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October 28, 2018

नाचीज़ इन्सां

नाचीज इन्सां...


आसमाँ से तारे भी टूट जाते है 


तो इस इन्सां का क्या 

 वो तो नाचीज है

कभी भी 

जिंदगी के आसमाँ से 

टूट कर गिर सकता है

यह सितारा

रविंद्र "रवी" 


October 18, 2018

ढलती उम्र


अब तो थक जाता हुँ
थोडी दूर चलने से,
मंज़िल नजर आती है
मगर फासला तय नहीं कर पाता।१।

काफिले नजर नहीं आते ,
मंजिलें नजर नहीं आती
उम्र ढल चुकी अब तो,
और दूर चला नहीं जाता।२।

बस अब और नही.
जिंदगी की राह गुजर जाये
चाहे अंधेरे हो या काँटे
इस राह में
नजर तो कुछ नही आना।३।

March 8, 2018

आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस...

कण कण को जीवन देती
तु हर घर में उजियारा लाती
तु नर की नारी है
तु सब से न्यारी है
तु ही माया, है तु ही ममता
तु ही लक्ष्मी, तु ही सीता
तेरे बिन उसका जीवन है रिता
जल, थल, आकाश में
जा पहुँची ये सबला
कैसे कहे कोई तुझे अबला।।
" जागतिक महिला दिन" पर सभी महिलाओ को समर्पित.
--रविंद्र "रवि " कोष्टी

February 2, 2018

खुशियाँ-१

खुशियों की अपनी ही
एक अदा होती है,
चुपके से आती है
और
सब को फिदा कर जाती है।

December 1, 2017

चाहत जीने की...

*एक चाहत होती है दोस्तो के साथ जीने की...*

*वरना पता तो हमे भी है मरना अकेले ही है...!!*

November 25, 2017

जिंदगी....

जब तक रास्ते समझ मे आते है
तब तक लाैटने का वक्त हो जाता है..
यही है जिंदगी...

November 19, 2017

दिल से

लाख नकाबों से छीपा लो खुद को
हम तो दिल की निगाहाें से दिदार करते हैं
लाख जुबाँ को सी ले वो
हम दिल से उनकी आवाज सुन लेते हैं।।

November 18, 2017

सुप्रभात

. .  . . 🙂सुप्रभात😀
मुस्कुराके हर पल बिताना सिखाे,
गमों को हँस के टालना सिखो ।
परेशानियाँ सभी को है जिंदगी में उन्हें भी हँसते हँसते जीना सिखो।।
https://ravindra1659.wordpress.com

November 9, 2017

गम का एहसास!!

जिदगी में गम न होते
अगर
खुशियों से आनंद कैसे
मिलता?
खुशियाँ न आती जिंदगी में
अगर
तो गम का अहसास कैसे होता?

रविंद्र "रवि " कोष्टी

जिंदगी की सच्चाई

"चलते चलते ठोकर लगना
गिरते गिरते संभलना
फिर भी गिर जाना
गिरते ही बौखलाना
हिम्मत बांध उठने की कोशिश
उठते उठते लडखडाना
फिर उठना कपडे झटकना
और चल पडना
अपने गंतव्य की ओर"
इसी का नाम तो
जिंदगी है
किसी ने पुछा जब मुझसे
मैंने बताई
जिंदगी की सच्चाई!

रविंद्र ""रवि " कोष्टी

October 20, 2017

दिवाली की रात

 दिवाली की रात
दूर आकाश में
छु कर
वो चाँद देखने की कोशिश करता होगा
यहाँ धरती पर
दिवाली की रात लोग
क्या-क्या कर रहे है
लेकिन उसकी आँखे
धरती पर जलते करोडो दियो 
लाखो पटाखों  की
जगमगाती  रोशनी से

चौंधिया  जाती होगी




October 19, 2017

Happy Diwali*****


September 29, 2017

शुभ दशहरा

             सर्व मित्रांना दसऱ्याच्या हार्दिक शुभेच्छा!!!!!!!

सभी दोस्तो को दशहरे की शुभ कामनाये !!!!!!!!

