Digital Hindi Blogs
September 29, 2017
September 28, 2017
पूछो तो जाने
दोस्तों, इन्सान को उपरवाले ने कुछ इस तरह बनाया है की किसी भी चीज पर उसकी नजर जाये तुरंत ही उसके दिमाग में हलचल सुरु हो जाती है. यदि वह चीज जनि पहचानी है तो उसे उसका नाम तुरंत ही याद आ जाता है. यदि नहीं, तो वह सोचता रहता है "
ठीक इसी तरह उसके जहन में हर पल अनगिनत सवाल उठते रहते है. कई सवालों के वह जवाब ही नहीं जान पाता और कई ऐसे सवाल होते है जिन्हें वह जानना तो चाहता है मगर उसे उसका जवाब ही नहीं मिल पाता.
जब से इंटरनेट आया है हमारा काम थोड़ा आसान हो गया है. कई सवालों के जवाब उस जंजाल में मिल जाते है.
लेकिन इन सवालो के जवाब जानने के लिए हम एक और तरिका अपना सकते है.
yahoo answer और quora ये ऐसी ही साईट है जहा आप अपना सवाल डालिए, दुनियाभर से कोई न कोई आपके सवाल का जवाब जरुर देता है. मगर ये दोनों आंतर्राष्ट्रीय साईट है.
हाल ही में मेरी बेटी ने ऐसी ही साईट खुद तैयार की है और उसे लोन्च भी किया है.
ma.pruchha.com इस साईट पर आप मराठी में सवाल दाल सकते है और जवाब दे सकते है.
pruchha.com भी ऐसी ही साईट है.
आप सभी दे निवेदन है की आप खुद, आपके बच्चे या और भी लोगो से इस साईट का इस्तेमाल करने के लिए कहे.
ठीक इसी तरह उसके जहन में हर पल अनगिनत सवाल उठते रहते है. कई सवालों के वह जवाब ही नहीं जान पाता और कई ऐसे सवाल होते है जिन्हें वह जानना तो चाहता है मगर उसे उसका जवाब ही नहीं मिल पाता.
जब से इंटरनेट आया है हमारा काम थोड़ा आसान हो गया है. कई सवालों के जवाब उस जंजाल में मिल जाते है.
लेकिन इन सवालो के जवाब जानने के लिए हम एक और तरिका अपना सकते है.
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pruchha.com भी ऐसी ही साईट है.
आप सभी दे निवेदन है की आप खुद, आपके बच्चे या और भी लोगो से इस साईट का इस्तेमाल करने के लिए कहे.
जिंदगी की रफ़्तार
रस्तो पे बाईक या कार चलाने वाले भाई यो से गुजरीस है की अपनी गाडी की रफ्तार अपने कबु में रखे। इसी सिलसिले में एक कवीता पेश कर राहा हुं. जरा गौर फरमाइयेगा।
" वाहन क्या है?
जिंदगी को एक जगह से
दूसरी जगह ले जाने भर का एक साधन ही तो है
लेकिन
इसकी रफ्तार यदि पकड़ से बहार चली जाये
तो
जिंदगी को इस दुनिया से
उस दुनिया में ले जाने का एक साधन बन जाती है."
इसलिए दोस्तों गाड़ी इतनी गति से चलाये की वह अपनी पकड़ में हो
चाहे जब उसे रोक सके
वरन
" वाहन क्या है?
जिंदगी को एक जगह से
दूसरी जगह ले जाने भर का एक साधन ही तो हैलेकिन
इसकी रफ्तार यदि पकड़ से बहार चली जाये
तो
जिंदगी को इस दुनिया से
उस दुनिया में ले जाने का एक साधन बन जाती है."
इसलिए दोस्तों गाड़ी इतनी गति से चलाये की वह अपनी पकड़ में हो
चाहे जब उसे रोक सके
वरन
August 15, 2017
बचपन की यादे
बचपन की यादे
वो बारिश के दिन
वो बरसात की रातें
वो बचपन की यादें!
