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March 27, 2020

कोरोना का कहर...

दोस्तों, इस कोरोना ने सारी दुनिया को घर में बंद होने को मजबूर कर दिया है। आज सारी दुनिया ही अपने ही घर में कैद हो गयी है। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक खुली आँखों को न दिखाई देनेवाला वो भी निर्जीव कण सारी दुनिया को इस तरह तकलिफ मे ला सकता है। इस तरह की आपदा से निपटने के लिए कोई भी देश तैयारी में नहीं था। 

इंटरनेट से गुगल पर एक बहुत ही अच्छी इमेज मिली है। जिसमें धरती को मास्क पहनाया गया है। उसे भी शेअर कर रहा हुँ।

March 16, 2020

भाग्यशाली...

भाग्यशाली वह नहीं होते जिन्हें सब कुछ अच्छा मिलता है,
बल्कि वह होते हैं जिन्हें जो मिलता है
उसे वे अच्छा बना लेते हैं!                      

           *Good morning*
         🙏 *सुप्रभात* 🙏

March 14, 2020

चिंता और चिंतन

चिंता उलझाती है और
चिंतन सुलझाता है...

चिंता करोगे तो उलझ जाओगे
पर चिंतन करोगे तो
उलझे हुओं को भी समाधान
का रास्ता दिखा दोगे...!!
      शुभ प्रभात

March 9, 2020

होली शुभकामनाएँ

आप सभी को होली की शुभकामनाएँ

March 4, 2020

मीठे बोल...

“क्रोध” में बोला हुआ केवल एक “कठोर शब्द” इतना “जहरीला” बन सकता कि आपकी हजार प्यारी बातों को एक मिनट में नष्ट कर सकता है । इसलिए…,
कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो ।।
       🙏 सुप्रभात 🙏

March 1, 2020

प्रात: स्नेह वंदन्

प्रात: स्नेह वंदन्
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प्रयत्न करने से कभी न चूकें..!
हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं,
विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं..!!

जो पानी में भीगेगा
वो सिर्फ लिबास बदल सकता है

लेकिन जो पसीने में भीगता है वो
इतिहास बदल सकता है.
    😊🙏🙏😊
(.व्हाट्सएप पर प्राप्त संदेश )

February 22, 2020

कोशिश...

कोशिशों का कद इतना बडा रखें
की तकदिर को भी अपना सर नीचा रखना पडे।
💐💐गुड मॉर्निंग💐💐

February 20, 2020

खुशियाँ

खुशियाँ तो बहुत आती है जिंदगी में
मगर 
हर खुशी तुम्हारा फता पुंछती है।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 18, 2020

वाह री जिंदगी..

बचपन में
कुछ भी नही था साथ
था तो बस हौसला,
डटे रहे
जिंदगी जिते रहे।
आज बुढापे में 
सब कुछ है
लेकिन 
जिने के लिए 
हौसला नहीं हैं।
हौसला अफ़ज़ाई करनेवाले 
तब भी नदारद थे
आज भी नदारद हैं।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 17, 2020

सलीक़ा...।

जिंदगी के हर लम्हें में 
खुशीयाँ छुपी होती है,
बस उन्हे जिने का
सलीक़ा चाहिए।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 10, 2020

खुबसूरत जिंदगी

जिंदगी तुम कितनी खुबसूरत हो,
ये तो हम है जिनकी नज़र मे़ खोट है।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 9, 2020

दोस्त....

दोस्त वों फुल होते है 
जिंदगी के पेड पर
जो कभी मुरझाते नहीं
हर वक्त जिंदगी में
खुशियाँ बाँटते हैं।

रविंद्र "रवी" कोष्टी

February 7, 2020

जीवन का अर्थ...

सभी शब्दों का अर्थ मिल
       सकता है
                 परन्तु
जीवन का अर्थ
          जीवन जी कर
                   और
संबंध का अर्थ
संबंध निभाकर ही मिल
    सकता है ।
          

          🌹 शुभसंध्या🌹

February 3, 2020

सच्ची सोच...

