Digital Hindi Blogs



August 13, 2011

रजनी पती

हे चांद,
किसके  गम में जिता ही तू 
क्यो जागता रहता है तू रात भर
कौन है वो बदनशिब
जिसने तुझे  भुला दिया है
जानता हु मै, 
तुझमे दाग है न,
तेरी खुबसुरती मे दाग है
पर क्या हुआ
हर एक पर दाग होता ही है
ऐसा है कोई जिस पर कोई दाग न हो?
कोई है जिसमे खोट न हो?
नही शायद नही
फिर क्यो ऐसा क्यो?
तेरी इतनी सी खोट का इतना बडा जुल्म
कितना गम मिला है तुझे?
फिर भी तु  खुश रहता है
रातो मे करवटे बदलता है
और अंत मे सो जाता है
एक दिन वो भी आता है
जब रात भर जागता है तु
कतल की रात होती वो
हे रजनी पती
अरे हा
कही वो बेवफा रजनी तो नही?
जो तुझे छोड गयी है!
हां, ऐसा ही लगता मुझे
हा वही है वो बेवफा
कितनी दुर चली गयी है वो
तु कहा आकाशलोक मे
वो कहा धरती पर
फिर दोनो का मिलन कैसे होगा?
असम्भव है यह
अब ऐसा नही होगा
तुम दोनो कभी नही मिलोगे
केवल ताकते रहोगे एक दुसरे को जोवन भर
तु वहा से देखना
रजनी यहा से देखेगी
तेरी दुनिया मे सब सो जाते है
तारे झिलमिलाते है
पर तु तब भी जागता रहता है
मुहब्बत के मारो पर हमेशा जुल्म होता है
बेचारो को गम के शिवा मिलता ही क्या है?
हे रजनीपती

(रविन्द्र रवि)


August 4, 2011

हम तुम................

मै बाहो मे था तुम्हारी
तुम मेरी बाहो मे थी
मै खोया था तुम मे
तुम मुझ मे खोयी थी 
उलझी हुई  लटे तुम्हारी 
सुलझा रहे थे मेरे हाथ
दिल दिमाग आंखे
सभी खामोश थे पाकर तुम्हारा साथ
मै सपनो मे तुम सपनो मे
मै तुम मे तुम थी मुझमे
खोये खोये थे आपस मे 
हम तुम.
( दोस्तो यह प्रेम कविता मैने ६/११/१९८० को लिखी)

July 28, 2011

मुझे इंतजार है.......

बस  अब  इंतजार ही तीन दोस्तो का. वो आ जाये और दोस्ती का हात बढाये तो मेरा शतक पुरा हो जाये. हम भी  अपने आप को धन्य समझने लगेंगे.

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे की मुझे किस का इंतजार है. यदि नहीं तो पहेली बुझा दू. अजी अब पुरे  ९७  फोलोअर्स हो चुके है. अब सिर्फ ३ आना बाकी है. तो दोस्तों चलिए दोस्ती के हाथ बढाइये.
मेरे  सभी चाहनेवालो का शुक्रगुजार हु. सभी को तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हु. इसी तरह हौसला बढ़ाते रहियेगा.





July 22, 2011

जुदाई

तेरी  आरजू में जन्नत दिखाई देती है,
तेरे अश्को में तस्वीरे किस्मत दिखाई देती है;
तेरी जुदाई भी हमें मंजूर हो सकती है,
लेकिन दिल से दिल जुदा हो ये हमें मंजूर नहीं.



July 5, 2011

जिंदगी एक - पहेली

जिंदगी एक न छुटनेवाली पहेली है

चाहे जितना भी दूर भगाना चाहो 

लेकिन हमें कभी भी दूर न करनेवाली सहेली है 

 ऐसी  ये जिंदगी बड़ी अलबेली है!



 

June 18, 2011

मेला

गाँव का एक जवान थोडा पढ़ा लिखा एक बार अपने सालेसाहब के यहाँ शहर गया। रविवार के दिन दोनों शहर में घूमने गए। गाव के उस जवान ने एक जगह एक बोर्ड लगा हुआ देखा और साले से कहा " अरे देखो वहा तुम्हारा मेला लगा हुआ है।"
सालेसाहब सकपका गए और बोले, "जीजाजी, मेरा तो कही मेला नहीं लगा है।"
" अरे वहा देखो वो बडे- बडे अक्षरों में अंग्रेजी में लिखा दिखाई नहीं दे रहा।"
सालेसाहब ने बोर्ड की तरफ देखा तब उनकी समझ में आया की माजरा क्या है। और वो पेट पकड़ पकड़ कर बहुत देर तक हसते रहे।
दरअसल, बोर्ड पर लिखा था, "SALE KA MELA"
उस दूकान में असल में एक सेल लगा था। सेल को उस गाव के जवान ने साले पढ़ लिया.