September 28, 2017

पूछो तो जाने

दोस्तों, इन्सान को उपरवाले ने कुछ इस तरह बनाया है की किसी भी चीज पर उसकी नजर जाये तुरंत ही उसके दिमाग में हलचल सुरु हो जाती है. यदि वह चीज जनि पहचानी है तो उसे उसका नाम तुरंत ही याद आ जाता है. यदि नहीं, तो वह सोचता रहता है "
ठीक इसी तरह उसके जहन में हर पल अनगिनत सवाल उठते रहते है. कई सवालों के वह जवाब  ही नहीं जान पाता और कई ऐसे सवाल होते है जिन्हें वह जानना तो चाहता है मगर उसे उसका जवाब ही नहीं मिल पाता.

जब से इंटरनेट आया है हमारा काम थोड़ा आसान हो गया है. कई सवालों के जवाब उस जंजाल में मिल जाते है.
लेकिन इन सवालो के जवाब जानने के लिए हम एक और तरिका अपना सकते है.
yahoo answer  और quora ये ऐसी ही साईट है जहा आप अपना सवाल डालिए, दुनियाभर से कोई न कोई आपके सवाल का जवाब जरुर देता है. मगर ये दोनों आंतर्राष्ट्रीय साईट है.
हाल ही में मेरी बेटी ने  ऐसी ही साईट खुद तैयार की  है और उसे लोन्च भी किया है.
ma.pruchha.com इस साईट पर आप मराठी में सवाल दाल सकते है और जवाब दे सकते है.
 pruchha.com भी ऐसी ही साईट है.
आप सभी दे निवेदन है की आप खुद, आपके बच्चे या और भी लोगो से इस साईट का इस्तेमाल करने के लिए कहे.

जिंदगी की रफ़्तार

रस्तो पे बाईक या कार चलाने वाले भाई यो से गुजरीस है की अपनी गाडी की रफ्तार अपने कबु में खे। इसी सिलसिले में एक कवीता पेश कर राहा हुं. जरा गौर फरमायेगा
" वाहन क्या है?
जिंदगी को एक जगह से
दूसरी जगह ले जाने भर का एक साधन ही तो है
लेकिन
इसकी रफ्तार यदि पकड़ से बहार चली जाये
तो
जिंदगी को इस दुनिया से
उस दुनिया में ले जाने का एक साधन बन जाती है."



इसलिए दोस्तों गाड़ी इतनी गति से चलाये की वह अपनी पकड़ में हो
चाहे जब उसे रोक सके
वरन

August 15, 2017

बचपन की यादे

बचपन की यादे 
वो बारिश के  दिन 
वो बरसात की रातें
वो बचपन की यादें!

फिर हुई वो बारिश सुबह 
फिर एक बारिश की शाम हुई,
फिर सूरज ढला,
फिर आई वो बरसात की रात,

ये सिलसिला
बरसात लेते आते  
रात दिन का 
यूँ ही चलता रहता था,
कई दिन ऐसे ही 
बारिश होते रहती थी,
नदियाँ
 अपने पुरे जोश में
बहा कराती थी कई दिन,

अब वो एक ख्वाब ही रह गया है.
सिलसिला तो अब भी चलता रहता है,
रात दिन का का
पर अब बारिश
 "कुछ पल" 
के लिए होती है
बाकि दिन तो धुप ही होती है.
पता ही नहीं चलता 
कब बारिश का मौसम आया 
और चला गया.........

कवी- रविन्द्र "रवि" ( कोष्टी) 
१५/०८/२०१७




October 26, 2013

सोने की चिडिया

एक दोस्त  दुसरे से बोला, " हमारा देश हजारो  साल पहले से सोने की चिडिया कहलाता था. लेकिन आज नही. वो फिरंगी सब कुछ लुट ले गये शायद."
" हा यार शायद, पर मेरा मन मानता ही नही."
"ऐसा क्यो? क्या कहता है तेरा मन?"
" मुझे लगता है हमारे पूर्वज इतने मुर्ख नही होंगे की वो फिरंगीयो को सब लुटने देते. सब पुर्वजो ने ज्यादा से ज्यादा सोना और जवाहरात जमीन में गाड कर रखे होंगे."
" तु सही कह रहा है यार! इसका मतलब सारा देश सोने की मिट्टी पर बसा है?"
" अरे सोच द्वारका समुद्र में डूब गयी थी. और श्रीकृष्णजी के समय में कितना सोना होता होगा. वो सब कहा गया?"
"हा यार समुंदर में भी सोना हो सकता है."
" ............................"
"..............................."