जिस मनुष्य के हृदय में सच्ची मानवता हो उसकी सोच हमेशा यही होगी कि,

मुझे मिला हुआ दुःख किसी को  न मिले और
मुझे मिला हुआ सुख सबको मिले
      🙏🏻 🙏🏻सुप्रभात🌹🌹
🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿🐿

February 1, 2020

रोशनी..

अगर आप किसी को
रोशनी दिखाने के लिए
दीपक जलाएंगे.
तो उजाला आपके
सामने भी होगा
  ‼ आपका दिन शुभ हो‼
           🙏 सुप्रभात 🙏

January 30, 2020

रिश्तें...।

रिश्ते निभाने के लिए बुद्धि नहीं,
दिल की शुद्धि होनी चाहिये..!!
सत्य कहो, स्पष्ट कहो, सम्मुख कहो,
जो अपना हुआ तो समझेगा,
जो पराया हुआ तो छुटेगा.!!
      🙏🏻🌹 सुप्रभात🌹🙏🏻
    आपका दिन शुभ हो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
रोज की तरह आज भी मैने सुबह सुबह संदेश फॉरवर्ड करना सुरु किया. इतने दोस्त और व्हाट्सएप ग्रुप है कि हर रोज तकरीबन आधा घंटा बित जाता है फॉरवर्ड करने में।ऐसे मे यह ध्यान ही नही रहता कि कब किसे संदेश फॉरवर्ड किया। काम खतम कर मै सुस्ता रहा था कि घरवाली आकर बडबडाने लगी। "आज का आपका संदेश बहुत ही सटिक है। जैसे व्यवहार करते हो उसे शोभा देता है।" 
मै सकपका गया,"अरे भागवान क्या हुआ? क्यो शोर मचा रही हो?" 
"रिश्ते निभाने के लिए बुद्धी नही..... वो तो आपके पास है नही! सही कहाँ न मैने!"
"जी बिलकुल सही कहा. वो क्या है कि हम परोपकारी लोग है. जब भगवान बुद्धी बाँट रहे थे तब मैने एक इंसान को लाईन के आखिर मे खडे देखा। थोडा पागल जैसा लग रहा था। मैने सोचा चलो इसकी सहायता कर दे। सो मैने मेरी जगह उसे दे दी और मै उसकी जगह चला गया। "
"तभी मै सोचू आप ऐसे क्यो है। " वो.
"लेकिन मैने अंदर की बात बताई ही नही।"मै.
" वो क्या?  " वो.
"मेरा नंबर आते आते बुद्धी खत्म होने को आयी थी। मुझे यह बात समझ आ गयी। इसलिए मैने यह परोपकार किया। " मै.
"अरे वा। आप तो बहुत समझदार थे।" वो.
"लेकिन तुमने वो कौन था ये नहीं पुछा।" मै
"जरूरत नही. लेकिन आप बता ही  दिजिए।" वो.
"अरे उसे मै तब थोडे ही पहचानता था। वो तो शादी के बाद पहचान हुई। तब पता चला वो तुम्हारा भाई था।" मै
"क्या????"वो
उनकी हालत देखने लायक थी।

January 29, 2020

भाग्यवान...


यात्रियों से भरी बस चली जा रहा थी, जब अचानक मौसम बदला और भारी बारिश चालू हो गयी और बिजली भी चारों तरफ चमकने लगी ।

सभी देख रहे थे कि बिजली कभी भी बस को चपेट में ले सकती है ।

रोशनी से बचने के 2 या 3 कठिन  प्रयास के बाद, चालक ने पेड़ से पचास फुट की दूरी पर बस बंद कर कहा -

"हमारे पास बस में कोई है जिसकी मृत्यु आज निश्चित है ।"