May 14, 2011

श्रद्धांजलि अर्पित

कल मेरे प्रिय मित्र, वर्तमान के बोंस, इंजिनीअरिंग कोलेज के सिनिअर, श्रीमान अग्रवालजी जो की केंसर से पीड़ित थे कल भगवान को प्यारे हो गए।
इश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे।

May 5, 2011

ये मेरा इण्डिया!!


April 3, 2011

भारत - विश्व कप २०११ चेम्पियन



भारत - विश्व कप २०११ चेम्पियन बन गया।
धोनी की सूझ बुझ काम आई। धोनी ने दुनिया को दिखा दिया की शांति और सूझ बुझ से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
धोनी और इंडियन टीम को और सभी भारतवाशियों को बधाई।

April 1, 2011

जिन्दगी

ज़िंदगी ने क्या दिया मुझे
सोच परेशा हुआ जब मै
पीछे मुड़ के देखा मैंने
तो पाया,
उस राह पर,
जिस पर चल के मै
यहाँ तलक आया हूँ
सिर्फ काँटे ही बिखरे पड़े दिखाई दिए।
मैं निराश हुआ।
दुसरे ही पल
मेरी निगाहे
उस राह के दोनों तरफ बिखरी
हरियाली पर पड़ी
तब मैंने पाया
इन्ही काँटो पे चलने पर
आँखों ने जो बहाए थे आँसू
शायद
उन्ही आँसुओ से सिंच कर,
उस राह के दोनों तरफ,
जिस पर चल मैं
यहाँ तलक पंहुचा हु,
हरियाली गहराई होगी
इससे मुझे सुकूँ मिला
और
जिन्दगी से था जो गिला
वो दिल से दूर हो चला
पाया मैंने
और आज की ज़िंदगी को
चाहे पगडंडी पर कितने भी काँटे
क्यों न हो
खुशहाल पाया मैंने।
( इमेज: गूगल इमेज से)

March 30, 2011

विश्व कप- क्रिकेट 2011

मोहाली और देश में दीवाली। जी हा, आज मेच जितने की ख़ुशी में सारा देश दिवाली मन रहा है। सभी को बधाई!

March 28, 2011

जरा इसे देखिये!

March 26, 2011

जिंदगी एक गुलाब


जिंदगी एक गुलाब का फूल है

पंखुडिया जिसकी जिंदगी के हर पल है

चारों ओर से जो कांटो से सराबोर है

इसे खूबसूरत समझना क्या एक भूल है?

March 23, 2011

जिंदगी एक पहेली

जिंदगी एक पहेली है,
क्योकि
कल क्या हुआ?
आज क्या हो रहा है ?
कल क्या होगा?
क्यों होगा?
कैसे होगा?
कौन करेगा?
कब करेगा?
कहा करेगा?
कुछ भी तो नहीं पता है हमें
क्योकि जिंदगी एक पहेली है.

March 22, 2011

बेचारा आदमी

March 12, 2011

महाप्रलय




जपान देश बहुत कम समय मे उभरा है। उसे आज नैसर्गिक आपदाओ ने बुरी तरह घेर लिया है।इस तस्वीर को देखने से रोंगटे खड़े हो जाते है।
८.९ रिश्टर का भयंकर भूकंप वहा आया और साथ सुनामी नाम की राक्षस को भी लाया। इस राक्षस ने घर, कारखाने, कारे, ट्रक जो कुछ भी रास्ते में आया उसे अपनी आगोश में समा लिया है। इससे यही साबित होता है दोस्तों की इस ब्रम्हांड में ईश्वर से बड़ा कोई नहीं है। वो कुछ भी कर सकता है। हम चाहे कितना भी बचने की कोशिश करे जब तक वो नहीं चाहता हम बच नहीं सकते।
आज मुझे वो दिन याद आ रहे है जब मै जापान गया था। ओक्टोबर १९९८ में दिवाली की रात, जब दुनिया दिवाली मना रही थी हम मुंबई के हावाई अड्डे पर हवाई जहाज की राह देख रहे थे. रात १२ बजे हम सवार हुए थे.
मुझे मालुम था जापान में हमेशा भूकंप आते है। इसलिए जब हम वहा पहुचे हमें एक ५५ माले की होटल के ४४ वे माले पर एक कमरे में ठहराया गया था। वहा उस माले पर पहुँचाते ही मुझे ऐसा लगाने लगा था की वह ईमारत डौल रही है। डर लगता था। वहा हार जगह लिखा था की भूकंप आये तो लिफ्ट का इस्तेमाल न करे। फिर क्या क
रे तो कमरे में जो कांच की दीवार थी उसे तोड़े उस पर सीढ़िया है उसका इस्तेमाल कर निचे उतारे। मै सोचने लगा की १० सेकण्ड में भूकंप तबाही मचा देता है और ४४ वे माले से नीचे यदि लिफ्ट से जाते है तो २ मिनिट लगते है। पैदल जाने में कितना समय लगेगा। दिल को पक्का कर लिया और यदि भूकंप आता भी है तो मै अपने कमरे से किसी हालत में बहार नहीं जाऊंगा ये ठान ली। हमारा भाग्य की एक महीने में भूकंप नहीं आया।
ईश्वर से प्रार्थना करते है की जापान में भूकंप पीडितो को खुशहाल रखे और जो मृत हुए हो उनकी आत्मा को शांति दे।

