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September 21, 2019

दिल....

ख्वाबों मे लगाई थी
आग उनकी यादों को,
जाग गये तो अपने ही
दिल को जलते पाया हमने।
"रविंद्र 'रवी' कोष्टी"

September 14, 2019

गड़बड़ कहाँ हुई ..

गड़बड़ कहाँ हुई ..

दोस्तों, व्हाट्सएप ग्रुप में प्राप्त एक अच्छा संदेश यहाँ शेअर करना चाहता हुँ।

       एक बहुत ब्रिलियंट लड़का था। सारी जिंदगी फर्स्ट आया। साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया। अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन IIT चेन्नई में हो गया। वहां से B Tech किया और वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निया से MBA किया।

अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है। उसने वहां भी हमेशा टॉप ही किया। वहीं नौकरी करने लगा।  5बेडरूम का घर  उसके पास। शादी यहाँ चेन्नई की ही एक बेहद खूबसूरत लड़की से हुई।

एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में ? पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए, अमेरिका में सेटल हो गए, मोटी तनख्वाह की नौकरी, बीवी बच्चे, सुख ही सुख।

लेकिन दुर्भाग्य वश आज से चार साल पहले उसने वहीं अमेरिका में, सपरिवार आत्महत्या कर ली.अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली। What went wrong? आखिर ऐसा क्या हुआ, गड़बड़ कहाँ हुई।

ये कदम उठाने से पहले उसने बाकायदा अपनी wife से discuss किया,फिर एक लम्बा suicide नोट लिखा और उसमें बाकायदा अपने इस कदम को justify किया और यहाँ तक लिखा कि यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन परिस्थितयों में। उनके इस केस को और उस suicide नोट को California Institute of Clinical Psychology ने ‘What went wrong'? जानने के लिए study किया।पहले कारण क्या था, suicide नोट से और मित्रों से पता किया। अमेरिका की आर्थिक मंदी में उसकी नौकरी चली गयी। बहुत दिन खाली बैठे रहे। नौकरियां ढूंढते रहे। फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए और फिर भी जब नौकरी न मिली, मकान की किश्त जब टूट गयी, तो सड़क पर आने की नौबत आ गयी। कुछ दिन किसी पेट्रोल पम्प पर तेल भरा बताते हैं। साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर पति पत्नी ने अंत में ख़ुदकुशी कर ली. इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने :This man was programmed for success but he was not trained, how to handle failure.यह व्यक्ति सफलता के लिए तो तैयार था,पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया कि असफलता का सामना कैसे किया जाए। अब उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं। पढने में बहुत तेज़ था, हमेशा फर्स्ट ही आया। ऐसे बहुत से Parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते हैं कि बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये, कोई गलती न हो उस से। गलती करना तो यूँ मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया और इसके लिए वो सब कुछ करते हैं, हमेशा फर्स्ट आने के लिए। फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद, घूमना फिरना, लड़ाई झगडा, मार पीट, ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है बेचारों को, 12th कर के निकले तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद गया बेचारे पर, वहां से निकले तो MBA और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी। अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी, यानी बड़े बड़े targets कमबख्त ये दुनिया, बड़ी कठोर है और ये ज़िदगी,अलग से इम्तहान लेती है। आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे। वहां कितने नंबर लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है। और सवाल, सब out ऑफ़ syllabus होते हैं, टेढ़े मेढ़े, ऊट पटाँग और रोज़ इम्तहान लेती है। कोई डेट sheet नहीं।एक अंग्रेजी उपन्यास में एक किस्सा पढ़ा था। एक मेमना अपनी माँ से दूर निकल गया। आगे जा कर पहले तो भैंसों के झुण्ड से घिर गया। उनके पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह। अभी थोडा ही आगे बढ़ा था कि एक सियार उसकी तरफ झपटा। किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई तो सामने से भेड़िये आते दिखे। बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा, किसी तरह माँ के पास वापस पहुंचा तो बोला, माँ, वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग बच्चों को अवश्य दीजिये।
विशेष -बच्चों को बस किताबी कीडा मत बनाईये, बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक, समाजिक व संस्कार भी देना जरूरी है, हर परिस्थिति को ख़ुशी ख़ुशी धैर्य के साथ झेलने की क्षमता और उससे उबरने का ज्ञान और विवेक बच्चों में होना ज़रूरी है।
Don't  make them machine with brain rather humans with emotions and feelings 

बच्चे हमारे है, जान से प्यारे है।

August 4, 2019

माँ की ममता...

