December 1, 2008

कुछ पल


कुछ पल (१-८-१९८३)
कुछ पल चलना चाहता हु मैं ,
इस रहगुज़र के खूबसूरत लम्हों को ,
पाना चाहता हु मैं ,
मैं नही जानता की मेरी मंज़िल
मुझे मिलेगी या नही
मंजिल से बेख़बर रहकर
कुछ पल चलना चाहता हु मैं
......................
रविन्द्र रवि

2 comments:

संजय भास्कर said...

मेरे पास शब्द नहीं हैं!!!!

tareef ke liye

salaam sir ji...........

Ravindra Ravi said...

धन्यवाद सरजी. आपका पुनरागमन अच्छा लगा.