March 10, 2011

मेरे ब्लॉग दोस्त


आज जब मैंने अपना ब्लॉग देखा तो पाया मेरे 50 ब्लॉग दोस्त बन गए है। बहुत प्रसन्नता हुई। मै आप सभी मित्रो का शुक्रिया अदा करने यहाँ आया हु।

आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया!


March 4, 2011

दुखो का दर्द

दुखो का दर्द समझना आसान नही होता
जानना हो अगर तो कांटो पर चल कर देख लो!

February 27, 2011

इंतज़ार



मुझको इंतज़ार है
दिल भी बेक़रार है
वो घडी जल्द ही आएगी
जिससे मुझको प्यार है.

February 23, 2011

नम आँखे


(source: google image)

आँखे है उनकी इतनी नम
बयाँ हो रहे हजारों सीतम,
क्या कहु कैसे कहु
मेरी भी आँखे हुई है नम।

आँखों से आँसू न यूँ बहाओं
कुछ दर्द हम को भी बताओं,
बाटने से होता है दर्द कम
आँखे है उनकी इतनी नम।

धोका दिया हो यार ने
होता है ऐसा प्यार मे,
दिल पे न यु करो सितम
मेरी भी आँखे हुई है नम।

February 21, 2011

अजब जिन्दगी

मेरी अज़ब है ज़िन्दगी
किसी से क्या गिला करू ।
तक़दीर रुठ जाये तो
मेरे ख़ुदा मै क्या करु।
हालात ने नशिब ने
ग़म भर दिये है इस कदर
न मंझिलो की कुछ ख़बर
मै कारवा को क्या करू।
मिल जाये डुबने से भी आख़िर
तो एक साहील कही
तूफां की है आरज़ू
तूफां की दुआ करू
मंझिल की थी तलाश
तो गर्द ए सफ़र मिली मुझे
आँखे बरस पड़ी मेरी
काली घटा को क्या करू।
(जगजीत सिंह की एक बेहतरीन गझल)

February 18, 2011

मार्ग दर्शन


दर्शन एक सवाल हल नहीं कर पा रहा था। वो बहुत परेशान हो गया। अंत में वह पड़ोस के अंकल के घर गया। अंकल पेपर पढ़ रहे थे। उन्होंने दर्शन को आते देख अपना मुह पेपर के पीछे छुपा लिया। उन्हें उसका बहुत डर लगता था। वह आये दिन उनसे सवाल पूछने आ जाया करता था। न दिन देखता था न रात। आज उनका बिलकुल भी मन नहीं था की उसके सवाल हल कर दे।
लेकिन दर्शन भाई साहब कहा हार मानने वाले थे। वो घर में घुस आया। और बोला अंकल आप बुरा न माने तो मै कुछ पुछु?
हां हां बेटा पूछो। मै क्यों बुरा मानने लगा भला।
दर्शन ने अपना सवाल पूछना सुरु किया। वो कब रुकेगा इसकी राह अब अंकल को देखनी थी।
आखिर वो वक्त आही गया जब दर्शन रुका और अंकल से बोला, अंकल, अब आप इस बारे मुझे मार्ग दर्शन कीजिये।
हा हा जरुर।
जी बताइए।
वो देखो बेटा वो रहा मार्ग याने की रास्ता। उन्होंने दर्शन को घर के दरवाजे की तरफ इशारा किया।
तो? अब दर्शन बोला।
अब उस मार्ग का दर्शन कर लो।
हो गया मार्ग दर्शन। बराबर। और अंकल जोर जोर से हँसाने लगे। हा हा हा हा ................
बेचारा दर्शन छोटा सा चेहरा कर वहा से चलता बना।
(गूगल इमेज)

