January 9, 2010

ये क्या हो रहा है?

आजकल के बच्चे इतने समझदार हुये होंगे ये तो उनके माता पिताओ को भी मालूम नही होगा. पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र में तक़रीबन १२ छोटे बड़े बछो ने आत्म हत्या की है. यह बहुत ही गंभीरता से सोचने वाली बात है. ये क्या हो गया है इन बच्चो को. क्यो इतने निराश हो रहे है ये बच्चे? मां बाप मजबूर हो गये है इस बात पर विचार करने पर. मै तो उन माता पिताओ को विनंती करना चाहता हु जिनके बच्चे छोटे की अपने बच्चो से प्यार से पेश आये. उनका मन बहुत कमजोर होता है. जो बात प्यार से बनती है वह घुस्से से नहीं बनती. घुस्सा करने से बच्चो के मन पर बुरा असर पड़ता है.सोचने वाली बात है कि ४ थी और ५ वी में जाने वाले बच्चे आत्महत्या करने को क्यो मजबूर हो गये? हर माँ बाप चाहते है की उनका बच्चा टाटा बिरला बने या अंबानी बने. ये कैसे हो सकता है. सोचिये यदि सब लोक करोडपति बन गए तो यह दुनिया कैसे चलेगी. दुनिया चलने के लिए हर तरह के लोगो की जरुरत होती है. सब लोक यदि पैसे वाले हो गए तो आपका घर बंधने के लिए मजदुर कहा से आयेंगे. आपके घर का काम कौन करेगा. आप तो कोर्द्पति हो गए होंगे तो जाहिर है करोड़ पति लोग खाना नहीं पका सकते बर्तन नहीं मांझ सकते फिर ये काम करेगा कौन? मेरे कहने का मतलब यह है की दुनिया में जिस तरह से अमीरों की जरुरत होती है वैसे ही गरीबो की जरुरत भी होती है. जैसे पुण्य होता है वैसे पाप भी होता है.जैसे पोजिटिव होता है वैसे निगेटिव भी होता ही है. उत्तर है तो उसके विरुद्ध दक्षिण है.
इसीलिए अपने बच्चो को ठीक से पढाये लेकिन उसपर अपनी मर्जी न थोपे. उसकी मर्जीसे भी थोडा बहुत करने दे.

4 comments:

रावेंद्रकुमार रवि said...

"आपके सुझाव काफी हद तक सही हैं!"
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ओंठों पर मधु-मुस्कान खिलाती, रंग-रँगीली शुभकामनाएँ!
नए वर्ष की नई सुबह में, महके हृदय तुम्हारा!
संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ", उर्दू कौन सी भाषा का शब्द है?
संपादक : "सरस पायस"

Ravindra Ravi said...

धन्यवाद रावेंद्र जी!

साळसूद पाचोळा said...

जब कोइ गलती होती है, तो डर के कारन आदमी/बच्चा आगे क्या करना चाहिये इसी कंनफुजन में रहता है... इस गलती से बाहर कैसे निकले इसका सोलुशन ढुंढते वो फिरता रहता है.. उसी समय किसी फिल्म में, या सच के जीवन मे वो उसके प्रश्न से मिलजी-जुलती घटना देखता है, ओर उसी का अनुकरण करता है.. ३- इडियट, शक्तीमान धारावाइक देखकर बहोत बच्चोंने उसका अनुकरन करके जान गवाइ है.

. जीवन के ये कुछ पल ओर कसे बढेंगे यही सोचना चाहिये..

Ravindra Ravi said...

फार वाईट वाटत मुलांबद्दल विचार करुन.