उस व्यक्ति की वजह से बाकी सब लोग आज भी मारे जाएंगे ।

अब ध्यान से सुनिये जो मैं कह रहा हूं ..
मैं चाहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति बस से उतर एक एक कर बाहर जाकर पेड़ के तने को स्पर्श करे और वापस आ जाए ।

"जिसकी मौत निश्चित है वह बिजली से पकड़ा जाएगा और मर जाएगा और बाकी सभी को बचा लिया जाएगा ।"

उसने पहले व्यक्ति को जाने और पेड़ को छूने और वापस आने के लिये कहा ।

वह अनिच्छा से बस से उतर गया और पेड़ को छुआ ।

उसका दिल प्रसन्न हो गया जब कुछ भी नहीं हुआ और वह अभी भी जीवित था ।

यही क्रम बाकी यात्रियों के लिए जारी रहा और उन सभी को राहत मिली जब वे पेड़ को छु कर लौटे और कुछ भी नहीं हुआ ।

लेकिन जब आखिरी यात्री की बारी आई, तो सभी उसे आँखों से घूरने लगे ।

वह यात्री बहुत डर गया और अनिच्छुक था क्योंकि वही केवल  अकेला बचा था ।

सभी ने उसे नीचे उतरने और जाने और पेड़ को छूने के लिए मजबूर किया ।

मृत्यु के 100% भय के साथ, अंतिम यात्री पेड़ के पास गया और उसे छुआ ।

उसी समय वहाँ गड़गड़ाहट की एक बड़ी आवाज़ गूँजी और बिजली ने बस को चपेट में ले लिया - हां, बिजली के चपेट में आने से बस के अंदर सभी मारे गये ।

इस घटना से यह स्पष्ट हो गया   ( मानना पडेगा ) कि पूरी बस इस आखिरी यात्री की उपस्थिति के कारण सुरक्षित थी ।

कई बार, हम अपनी वर्तमान उपलब्धियों के लिए स्वयं श्रेय लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि यह हमारे साथ जूडे एक व्यक्ति के कारण है । शायद उस व्यक्ति की वजह से हम अपनी वर्तमान खुशी, सम्मान, प्रेम, नाम, प्रसिद्धि, वित्तीय सहायता, शक्ति, स्थिति................का आनंद ले रहे हैं ।

अपने चारों ओर देखिए - शायद आपके माता-पिता, आपके पति या पत्नी, आपके बच्चे, आपके भाई-बहन, आपके मित्र आदि के रूप में आपके आस-पास कोई है, जो आपको नुकसान से बचा रहे हैं ..!

इसके बारे में सोचिये .. और उस आत्मा को धन्यवाद दें...।
(व्हाट्सएप से प्राप्त संदेश)

January 22, 2020

सफल जीवन...

सफल जीवन के चार
           सुत्र•••
मेहनत करे तो धन बने,
 सबर करे तो काम•••••
मीठा बोले तो पहचान बने,
               और
इज्जत करे तो नाम•••
.          💐💐शुभ रात्री💐💐

January 19, 2020

सफलता...

हर प्रयत्न में सफलता
शायद न मिल पाए
          लेकिन
हर सफलता का कारण
प्रयत्न ही होता है !!

🌹सुमधुर प्रभात 🌹

January 17, 2020

हमारा बचपन....

किस महानुभव ने यह व्हाट्सएप पोस्ट लिखी है, यह तो पता नहीं. लेकिन यथार्थ परिपूर्ण है. तबके जीवन की सच्चाई से ओतप्रोत मन लुभावन यह पोस्ट हम उम्र साथियों को जरूर पसंद आयेगी। अपनी प्रतिक्रिया देना न भुलना।