February 15, 2011

मेरा जन्म दिन

आज १५ फरवरी। मेरा असली जन्म दिन। अरे आप चौक क्यों गए? वाकई में यह मेरा असली जन्म दिन है। ऐसा मै इसलिए कह रहा हु क्योकि माता-पिता को मेरा जन्म दिन याद न होने की वजह से स्कुल में मेरा जन्म दिन १ जून डाल दिया था। आपको आश्चर्य होगा हमारे घर में सभी का जन्म दिन १ जून है। इतना ही नहीं मेरी ससुराल में भी यही है। अजी इतना ही नहीं सभी घरो में १ जून ही जन्म दिन होता है। कारण माता पिता की अशिक्षा। पहले के ज़माने में हम इतने प्रगत नहीं थे। वो तो बाद में ढूंढ़ निकाला वो भी गाव के पालिका कार्यालय से। उन्हें धन्यवाद देना चाहिए की उन्होंने इतना पुराना रेकोर्ड संभल कर रखा।

मेरी बेटी

दोस्तों, हमें एक बेटी ही है। इस साल वह एम् एस सी ( केमिस्ट्री) के अंतिम वर्ष में है। मेरा तबादला पुना में हुआ और मैने परिवार सहित पूना में रहने की सोच ली। उसे यहाँ एक अच्छे से कोलेज में दाखिला मिल गया। पिचले हप्तेसे उसके कोलेज में इंटर नेशनल केमिस्ट्री इयर मनाया गया। कुछ प्रतीयोगीतये हुई। पोस्टर कोम्पी टी शन मी उसने भाग लिया। सौभाग्य से मै पालक सभा में हिस्सा लेने गया था उसी समय उस प्रति योगिता का रिजल्ट डिक्लेअर किया गया। मेरे ही सामने मेरी बेटी को पहिला पुरस्कार मिला।मुझे बहुत ही आनंद हुआ। मन प्रफुल्लित हुआ। मुझे मेरी बेटी पर गर्व हुआ।
मैंने सोचा अपना आनद आपसे शेअर करू इसलिए यहाँ यह पोस्ट लिखी.

February 12, 2011

आँखे

( गूगल इमेज)
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
जो इस हँसी चहरे पर चार चाँद लगा देती है।
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
जो आसमाँ में हँसी चाँद दिखाती है।
ये हँसी दुनिया,
ये सौदर्य से लदी धरती
ये नीला आसमाँ
ये खुबसूरत जहाँ
हमें दिखलाती है
कितनी खुबसूरत है ये आँखे
लेकिन हम इन्हें महज एक अँग समझ बैठते है
हमें इनका महत्त्व महसूस ही नहीं होता
वो तो उनसे पूछिए
जिन्हें ऊपरवाला
ये दो खुबसूरत मोती
ये दो आँखे देना भूल जाता है
वे जो इन आँखों को देख नहीं सकते
वे ही जानते है
कितनी खुबसूरत होती है ये आँखे



February 8, 2011

अकेलापन


जाने किस बात की सजा देते हो मुझे ?
हे प्रभु
मैंने ऐसा क्या गुनाह किया है?
मेरे अपने क्यों मुझसे खफा है?
अब तो ये अकेलापन काटने लगा है।
मुझे ऐसा लगता है
जैसे

इस धरती पर मै अकेला ही
जीव रह गया हु।
अब मुझसे बर्दास्त नहीं होता
हे प्रभु
ये
अकेलापन।
क्यों रूठ गयी हो तुम मुझसे
बताओ मुझे बताओ।
मेरा क्या गुनाह है।
इस तरह चुपचाप न रहो
तुम कुछ तो कहो
मै पागल हो जाऊंगा अब
ना सताओ मुझे।
हे प्रभु आप ही कुछ करो
उसे समझाओ
हे प्रभु ।

February 6, 2011

जिंदगी एक सागर है

(सोर्स :गूगल इमेज)

जिंदगी एक सागर है

हम उसकी एक गागर है

उपरवाला पैदा कर

हर क्षण इस गागर में

एक एक बूंद जीवन के टपकाता रहता है

और

जब यह गागर भर जाती है

वो उसे फोड देता है

फर्क बस इतना है दोस्तों की

कौनसी गागर कब भरनी है

और

उसे कब फोडना है

यह उपरवाले की मर्जी पर

निर्भर करता है ।
हम तो बस एक गागर भर है।



February 5, 2011

जिंदगी एक झील

(गूगल इमेज)


जिंदगी एक झील है
जो तैरना सीख ले
वो जिंदगी जी लेता है,
वरना जिंदगी भर
इस झील में डूबकी लगाता रहता है
और अंत में डूब ही जाता है.