फिर हुई वो बारिश सुबह
फिर एक बारिश की शाम हुई,
फिर सूरज ढला,
फिर आई वो बरसात की रात,
ये सिलसिला
बरसात लेते आते
रात दिन का
यूँ ही चलता रहता था,
कई दिन ऐसे ही
बारिश होते रहती थी,
नदियाँ
अपने पुरे जोश में
बहा कराती थी कई दिन,
अब वो एक ख्वाब ही रह गया है.
सिलसिला तो अब भी चलता रहता है,
रात दिन का का
पर अब बारिश
"कुछ पल"
के लिए होती है
बाकि दिन तो धुप ही होती है.
पता ही नहीं चलता
कब बारिश का मौसम आया
और चला गया.........
कवी- रविन्द्र "रवि" ( कोष्टी)
१५/०८/२०१७
October 26, 2013
सोने की चिडिया
एक दोस्त दुसरे से बोला, " हमारा देश हजारो साल पहले से सोने की चिडिया कहलाता था. लेकिन आज नही. वो फिरंगी सब कुछ लुट ले गये शायद."
" हा यार शायद, पर मेरा मन मानता ही नही."
"ऐसा क्यो? क्या कहता है तेरा मन?"
" मुझे लगता है हमारे पूर्वज इतने मुर्ख नही होंगे की वो फिरंगीयो को सब लुटने देते. सब पुर्वजो ने ज्यादा से ज्यादा सोना और जवाहरात जमीन में गाड कर रखे होंगे."
" तु सही कह रहा है यार! इसका मतलब सारा देश सोने की मिट्टी पर बसा है?"
" अरे सोच द्वारका समुद्र में डूब गयी थी. और श्रीकृष्णजी के समय में कितना सोना होता होगा. वो सब कहा गया?"
"हा यार समुंदर में भी सोना हो सकता है."
" ............................"
"..............................."
" हा यार शायद, पर मेरा मन मानता ही नही."
"ऐसा क्यो? क्या कहता है तेरा मन?"
" मुझे लगता है हमारे पूर्वज इतने मुर्ख नही होंगे की वो फिरंगीयो को सब लुटने देते. सब पुर्वजो ने ज्यादा से ज्यादा सोना और जवाहरात जमीन में गाड कर रखे होंगे."
" तु सही कह रहा है यार! इसका मतलब सारा देश सोने की मिट्टी पर बसा है?"
" अरे सोच द्वारका समुद्र में डूब गयी थी. और श्रीकृष्णजी के समय में कितना सोना होता होगा. वो सब कहा गया?"
"हा यार समुंदर में भी सोना हो सकता है."
" ............................"
"..............................."
June 19, 2013
हाहाकार
दोस्तों इस साल उत्तराखंड या यु कहे सम्पूर्ण हिमालय परिसर में बारिश ने तबाही मचा रखी है. बारिश भी अजीब होती है. अब तक सुखा पड़ा था अबकी तबाही मची है. प्रकृति है की हमें ना तो ठीक से जीने देती है ना मरने देती.
मै २००७ में हिमाचल प्रदेश में गया था. शिमला में रुका था और नजदीक नाथपा झाकरी प्रोजेक्ट पर गया था. ऑफिसियल काम से ही गया था. उस समय आदतन मैंने सम्पूर्ण शिमला और वहां से उस प्रोजेक्ट ताका के रास्ते का मुआयना किया था.मै तोनजारा देख हैरान हो गया था. वहाँ लोग कैसे जीते होंगे यह सोच भी नहीं पा रहा था. क्योकि हर तरफ पहाड़ी ही थी. पहाड़ी पर ही बिल्डिंगे बनी हुई थी. वो भी २-३ मंजिला नहीं. १०-१० मंजिला. इ़तना ही नहीं सारे रास्ते मनी कई एक्सीडेंट हुए देखे थे. बिल्डिंगे गिरी हुई, बस गिरी हुई. क्योकि भारी बारिश की वजह से रास्ते ढह गए थे. जब हमारी कार ऐसे रस्ते से गुजराती थी तो मै तो दिल थाम के बैठता था.
मैंने देखा की सारा हिमालय मिटटी का बना हुआ है. पत्थर का तो कही पता ही नहीं होता था. तभी मै अपने साथियो से बोला था यदि यहा धुआधार बारिश होती रही तो ये पहाड़ ढह जाने में देर नहीं लगेगी.
