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September 22, 2009

मै गुनहगार हूँ

मै गुनहगार हु इस देह का,
जिसकी चिता मैंने ३० साल पहले ही सुलगा दी थी।
जिसे मै 3० साल से तिल तिल कर जला रहा हूँ,
मेरा देह भीतर ही भीतर झुलस गया है उस आग से,
मै उन जख्मो को देख भी तो नही सकता,
जख्मो पर मरहम भी तो नही लगा सकता,
मै कुछ भी तो नही कर सकता,
मै कुछ भी तो नही कर सकता।
मैं बार बार बार उससे कहता हूँ मुझे बख्श दो,
"कुछ पल " की है जिंदगी जी भर के तो जीने दो
मगर वो है की मानती ही नही
मेरी परेशानियाँ जानती ही नही
मेरा जीवन अब हो गया है धुआ
इंतजार है मुझको कही से मिले दुआ
जो मैं उसकी दिल्लगी को लताड़ दू
अपनी जिंदगी को उसकी आगोश से निकाल दू
पर ये होगा की नही, ये मै नही जानता।
मै गुनहगार हूँ उनका जो मुझे
दिलो जां से चाहते है,
मै गुनाहगार हूँ मेरे अपनो का,
लेकिन मै कुछ भी तो नही कर सकता,
में कुछा भी नही कर सकता।
मेरा दिल अन्दर ही अन्दर जलता है
आग सी सुलगती है मेरे अन्दर
बहुत ही चाहता हूँ मै
सिगरेट छोड़ना पर अब मेरे हाथो मै कुछ नही
अब जो करना है उसे ही करना है
मै अब मेरा नही रहा !

September 19, 2009

मेरा मन और धुम्रपान

अभी अभी मुझे पता चला है।
मेरा मन मुझसे
खपा हो चला है।
नजदीक जाऊ तो गुर्राता है ।
मै परेशां हो जाता हूँ ।
पूछने पर वो कुछ भी बताने से कतराता है।
थोडी हिम्मत जुटाई
उसे प्यार से पुकारा और
पूछा तो उसने बताया ,
मै तुमसे बहुत खफा हूँ ।
तुम रोज रात को मुझसे वादा करते हो।
की तुम कल से धुम्रपान नहीं करोगे
लेकिन सुबह होते ही उसे गले से लगाते हो ।
मुझ से किये वादे भूल जाते हो ।
मै क्या करता,
चुपचाप उसके सामने गर्दन झुकाए खडा रहा .
मुह से एक शब्द भी न निकाल सका।
मन ही मन सोचता रहा,
और रात पुनः वादा करने को तैयार हो लिया ।