January 26, 2011

गणतंत्र दिवस


आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये

"वंदे मातरम."


January 24, 2011

एक महान कलाकार

शास्त्रीय संगीत के एक महान कलाकार पंडित भीमसेनजी जोशी अब इस दुनिया में नही रहे. मेरा सौभाग्य मनात हू कि आज मै उनके शहर पुना में रह रहा हु. पद्मश्री, पद्मभूषण भारत भूषण इ. पुरस्करो से उन्हे सन्मानित किया गया था. ऐसी महान हस्ती को मेरा सबसे पसंदीदा गीत 'मिले सूर मेरा तुम्हारा.......' के साथ श्रद्धांजली अर्पित करता हु.
भगवान उनकी आत्मा को शांती दे.



January 22, 2011

ये बीबियाँ

( आजकल पता नहीं क्या हुआ है मुझे मै व्यंग लिखने लगा हू, ये कैसा बदल हुआ कब हुआ पता ही नहीं चला. अच्छा हुआ मेरी घरवाली यानी बीबी जी को पता नहीं चला अभी तक वरन...........खैर इस व्यंग के लिए मै अपनी बीबी से और तमाम बहनों से प्रस्तुत करने से पहले ही माफी मांग रहा हू. तो लिहिये मेरी एक और व्यंग भरी कविता.)
आज कुछ यु हुआ
कि हम सबेरे सबेरे
एक बहुत ही हसीन सपना
देख रहे थे
सपने में हमे एक हसीना मिली
हम उससे बतिया रहे थे
अचानक बीबी की खनखनखनाती आई
वो आवाज कानो से कुछ ऐसे टकराई
जैसे समुंदर किनारे
चट्टानो से समुंदर की लहरे
टकराने से आवाज आई हो।
जैसे बारिश में तुफान की आवाज आई हो
और
बौखलाहट में हम
उस हसीना को अकेले ही छोड
दूम दबाकर भाग खडे हुये।
अजी पलटकर देखने की
हिम्मत भी नही जुटा पाये हम।
भाईयो,
ऐसा क्यो होता है?
ये बीबियाँ हमेशा
गलत वक्त ही क्यो टपक पडती है?
और तो और
जागते हुए सपने देखने न दिये तो ठीक है
निंद में भी ख्वाब न देखने देती है
ये बीबियाँ

January 20, 2011

सबेरे का सपना

मैंने बहुत बार
ऐसा कहते सूना है लोगो को
की सवेरे देखे जाने वाले सपने
अक्सर सच होते है।
जब से सूना है
तब से ही मै रोज सवेरे कोई अच्छा सा सपना देखु
ऐसा दिन में देखे सपने में सोचता हूँ
और
रोज रात बिस्तर पर लेटते ही
हसीन सपनों के ख्वाब रंगने लगता हूँ
ख्वाब के रंग में रंगते ही मुझे नींद आ जाती है
और रात भर नींद में ही
सवेरे कोई हसीन ख्वाब देखने के
ख्वाब देखने लगता हूँ
सुबह होते होते
एक हसीन ख्वाब दिखाई देने लगता है।
ख्वाब में
किसी हसीना के हसीन पैरों की आहट सुनाई देती है
और
ख्वाब में ही मै
उसको देखने के लिए तैयार होता हूँ।
पर हाय रे नशीब,
उस हसीना के पैरों की उंगली
जैसे ही दिखाई देती है
कानों में
बीबी की झंकार सुनाई देती है
और मै बौखलाकर जागृत हो जाता हूँ,
उस समय सुबह के छह बज चुके होते है
और मेरा सपना अधूरा ही रह जाता है।
ऐसा अक्सर होता है दोस्तों
खैर
होनी को कौन टाल सकता है भला
तकदीर अपनी अपनी
सपने अपने अपने

