November 28, 2009

आहट

(दि। १३/११/१९८० को लिखी एक कविता मई यहाँ पेश कर रहा हु)
कोई दिल के द्वारे पे
धीरे-धीरे आता है।
फिर उस पे दस्तक दे
कही छुप जाता है।
दिल धड़कने लगता है।
कौन है जो आकर भी
कही छुप जाता है।
न रुला मेरे दिल को,
आ भी जा आ भी जा।
जब मै अकेले में
अंधेरे में बैठा हु
कोई आहट दे अंधेरे में खो जाता है
नज़रे फिर दूर दूर तक दौड़ती है
न मिलने पर किसी के
ये नज़रे उदास हो जाती है
न भूल मुझको तू
आ जा आ भी जा।
तेरे आने की आहट जब होती है
मेरे दिल के तार तब झन झना उठाते है
कोई धुन बजती है तेरी आहट पर
वो भी रुक जाती है, तेरे छुप जाने पर
मुझे आवाज तू दे, न भुला
आ भी जा आ भी जा.
तेरी याद आती है
बहारे खिल जाती है
सितारे निकल आते है
चाँद मुस्कराता है
फूल बरसते है
तेरे कदमो पर
न ठुकरा हमें
आ भी जा भी जा.

2 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Ravindra Ravi said...

धन्यवाद आपका.