अपने पिता की मृत्यु के बाद बेटे ने अपनी माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ दिया और कभी कभार उनसे मिलने चला जाता था ।

  एक शाम उसे वृद्धाश्रम से फ़ोन आया कि तुम्हारी माता जी की तबियत बहुत ख़राब है, एक बार आकर मिल लो ।
 
    पुत्र वहाँ गया तो उसने देखा कि माँ कि हालत बहुत गंभीर और मरणासन्न है ।

   उसने पूछा :- माँ मैं आपके लिये क्या कर सकता हूँ ?

  माँ ने जवाब दिया :- कृपा करके वृद्धाश्रम में पंखे लगवा दे यहाँ एक भी नहीं है
    और हाँ एक फ्रिज भी रखना देना ताकि खाना ख़राब ना हो क्योंकि कई बार मुझे बिना खाए ही सोना पड़ा ।
  पुत्र ने आश्चर्यचकित होकर पूछा :- माँ, आपको यहाँ इतना समय हो गया आपने कभी शिकायत नहीं करी, अब जब आपके जीवन का कुछ ही समय बचा है तब आप मुझे यह सब बता रही हो ।क्यों ?

  माँ ने जवाब दिया :- ठीक है बेटा, मैंने तो गर्मी, भूख और दर्द सब बर्दाश्त तर लिया, लेकिन.......
    जब तुम्हारी औलाद तुम्हें यहाँ भेजेगी तो मुझे डर है कि तुम ये सब सह नहीं पाओगे

   शानदार, अतुलनीय और आगे भेजने लायक.

July 31, 2019

सादगी

उनकी सादगी के क्या कहने?
बगियाँ मे सैर करती है
तो फुल भी शरमा जाते है.

July 30, 2019

उलझनें

कुछ उलझनें
वक्त के साथ हल हो जाती है,
उन्हे वही छोड देना ही
ठिक होता है
सुलझने के लिए।

July 20, 2019

अपोलो 11

दोस्तों, विज्ञान जगत में आज का दिन बहुत खास माना जाता है। 50 साल पहले 20 जुलाई 1969 को अमेरिका का अपोलो 11 यह अंतरिक्ष यान पहलीबार चांद्रभुमी पर मानव लेकर उतरा था।
चांद्रभूमी पर पहला कदम रखनेवाला मानव था निल आर्मस्ट्राँग और दुसरे का नाम था एडविन ऑल्ड्रिन. 
यह एक ऐतिहासिक दिन था।

June 16, 2019

जिंदगी का एक और दिन.....

देखा,
जिंदगी का एक और दिन गुजर गया
इतिहास मे खुद को समाने के लिए,
तब
आज को याद आया
कुछ तो रह गया है कल का कर गुजरने के लिए
पर, आज सोचता रहा अब कर लेता हुँ
लेकिन आलस ने उसे रोक दिया और
छोड दिया कल करने के लिए
लेकिन नाकाम आज, आज भी न कर सका कल का बचा काम
और देखते ही देखते
जिंदगी का एक और दिन गुजर गया
इतिहास मे खुद को समाने के लिए।

June 10, 2019

उम्र गुजर जाती है.....

उम्र गुजर जाती है
सवालों को जवाबों
तक ले जाने के लिए,
या फिर ठहर जाते है वो
रुह को खामोशी में जलाने के लिए ।१।
(क्रमशः)
(दोस्तों ये मैने नहीं मेरी बेटी ने लिखी है)

June 1, 2019

जन्मदिवस.....

60 के दशक तक जिन लोगों ने जन्म लिया है उनकी जन्म तारीख तकरिबन 1 जून ही है। ऐसा मैने अपने जीवनकाल मे अनुभव किया है। इसका कारण है अपने देश मे उस समय तक पढाई को उतना महत्त्व नही था। माता पिता पढेलिखे न होने से बच्चों के जनम दिन कोई याद नही रखता था।
जब बच्चों का पाठशाला मे प्रवेश करवाने पहुँचते थे तब शिक्षक जनम तारिख पुछते तो  याद की जाती थी जन्म के पहले या बाद मे घटित घटनाएँ।
वो भुकंप आया था उसके एक महिने बाद ये पैदा हुआ था। या बहुत बडा अकाल पडा था उस समय ये 2 माह का था। बस इन्ही घटनाओं के आधार पर जनम दिन निश्चित हुआ करते थे।
जिन बच्चों के माता पिता कुछ पढे हुए होते वे कही लिखकर रखते या अस्पताल से प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेते थे।
हाँ उन दिनो दाई माँ को ही बुलाया करते थे अस्पताल तो बहुत कम लोग जाते थे।
इनमे से एक बच्चा मै हुँ।
आज एक जून जो सार्वजनिक जन्म दिन भी कहलाता है।
पाठशाला मे प्रवेश करते समय पिताजी को याद नही था इसलिए एक जून लिखी गयी।