दोस्तों आज वही हो रहा है.
पहले हिमालय में बारिश कम हुआ करती थी सिर्फ बर्फ ही पड़ती थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वहां की बर्फ कम होती जा रही है और बारिश बढती जा रही है.
हमें अब भी मौक़ा है प्रकृति को समझने का वरन वो हमें ही समझा देगी की वो क्या है और उसकी ताकत क्या है.
मै २००७ में हिमाचल प्रदेश में गया था. शिमला में रुका था और नजदीक नाथपा झाकरी प्रोजेक्ट पर गया था. ऑफिसियल काम से ही गया था. उस समय आदतन मैंने सम्पूर्ण शिमला और वहां से उस प्रोजेक्ट ताका के रास्ते का मुआयना किया था.मै तोनजारा देख हैरान हो गया था. वहाँ लोग कैसे जीते होंगे यह सोच भी नहीं पा रहा था. क्योकि हर तरफ पहाड़ी ही थी. पहाड़ी पर ही बिल्डिंगे बनी हुई थी. वो भी २-३ मंजिला नहीं. १०-१० मंजिला. इ़तना ही नहीं सारे रास्ते मनी कई एक्सीडेंट हुए देखे थे. बिल्डिंगे गिरी हुई, बस गिरी हुई. क्योकि भारी बारिश की वजह से रास्ते ढह गए थे. जब हमारी कार ऐसे रस्ते से गुजराती थी तो मै तो दिल थाम के बैठता था. मैंने देखा की सारा हिमालय मिटटी का बना हुआ है. पत्थर का तो कही पता ही नहीं होता था. तभी मै अपने साथियो से बोला था यदि यहा धुआधार बारिश होती रही तो ये पहाड़ ढह जाने में देर नहीं लगेगी.
दोस्तों आज वही हो रहा है.
पहले हिमालय में बारिश कम हुआ करती थी सिर्फ बर्फ ही पड़ती थी. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वहां की बर्फ कम होती जा रही है और बारिश बढती जा रही है.
हमें अब भी मौक़ा है प्रकृति को समझने का वरन वो हमें ही समझा देगी की वो क्या है और उसकी ताकत क्या है.
December 29, 2012
आखिर कब तक…..................
अपनी ही माँ को अपने सामने कब तक पिटते देखती रहूंगी मै?
मेरे जनम पर अपनी माँ को बलि चढ़ता कब तक देखती रहूंगी मै?
जनम होते ही जिन्दा दफना देना मुझे कब तक देखती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?
कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै हू एक माँ, एक बेटी, एक बहन, एक पत्नी
जो तुब सब के घर को सजाती संवारती है
फिर भी कब तक हैवानियत का शिकार होती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?
कब तक सांस की प्रताडना सहती रहूंगी मै,
दहेज की लालच में कब तक जलती रहूंगी मै,
क्या सांस ननद औरत नहीं होती?
कब तक उनके तानो को अपनी सास बनाती रहूंगी मै,
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?
कब तक रावण के आँगन में बंधी रहूंगी मै?
कब तक अपनी कमजोरी को सहती रहूंगी मै?
माँ काली कब ऐसे ही कमजोर बनी रहूंगी मै?
कब तक छिछोरेपण से खुद को बचाती रहूंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?
कब तक समाज के बलात्कार को सहती रहूंगी मै?
अगर जिन्दा बची तो कब तक अपनो की नजरो से बचती रहूंगी मै?
क्या वो अपने भी औरते नहीं होती?
क्या उन्हें औरत की इज्जत पता नहीं होती?
फिर भी कब तक उनकी घूरती नजरो से कब बचती रह सकुंगी मै?
मै एक लडकी हूँ क्या है ये मेरा कसूर ?
आज मेरी मौत का मातम मना रहे हो
कब तक ऐसे मातम बनाते रहोगे तुम?
कल को तुम सब भूल जाओगे
कोई दामिनी समाज की बुराइयो के बलि चढ गई
मुझे मातम नहीं बदला हुआ समाज चाहिए!
मै एक लडकी हूँ लेकिन मै माँ, बहन, बेटी, बहु, सास, ननद,
नानी, दादी सब कुछ मुझमे ही तो है!
