जिसके आने की खबर ही
बेचैन कर गयी हो,
उसके दिदार होने पर जन्नत हाशिल होगी.
रविंद्र 'रवि' कोष्टी
*हँसते हुए लोगो की संगत
सुगंध की दुकान जैसी होती है.!*
*कुछ न खरीदो तो भी शरीर को महका ही देती है..!!*
*सादगी परम सौंदर्य है,क्षमा उत्कृष्ट बल है..!*
*विनम्रता सबसे अच्छा तर्क है..!!*
*और अपनापन सर्वश्रेष्ठ रिश्ता है...!!*
*सुप्रभात*
🌄🌅☕☕🌄🌅
कोई हमारी*
*गलतियां निकालता है*
*तो हमें खुश होना चाहिए..!*
*क्योंकि*
*कोई तो है*
*जो हमें पूर्ण दोष रहित*
*बनाने के लिए*
*अपना दिमाग और*
*समय दे रहा है ।*
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*सुप्रभात*
🫖☕☕☕🙏🏻🙏🏻
हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा बडी गहन है। भावनाओं से ओतप्रोत। आपके मन मे जिस तरह के भाव चल रहे होते है बस उसी मिजास से शब्द आपके मुख से बाहर आते है। जैसे की आप बहुत घुस्से मे है तो आप अपने लाडले को बेटा कह कर नहीं बुलाओगे। उस समय वो भद्दा लगेगा। नहीं नहीं, भाई बेटा शब्द आपके मुख से निकलेगा ही नहीं। आप कहोगे ऐ छोकरे।
वैसे ही बेटे को पिताजी ने पैर मारा ऐसा कही कहा जाता है भला? उस समय लात मारी यही कहना उचित होता है और शोभा भी देता है।(पिताजी ने लात मारना यह पुराने जमाने की बात हो गयी अब।)
जब आप प्यार दुलार से बात करते हो तब आपके मुँह से बेटा जरा यहाँ आओ। ऐसे शब्द बाहर आयेंगे। उस समय ऐ छोकरे इधर आ ऐसा बिल्कुल भी नही कहोगे।
वैसे ही पत्नी जब पती को लाड प्यार से आवाज देती है तो अजी जरा सुनो तो ऐसे कहेगी। लेकिन जब गुस्से मे हो तब .......