October 20, 2012

धन कमाने की रफ्तार

धन कमाने की चाह ने उन्हें कुछ ऐसा जकड लिया
जिंदगी किस रफ्तार से गुजर गयी पता भी न चल पाया!

धन का नशा उन्हें कुछ इतना चढ गया
सामने यमराज आये तो उन्हें भी धन से नहला दिया!

धन कमाने की रफ्तार जिंदगी से तेज थी
बुढ़ापा कब आया पता भी न चल सका!

7 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत बढिया

रविंद्र "रवी" said...

धन्यवाद सरजी!

मंथन said...

चार पैसो के लिए शहर में निकल आये फिर वापिस घर चार कंधो पर ही आये

Anonymous said...

Thanks for the informative article, it was a good read and I hope its ok that I share this with some facebook friends. Thanks.

Savita Mishra said...

बढ़िया ....

Savita Mishra said...

बढ़िया ......

Savita Mishra said...

बढ़िया .....