January 17, 2011

नजदीक आती दुनिया

दोस्तों, एक समय था जब अमरीका, लन्दन, जापान हमारे लिए ख़्वाब-सा था. कोई सोच भी नहीं सकता था की दुनिया आज जीतनी नजदीक आ सकती है। उन दिनों कोई यदि विदेश गया तो उसके घरवाले दर जाते थे। पता नहीं वापिस आएगा या नहीं। हवाई जहाज से यात्रा करनी है। कुछ हो गया तो. लेकिन आज ऐसी हालत नहीं है। लोग एक दिन में जाकर वापस आते है। मै जब जापान गया था तब मुझे ऐसा ही दर लगा था. इसलिए मै जाते समय सभी से मिल-कर गया था. ना जाने वापिस आ सकूंगा की नहीं. हां तो मैंने सिंगापूर में देखा था की कुछ लोग मुम्बई से सिंगापूर शोपिंग करने जाते है। यह बात है १९९८ की।
आज समय बदल गया है। जब से हमारे देश में आयटी क्षेत्र का जाल फैल गया है. तब से विदेश जाना आम बात हो गयी है। बच्चे नौकरी पर लगते की विदेश जाने के ख्वाब देखते है। यही नहीं उन्हें नौकरिपर रखने से पहले पासपोर्ट होना जरुरी होता है।
यह मै लिख रहा हू क्योकि मेरा भांजा कल रूस की राजधानी मास्को गया है। लेकिन आश्चर्य की बात है की वो आय टी में नहीं है और न ही इंजिनिअर है। उसने बी ए एम एस किया है और उसके बाद एम डी कर रहा है। उसे मास्को शहर के मेडिकल कोलेज में लेक्चर देने बुलाया गया है। जहा उसे दो महीने तक अस्पताल भी चलाना है। उसने खुद ने और हम सभी ने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था की उसे आयुर्वेदिक डॉक्टर बनाने के बाद विदेश जाने का मौका भी मिलेगा। इसे ही भाग्य कहते है।
उसके वहा पहुचते ही उसका मेल आया और शाम को उससे चेटिंग भी हुई। इंटरनेट ने दुनिया को बहुत ही नजदीक लाकर खड़ा कर दिया है। पता ही नहीं चलता वह इन्सान घर में है या किसी और देश में। आसानी से उससे बात हो जाती है।
१९९८ में जब मै जापान गया था मुझे याद है शिर्फ मुंबई में फोर्ट एरिया में एक सायबर केफे सुरु हुआ था। और एक घंटे का १०० रूपया लगता था। मैंने वहा १ महीने की कालावधि में नेट सिखा था।

कचरा- एक सिरदर्द


आजकल शहरों की जनसँख्या दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही है। इस वजह से शहरों में कचरा इस कदर बढ़ रहा है की उसका आगे क्या करे यह सोच कर स्थानिक प्रशासन हैरान हो जाता है। अक्सर  यह कचरा डालने के लिए शहर के बाहर जगह बनाई जाती है। लेकिन शहर की परिसीमा बढ़ती ही जा रही है। हर साल कचरे के लिए जगह खोजना मुसीबत बन जाता है।मै आपको एक ऐसा नुस्का बताना चाहता हु जिससे आप खुश हो जायेंगे और प्रशासन को  भी थोड़ी राहत  मिल जाएगी।

हमारे घर में हर रोज जो कचरा निकलता है उस में जादातर हरी सब्जियों के डंठल, पत्ते होते है। इस कचरे को हम न फेक बारीक़ काट कर हमारे आँगन में लगे पेड पौधों को खाद के रूप में इस्तेमाल करे तो बहुत ही उपयोगी साबित होते है। मै अक्सर यही करता हू।
इसके अलावा कचरे में फलो के छिलके या फलो के टुकड़े निकलते.है जैसे केले के छिलके, चीकू, सेब, आम, पपीता इन फलो के छिलके तो बहुत ही अच्छी खाद साबित होते है। मैंने यह सब खुद किया है। मै तो करता  हू आप भी कर के देख ले और अपना शहर साफ रखने में मदद करे।
धन्यवाद!