June 19, 2013

हाहाकार

दोस्तों इस साल उत्तराखंड या यु कहे सम्पूर्ण हिमालय परिसर में बारिश ने तबाही मचा रखी है. बारिश भी अजीब होती है. अब तक सुखा पड़ा था अबकी तबाही मची है. प्रकृति है की हमें ना तो ठीक से जीने देती है ना मरने देती.
मै २००७ में हिमाचल प्रदेश में गया था. शिमला में रुका था और नजदीक नाथपा झाकरी प्रोजेक्ट पर गया था.  ऑफिसियल काम से ही गया था. उस समय आदतन मैंने सम्पूर्ण शिमला और वहां से उस प्रोजेक्ट ताका के रास्ते का मुआयना किया था.मै तोनजारा देख हैरान हो  गया था. वहाँ लोग कैसे जीते होंगे यह सोच भी नहीं पा रहा था. क्योकि हर तरफ पहाड़ी ही थी. पहाड़ी पर ही बिल्डिंगे बनी हुई थी. वो भी २-३ मंजिला नहीं. १०-१० मंजिला. इ़तना ही नहीं सारे रास्ते मनी कई एक्सीडेंट हुए देखे थे. बिल्डिंगे गिरी हुई, बस गिरी हुई. क्योकि भारी बारिश की वजह से रास्ते ढह गए थे. जब हमारी कार ऐसे  रस्ते से गुजराती थी तो मै तो दिल थाम के बैठता था.
मैंने देखा की सारा हिमालय मिटटी का बना हुआ है. पत्थर का तो कही पता ही नहीं होता था. तभी मै अपने साथियो से बोला था यदि यहा धुआधार बारिश होती रही तो ये पहाड़ ढह जाने में देर नहीं लगेगी.
दोस्तों आज वही हो रहा है.
पहले हिमालय में बारिश कम हुआ करती थी सिर्फ बर्फ ही पड़ती थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वहां की बर्फ कम होती जा रही है और बारिश बढती जा रही है.


हमें अब भी मौक़ा है प्रकृति को समझने का वरन वो हमें ही समझा देगी की वो क्या है और उसकी ताकत क्या है.

December 29, 2012

आखिर कब तक…..................





अपनी ही माँ को अपने सामने कब तक पिटते देखती रहूंगी मै?
मेरे जनम पर अपनी माँ को बलि चढ़ता कब तक देखती रहूंगी मै?
जनम होते ही जिन्दा दफना देना मुझे कब तक देखती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै हू एक माँ, एक बेटी, एक बहन, एक पत्नी
जो तुब सब के घर को सजाती संवारती है
फिर भी कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक सांस की प्रताडना सहती रहूंगी मै,
दहेज की लालच में कब तक जलती रहूंगी मै,
क्या सांस ननद औरत नहीं होती?
कब तक उनके तानो को अपनी सास बनाती रहूंगी मै,
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक रावण के आँगन में बंधी रहूंगी मै?
कब तक अपनी कमजोरी को सहती रहूंगी मै?
माँ काली कब ऐसे ही कमजोर बनी रहूंगी मै?
कब तक छिछोरेपण से खुद को बचाती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

कब तक समाज के बलात्कार को सहती रहूंगी मै?
अगर जिन्दा बची तो कब तक अपनो की नजरो से बचती रहूंगी मै?
क्या वो अपने भी औरते नहीं होती?
क्या उन्हें औरत की इज्जत पता नहीं होती?
फिर भी कब तक उनकी घूरती नजरो से कब बचती रह सकुंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?

आज मेरी मौत का मातम मना रहे हो
कब तक ऐसे मातम बनाते रहोगे तुम?
कल को तुम सब भूल जाओगे
कोई दामिनी समाज की बुराइयो के बलि चढ गई
मुझे मातम नहीं बदला हुआ समाज चाहिए!
मै एक लडकी हूँ लेकिन मै माँ, बहन, बेटी, बहु, सास, ननद, नानी, दादी सब कुछ मुझमे ही तो है!

 -------- श्रध्दांजलि 
रविन्द्र रवि

December 25, 2012

MERRY CHRISTMAS