अभी अभी मैं नींद से जागा हूँ,
सपने में एक बड़ा सा आइना देखा
आईने में खुद को निहारते देखा
देखते ही में लडखडाया
जल्द ही खुद को संभाल न पाया
क्योकि
आईने में ख़ुद को जरुरत से ज्यादा बुढा पाया
बालो का वो सफेद रंग
मुझको बिलकुल नहीं भाया
पर क्या करू?
हालात को झूठलातो नहीं सकता
बुढापा जो बरपा है
छुपा तो नहीं सकता
खुदा ने दिया है
जीवन उसे जी भर कर तो जीना है
बुढे हुए ये सोच कर तो न मरना है
मरने की सोच आते ही
मै नींद में भी डर गया
ख़ुद संभलते संभलते ही
लड़खड़ाके गिर गया
गिरते ही नींद खुल गयी
और उठा तो सीधे कंप्युटर पे आ गया
और अपना वो सपना
ब्लॊग पर लिख गया