January 12, 2011

प्याज और महंगाई


कल रात घरवाली बोली
एजी, सुनते हो
(जब से महंगाई बरपाई है
मुझे एजी शब्द से डर लगने लगा है जी)
ये एजी शब्द कानो मे
पडते ही मुझे पसीना
छुटने लगा
मै कांपती आवाज मे बोला
एजी सुनाईये
उन्होने फरमाया
जरा बाजार हो आईये
मैने कहा ठीक है जी
हम हो आते है
और हम बिना चप्पल जुता
पहने, झोला लिये
खिसकने ही वाले थे
कि घरवाली बोली,
अजी क्या लेने चल पडे
मैने कहा आपने कहा तो
जरा बाजार के हाल हवाल ही जान लेते है,
नही जी, हाल हवाल नही
जरा एक किलो प्याज ले आइये
प्याज शब्द कानो मे
पडते देते ही मुझे
प्यास लगने लगी
मैने घरवाली से पानी मांगा
पानी देते हुए वो बोली
अजी प्याज का नाम सुनते ही
आपको प्यास क्यो लगने लगी
मै बोला
एजी पहले प्याज सिर्फ रुलाता था
आजकल
प्यास भी दिलाता है,
एजी, एक किलो प्याज का आप क्या करेंगी
अचार डालने के लिये अभी कैरी आना बाकी है,
वो बोली हा जी
ये प्याज मै सालभर
संभालकर रक्खुंगी
उसकी गंध बहुत तेज होती है
खाने के साथ डायनिंग टेबल पर
सजा गंध ले लेना
ये तो बहुत बढीया नुस्का है जी
चाहे जो भी भाव हो जाये
अभी प्याज का
हमे डर नही लगता
मै बोला
एजी लेकिन आप आमलेट कैसे बनओगी
अभी तक तो प्याज ही रुला रहा था
अब अंडा भी रुलाने लगा है
वो बोली हा जी
शायद
अब मुर्गी भी कम अंडे देने लगी है
उसे क्या मालुम उसके कम अंडे देने से
महंगाई बढेगी
मैने कहा हां जी
ये बात तो धरती, पेड, पौधे
किसी को भी नही मालुम
वरना डिजल, सब्जी, अनाज और फलो
के भाव भी आंसमान नही छुते
वो बोली
हा वो बेचारे क्या समझे इस बात को.
आखिर उसने प्याज मंगवाना टाल ही दिया
और हमने
घर मे आराम करना ही ठीक समझा.


January 6, 2011

अजी सुनती हो!


अजी सुनती हो?
अन्दर से आवाज आई,' हां जी कहिये?'
'अजी मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है। जरा एक प्याला चाय मिलेगी तो अच्छा रहेगा.'
'ठीक है जी।' अन्दर से ही उसने कहा।
थोड़ी देर बाद वो चाय का प्याला लेकर आई। 'ये लीजिये।'
'लाइए।'
अब थोड़ी रहत मिली।'
'अजी सुनते हो।'
'क्या है अब।'
मै दबा दू?'
'अरे नहीं। तुम दबा दोगी तो तुम्हारा क्या होगा?'
'मेरा क्या होगा जी। थोडा पुण्य मिल जायेगा।'
'क्या कहा पुण्य मिलेगा!'
'हां हां थोडा पुण्य मिलेगा।'
'हे भगवान! मुझे बचालो इस औरत से।'
'अजी मैंने ऐसा क्या कह दिया की आप भगवान को बुलाने चल पड़े।'
'अभी तो तुमने कहा की दबाने से तुम्हे पुण्य मिलेगा।'
' हां तो इसमे बुरा ही क्या है। अपने पतिदेव की सेवा तो करना ही चाहिए।'
'क्या पतिदेव? और उसी का गला दबाने की बात कह रही हो।'
'क्या? मैंने ऐसा कब कहा जी?'
'तुम ही तो कह रही थी दबा दू?'
'हां वो तो मैंने सर दबा देने की बात कही थी।'
' मुझे माफ कर दो जी मैंने गलत समझा।'
कोई बात नहीं।'
थोड़ी देर बाद....
'अजी सुनते हो।'
'क्या है?'
'क्या पकाऊ?'
' ....'
'अजी मैंने कुछ पुछा आपसे।'
'.......................'
'कमाल के आदमी हो आप। आपकी बीबी आपसे कुछ पूछ रही है और आप है के जवाब ही नहीं दे रहे हो।'
'क्या जवाब दू? तुम पका तो रही हो।'
'अजी मै तो यहाँ आपके साथ बैठी हु। मै कह कुछ पका रही हु।'
'फिर क्या कर रही हो?'
उसने कुछ समझ नहीं आया ऐसी मुद्रा में उनकी तरफ देखा।
'अरे तुम मुझे क्यों पका रही हो?'
'अच्छा मै अब आपको पकाने लगी हु।'
'और क्या'
'हे भगवान मुझे इस इन्सान से बचालो।'
'मैंने क्या गलत कहा की तुमने भगवान को बुला लिया।'
'आपको अब मै अच्छी नहीं लगती हु।'
'अजी मैंने ऐसा तो नहीं कहा।'
'पति कभी खुल के पत्नी से ऐसा कैसे कहेंगे. इसलिए आड़े तिरछे शब्दों में कह ने की कोशिश करते है। क्या मै इतना भी नहीं समझती।'
'आरी भागवान, मुझे मुआफ कर दो। गलती हो गई। दुबारा ऐसा नहीं होगा।'
'ठीक है मुआफ कर दिया।'
थोड़ी देर बाद.....
'अजी आप काम कर रहे है तब तक मै ऊपर जाऊ।'
'जाओ जाओ जल्दी जाओ।'
'अभी थोड़ी देर में वापिस आ जाउंगी।'
'क्या?'
'हां वापिस आउंगी।'
'कैसे?'
'सीढियो से चल के।'
'क्या बात कराती हो। ऊपर जाने वाला कभी वापिस आता है भला। और वो भी सीढियो से।'
उसने रोना सुरु कर दिया,'हे भगवान, क्या हो गया है इस इन्सान को। नहीं नहीं अब आपको मै बिलकुल ही नहीं भांति। इसलिए मै अपने मायके चली जाती हु।'
'अरे मै तो मजाक कर रहा था!'
'..........'
'माफ कर दो बाबा।'