April 27, 2019

ये तेरा घर ये मेरा घर

कुछ साल पहले किसी ने एक अलौकिक शहर बसाया. नाम रखा फेसबुक. धीरे धीरे लोग वहाँ अपना डेरा जमाने लगे. फिर अपना घर ही बना लिया। देखते ही देखते करोडों लोगों ने वहाँ अपने घर बना लिए।

फिर एक और शख्स आए और उस दुनिया का नाम रखा व्हाट्सएप। लोगों ने यहाँ भी अपना डेरा लगाना शुरु किया।  देखते ही देखते इस दुनिया ने भी अपना विहंगम रुप दिखा दिया।

फिर कोई आया जिसने इंस्टाग्राम नामक दुनिया बसाना शुरु किया। यहाँ भी लोगों ने घर बनाने शुरु किये।

इस तरह लोग आते गये नयी दुनिया बसाते गये।
अब हर किसी ने अपना घर हर नयी दुनिया में बना लिया है। कभी इस घर कभी उस घर घुमना सबकी दिनचर्या बन गयी।
और कहने लगे ये मेरा घर ये तेरा घर।

April 19, 2019

तब और अब

पहले परिवार बडे हुआ करते थे
और घर छोटे ।
अब परिवार छोटे होते है
और घर बडे।

April 16, 2019

बुढापा...

उलझी हुई जिंदगी को
सुलझाते सुलझाते ही
कब बुढापा आ बरपा 
हमें पता ही न चला।

दर्द.

दर्द इस कदर छाया है
जिंदगी में
दर्द अगर नदारद हो
जिंदगी से
तो बहुत दर्द होता है।

खुशियों की बरसात...

खाली खाली
दिन कटें
सुनी सुनी रातें।
अब तो आजा
साथ हो चले
हो शायद
खुशीयों की बरसातें।।

तिनका...

तुम्हें मुबारक हो खुशी
हमें गम ही सही
जीने के लिए बस
तिनके का सहारा काफी है।

दस्तक...

सुना है खुशियाँ
नशीबवालों के दर पे
ही दस्तक देती है,
हम वो खुशनसीब कहाँ
हम तो गमों के सहारे
ही जी लेते है।

ऐतबार...

आजकल कुछ अजी
दौर से गुजर रहा हुँ यारों
हर पल नब्ज टटोलकर
ये  ऐतबार कर लेता हुँ
कि दिल ने कहीं
धडकना तो बंद नही कर दिया।

जिंदगी...

जिंदगी ने कुछ इस तरह
उलझाए रखा हमें
बचपन से कब बुढापे में
पहुँचे पता ही न चला।

ऐ जिंदगी...

ऐ जिंदगी मुझे शिकवा है
तुझसे, काश तु न होती
तो मैं खुशी से जी लेता
इक परिंदे की तरह।

March 29, 2019

मच्छरों से छुटकारा☺️☺️

आजकल घरवाली को एक जुनून सवार है। हर रोज यू ट्यूब पर रसोई के तरह तरह के चेनल देखने का जुनून। राज की बात बताऊ? मन ही मन मै खुश होता हुँ। पुछो क्यो? अरे भाई छुटकारा जो मिल जाता है।☺️
खैर।
परसो रात युट्यूब देख रही थी तब मच्छर परेशान कर रहे। वैसे रोज ही करते है। सभी को करते होगे!! वह बोली, जरा युट्यूब पर देखना मच्छर भगाने का कोई नायाब तरिका है क्या? सुनते ही  मैने देखना शुरु किया। अलग अलग व्हिडीओ मिले। और उनको दिखाये। कुछ पसंद नयी आये शायद।
आज रात वो अचानक बोली, अजी क्या हुआ? आज एक भी मच्छर नही आया। शायद डर गये  कल के हमारा  युट्यूब सर्च से!☺️
अरे ये तो नायाब तरिका मिला मच्छरों से छुटकारा पाने का! मैने अपनी पिठ थपथपाई☺️ वो बोली जी रहने दिजिए शाबासकी तो मुझे मिलनी चाहिए मैने ही आपको कहा था सर्च करने को। मै क्या करता दुनिया की रित ही है हर घर मे होम मिनिस्टर की ही चलती है। 😢😢