-------- श्रध्दांजलि
रविन्द्र रवि
December 25, 2012
November 7, 2012
November 6, 2012
October 26, 2012
October 20, 2012
धन कमाने की रफ्तार
धन कमाने की चाह ने उन्हें कुछ ऐसा जकड लिया
जिंदगी किस रफ्तार से गुजर गयी पता भी न चल पाया!
धन का नशा उन्हें कुछ इतना चढ गया
सामने यमराज आये तो उन्हें भी धन से नहला दिया!
धन कमाने की रफ्तार जिंदगी से तेज थी
बुढ़ापा कब आया पता भी न चल सका!
जिंदगी किस रफ्तार से गुजर गयी पता भी न चल पाया!
धन का नशा उन्हें कुछ इतना चढ गया
सामने यमराज आये तो उन्हें भी धन से नहला दिया!
धन कमाने की रफ्तार जिंदगी से तेज थी
बुढ़ापा कब आया पता भी न चल सका!
October 6, 2012
August 15, 2012
July 18, 2012
श्रद्धांजलि- एक सुपरस्टार को
अरी पुष्पा.................. ये आसू मत बहाओ रे..........हे डायलोग एक सुपरस्टार राजेश खन्ना के है. अपने ज़माने के सुपरस्टार थे वो.
आरी पुष्पा दुनिया में कोई अमर नहीं होता है रे. कल वो चला गया आज ये चला जायेगा और कल मई भी चला जाऊंगा रे. आज ये सुपरस्टार सचमुच ही इस दुनिया को अलबिदा कह चला गया.
निचे लिखी सच्चाई के साथ इस महँ कलाकार को श्रद्धांजलि.
अरी पुष्पा यहाँ कोई 'अमर' नहीं है रे. 'अमर' तो सिर्फ 'प्रेम' होता है. सिर्फ 'प्रेम' की 'आराधना' करो और जीवन 'आनद' पाओ रे.
आरी पुष्पा दुनिया में कोई अमर नहीं होता है रे. कल वो चला गया आज ये चला जायेगा और कल मई भी चला जाऊंगा रे. आज ये सुपरस्टार सचमुच ही इस दुनिया को अलबिदा कह चला गया.
निचे लिखी सच्चाई के साथ इस महँ कलाकार को श्रद्धांजलि.
अरी पुष्पा यहाँ कोई 'अमर' नहीं है रे. 'अमर' तो सिर्फ 'प्रेम' होता है. सिर्फ 'प्रेम' की 'आराधना' करो और जीवन 'आनद' पाओ रे.
May 18, 2012
May 12, 2012
समाज को बदल डालो...........
जी हां, आमीर खान ने यही किया है. अपने 'सत्यमेव जयते' इस कार्यक्रम के जरिये उन्होंने समाज को बदलनेका ही काम किया है. ६ मई को दरअसल मई थोड़ी देर ही यह कार्यक्रम देख सका क्योकि पावर नहीं थी. लेकिन जिताक देखा वाही यह समझने के लिए काफी था की बस अब बहुत हो गया अब समाज का पतन निश्चित कम होगा.
दोस्तों. इंसान ऐसा होता है की उसे खुद कुछ नहीं समझाता उसे समझाना पडता है. पहले हमारे समाज को संत महात्मा समझते थे. अच्छी राह दिखाते थे. अब यह काम टी.व्ही. कर रहा है. समाज पर सबसे जादा असर पडता है टी.व्ही.का. आप जो कुछ अच्छा बुरा टी.व्ही.पर दिखाते है उसका असर बहुत जल्द समाज पर पडता है. इसी का फायदा आमिर ने उठाया और एक बहुत ही अच्छा काम हाथ में लिया है. मेरी शुभ कामनाये.
'सत्यमेव जयते'
May 6, 2012
कुछ लोग ऐसे होते है
कुछ लोग ऐसे होते है
जिंदगी में धीमी आहट घुसे चले आते है
और
युही जिंदगी में झाँककर चले जाते है
पर अपनी ऐसी छाप झोडे जाते है
की जिंदगी भर याद आते है.
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