October 20, 2012

"जिंदगी की गहराई"

"जिंदगी की गहराई"
अगर समझो तो 
एक खुबसूरत झील  है,
और 
अगर ना  समझो तो 
 मौत का कुआ है. 


20 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया, बहुत सुंदर

रविंद्र "रवी" said...

बहुत बहुत धन्यवाद!

Dr.NISHA MAHARANA said...

bilkul sahi bat ...

रविंद्र "रवी" said...

thank u so much Dr.

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 27/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

रविंद्र "रवी" said...

शुक्रिया यशोदाजी!

मंथन said...

बिलकुल सही ......कम मगर काम की बात ...

मंथन said...

बिलकुल सही ......कम मगर काम की बात ...

धीरेन्द्र अस्थाना said...

कम शब्दों में गहन चिंतन !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

विचारणीय

Reena Maurya said...

एकदम सही...
बहुत बढियां...
:-)

Onkar said...

बहुत खूबसूरत

Anju (Anu) Chaudhary said...

बहुत खूब

विकास गुप्ता said...

क्या खूब कही ।

Mamta Bajpai said...

सत्य है

Rewa said...

kam shabdo may gehri baat......

रविंद्र "रवी" said...

यशोदाजी शुक्रिया! हलचल पर हमने अपनी ही कविता पढ़ी!

रविंद्र "रवी" said...

अभिषेकजी "मंथन" शुक्रिया!

रविंद्र "रवी" said...

संगीता स्वरुप जी आशीष के लिए शुक्रिया!

रविंद्र "रवी" said...

उर्वरित सभी को धन्यवाद!