पाँचवी तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे... 
स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी इस पापबोध के साथ कि विद्यामाता नाराज न हो जायें,
कक्षा के तनाव में पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर ही हमनें तनाव मिटाया था।
स्कूल में टाट-पट्टी की अनुपलब्धता में घर से बोरी का टुकड़ा बैठने के लिए बगल में दबा कर भी साथ ले जाते थे !
कक्षा छः में पहली दफा हमने अंग्रेजी का ऐल्फाबेट पढ़ा और पहली बार एबीसीडी देखी 
स्मॉल लेटर में बढ़िया एफ बनाना हमें बारहवीं तक भी न आया था !
करसीव राइटिंग भी कॉलेज में जाकर ही सीख पाये !
उस जमाने के हम बच्चों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी,
कपड़े के थैले में किताब और कापियाँ जमाने का विन्यास हमारा अधिकतम रचनात्मक कौशल था !
तख्ती पोतने की तन्मयता हमारी एक किस्म की साधना ही थी ! हर साल जब नई कक्षा के बस्ते बंधते (नई काॅपी-किताबें मिलती) तब उन पर जिल्द चढ़ाना हमारे जीवन का स्थाई उत्सव था !
सफेद शर्ट और खाकी पेंट में जब हम माध्यमिक कक्षा पहुँचे तो पहली दफा खुद के कुछ बड़े होने का अहसास तो हुआ लेकिन पेंट पहन कर हम शर्मा रहे थे, मन कर रहा था कि वापस निकर पहन लें ! 
साईकिल से रोज़ सुबह कतार बना कर चलना और साईकिल की रेस लगाना हमारे जीवन की अधिकतम प्रतिस्पर्धा थी !
हर तीसरे दिन पम्प को बड़ी युक्ति से दोनों टांगो के मध्य फंसाकर साईकिल में हवा भरते मगर फिर भी खुद की पेंट को हम काली होने से बचा न पाते थे !
स्कूल में पिटते, कान पकड़ कर मुर्गा बनते मगर हमारा ईगो हमें कभी परेशान न करता.. हम उस जमाने के बच्चे शायद तब तक जानते नही थे कि #ईगो होता क्या है!
क्लास की पिटाई का रंज अगले घंटे तक काफूर हो जाता, और हम अपने पूरे खिलंदड़ेपन से हंसते पाए जाते !
रोज़ सुबह प्रार्थना के समय पीटी के दौरान एक हाथ फासला लेना होता, मगर फिर भी धक्का मुक्की में अड़ते भिड़ते सावधान विश्राम करते रहते !
हम उस जमाने के बच्चे सपनें देखने का सलीका नही सीख पाते थे, अपनें माँ बाप को भी ये कभी नही बता पाते थे कि हम उन्हें कितना प्यार करते हैं, क्योंकि "आई लव यू माॅम-डेडी" नहीं आता था !
हम उस जमाने  से निकले बच्चे गिरते सम्भलते लड़ते भिड़ते दुनियां का हिस्सा बने हैं ! कुछ मंजिल पा गये हैं तो कुछ यूं ही खो गए हैं !
पढ़ाई फिर नौकरी के सिलसिले में लाख शहर में रहें लेकिन जमीनी हकीकत जीवनपर्यन्त हमारा पीछा करती रहती रहती है. 
अपने कपड़ों को सिलवट से बचाए रखना और रिश्तों को अनौपचारिकता से बचाए रखना हमें नहीं आता है !
अपने अपने हिस्से का निर्वासन झेलते हम बुनते है कुछ आधे अधूरे से ख़्वाब और फिर जिद की हद तक उन्हें पूरा करने का जुटा लाते है आत्मविश्वास !
कितने भी बड़े क्यूँ न हो जायें हम आज भी दोहरा चरित्र नहीं जी पाते हैं, जैसे बाहर दिखते हैं, वैसे ही अन्दर से होते हैं !
हम थोड़े अलग नहीं, पूरे अलग होते हैं !
कह नहीं सकते हम बुरे थे या अच्छे थे,....यही एक पीढ़ी है जिसने जीवन जिया है। इसके बाद की पीढ़ी जीवन के अर्थ को समझ नहीं पाएगी । तब *के जीवन* और *के.जी.वन* में यह अंतर हमेशा बना रहेगा। 🙏

हमारा बचपन 
😢😢😢😢😢
हमारा बचपन