पर पेश किया है. वैसे तो मुझे बचपन से ही इन चीजो में दिलचस्पी रही है. कोलेज में थोडा जूनून चढ़ गया था. सो लिख डाली सीधी साधी हिंदी में कविताये.कुछ चित्रकारी भी कर लेते थे. एक बार नोकरी करनी सुरु की और घर वालो ने सब को बांध देते है वैसे ही मुझे भी एक खूटे से बांध दिया. अजी गलत मत समझिये उन्नोने मेरी शादी जो कर दी. अजी फिर एक बार बिनती करता हूँ गलत मत समझिये. उन्नोने मेरी शादी कर दी तो मै भाई घर गृहस्थी मे उलझ गया और कविता या चित्रकला ऐसे कोई और चीजो को हाथ भी न लगा सका. आज ५० को पार कर चुके है, सभी समजदार हो गए है, बच्ची ने ब्लॉग लिखना सिखा दिया तो इसमे उलझाना सुरु कर दिया खुद को. एक अलग ही जूनून है अब. मजा आता है. अपनी वो २५-26 साल पुरानी डायरी बाहर निकली और उसके पन्ने पलटने सुर कर दिए. अपनी वो पुरानी लिखी हुई कविताये ब्लॉग मे डालना सुरु कर दिया. आप पढिये और अपना मत प्रर्दशित कीजिये।

मै अपनी हर एक कविता पर जिस साल वोमैंने लिखी है वह साल लिख रहा हूँ

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