January 4, 2011

ऐ जिन्दगी

ऐ जिन्दगी,
मेरी ख्वाहिश है
जरा तू भी तो जीवन जी के देख ले,
तुझे भी तो पता चले
जीवन जीना कोई बच्चो का खेल नहीं,
तुझे भी तो पता चले
जीवन जीने के लिए
कितने पापड बेलने पड़ते है ।
ऐ जिन्दगी,
तू भी तो समझ ले
जीवन में एक कतरा सुख पाने के लिए
कितने दुखो के अंगारों पे चलना पडता है,
तू भी देख ले ऐ जिंदगी
जीवन किस चिड़िया का नाम है,
ऐ जिन्दगी

January 3, 2011

जिंदगी

जिन्दगी
तू क्या क्या रंग दिखलाती है,
कभी दिन कभी रात ला
हमे अच्छे और बुरे का पाठ पढाती है।

January 1, 2011

नए साल की नयी सुबह

नये साल कि नयी सुबह
लेकर आई नया सूरज
दोस्तो चाहे कैसे भी बीता हो पिछला साल
नये साल मे मिलेगा आनंद और उल्हास हि
राखो थोडा धीरज,
क्या जल्दी है
अभी तो आया है २०११
कर अलबीदा २०१०
जरा उसे सुस्ता तो लेने दो
फिर उसका साथ दे
उसके कंधे से कंधा मिला
मेहनत जो करोगे
साल भर आनंद
और उल्हास हि पाओगे
!!नया साल मुबारक हो!!

December 31, 2010

साल मुबारक


सभी दोस्तों को नए साल की हार्दिक शुभकामनाये। इस अवसर पर मैंने एक कविता इस फोटो पर लिखी है। कविता मैंने ही लिखी है। वह यहाँ पेश कर रहा हु।

December 27, 2010

योगगुरु




मित्रो स्वामी रामदेवजी ने योग के अलावा एक और काम अच्छा और हमारे भले का किया है। वो है हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में आवश्यक चीजे उपलब्ध करना। आज उनके बिस्किट भी उपलब्ध है। हम पिचले करीबन ३ सालो से उनके द्वारा उपलब्ध कराये गए प्रोडक्ट ही इस्तेमाल करते आये है। दन्त कान्ति, स्नान के लिए साबन, केश के लिए सेम्पू, दांतों का ब्रश ये चीजे भी अब उपलब्ध की जाती है। हम ये ही इस्तेमाल करते है। बहुत बढ़िया अनुभव है।

कल मै कुछ सामान खरीदने पर केरी बेग मांगी तो मुझे न्यूज पेपर से बनी एक बेग दी गयी। मै बहुत खुश हुआ। वाकई आज कल के समय में इस तरह पेपर बेग इस्तेमाल करना बहुत जरुरी हो गया है।

December 20, 2010

तनहा

कितने तनहा है हम उनके बिना,
किसी से कह भी नहीं सकते।
ये दुःख
ये दर्द
ये तन्हाई,
सह भी तो नहीं सकते।
या खुदा
कितने बद नशीब है हम,
वो सामने आ जाये तो भी
उसने दर्द- ये-हाल
कह भी  नहीं सकते।

November 5, 2010

दीपावली की संध्या पर....

इससे पहले दीपावली के शाम हो जाये
बधइयो का सिलसिला आम हो जाये
भीड़ में शामिल हमारा भी नाम हो जाये
क्यों न दीवाली की राम राम हो जाये

November 4, 2010

दीवाली की शुभ कामनाये


आप सभी को दीवाली की शुभ कामनाये